नेशनल फिल्म अवॉर्ड में कब से प्राइज मनी मिलने की शुरुआत हुई? पहली बार मिले थे बस इतने हजार रुपये

नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स 2026
National Film Awards Price Money History: नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का इतिहास बहुत पुराना है. करीब 7 दशक पहले साल 1954 में फिल्मों के लिए सरकार द्वारा अवॉर्ड्स देने की शुरुआत हुई थी. तब इसे स्टेट अवॉर्ड्स फॉर फिल्म के नाम से जाना जाता था. बाद में इसी का नाम राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार कर दिया गया. बीते 7 दशकों में इस प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स में कई तब्दीलियां की गई हैं. कई कैटेगरीज को बाद में शामिल किया गया है. और अवॉर्ड्स देने के तौर-तरीकों में भी बदलाव किए गए हैं. अबतक का नेशनल अवॉर्ड्स का सफर बहुत लंबा रहा है. 7 दशकों में कई बदलाव हुए, कई कलाकारों को सम्मानित किया गया, कई कैटेगरीज में इजाफा हुआ. देश की विविधता और संस्कृति को बढ़ावा देने और कला को और निखारने के मकसद से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ने खुद में ही एक उपलब्धि हासिल की है और आज भारत की फिल्मों का डंका दुनियाभर में बज रहा है.
मंगलवार 22 सितंबर 2026 को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का वितरण होगा. इस मौके पर कलाकारों को प्रमाण पत्र के साथ स्वर्ण और रजत कमल और नकद राशि भी दी जाएगी. लेकिन क्या ये राशि शुरुआत से मिलती आई है. क्या जितने रुपये इनामी राशि के तौर पर पहले मिलते थे उतने ही अब भी मिलते हैं. आइए जानते हैं राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए इनामी राशि का चलन कबसे शुरू हुआ और शुरुआत से लेकर अबतक इसमें कितने बदलाव हुए हैं.
राष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ पहली नकद राशि कब दी गई?
साल 1954 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की शुरुआत हुई थी. उस दौरान विजेता को स्वर्ण या रजत पदक और प्रमाण पत्र दिए जाते थे. शुरुआत में सिर्फ निर्देशकों को ही ये सम्मान मिलता था. 1968 से अभिनेताओं और अन्य वर्क में भी सम्मान दिए जाने लगे. वहीं दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की घोषणा और बाद में की गई और 1969 से दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिए जाने लगे. 1954 से 1956 तक अवॉर्ड के साथ कोई इनामी राशि नहीं दी जाती थी. इसकी शुरुआत साल 1957 से हुई.
इनामी राशि में अब तक कितने बदलाव हुए?
1957 से 5000 रुपये की नकद राशि विजेताओं को दी जाने लगी. इसके बाद साल 1967 से इसे बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया और साल 1973 तक ये राशि दी गई. साल 1974 में 22वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में इस राशि को बढ़ाकर 15 हजार कर दिया गया वहीं इसके बाद सला 1977 में 25वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ये राशि बढ़कर 20,000 रुपये कर दी गई थी.
शुरुआत से ही नेशनल अवॉर्ड का मकसद कलाकारों को उत्साहित करना और उनके मनोबल को बढ़ाने का रहा. 28वें एडिसन में कलाकारों को और भी ज्यादा फायदा मिला और साल 1980 में पुरस्कारों के साथ श्रेष्ठ निर्देशकों को 50,000 रुपये की इनामी राशि दी जाने लगी. 2006 में 54वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स तक ये राशि बढ़कर 2,50,000 रुपये की हो गई. वहीं मौजूदा दौर की बात करें तो 72वें संस्करण में सबसे ज्यादा प्राइज मनी 3 लाख रुपये की है. वहीं कला जगत में देश के सबसे प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड जीतने वाले कलाकार को 10 लाख रुपये की इनामी राशि दी जाएगी.

डायरेक्टर्स को मिलती हैं एक्टर्स से ज्यादा प्राइज मनी
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की जब शुरुआत हुई थी तो सिर्फ डायरेक्टर्स को ही सम्मानित किया जाता था. 1954 से 1967 तक यही सिलसिला चलता रहा. इसके बाद 1968 से अभिनेताओं को भी पुरस्कार दिए जाने लगे और इसमें सिंगर्स समेत अन्य तकनीशियनों को शामिल किया गया. अभिनय के लिए पहला नेशनल अवॉर्ड बंगाली एक्टर उत्तम कुमार को एंटोनी फिरंगी फिल्म के लिए मिला था. वहीं बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड रात और दिन फिल्म के लिए नरगिस ने हासिल किया था. इसके बाद से ही विभिन्न श्रेणियों के सर्वश्रेष्ठ कलाकारों को नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया जाता है.
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इसमें खास बात ये है कि भले ही ग्लैमर वर्ल्ड में अभिनेताओं की पॉपुलैरिटी डायरेक्टर्स से ज्यादा हो. लेकिन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सबसे ज्यादा इनामी राशि दादा साहेब फाल्के से सम्मानित हुए कलाकार के बाद डायरेक्टर्स को ही मिलती है. इसके बाद एक्टर्स का नंबर आता है. मौजूदा समय की बात करें तो बेस्ट फीचर फिल्म के लिए 300000 रुपये की इनामी राशि दी जाती है वहीं बेस्ट एक्टर्स को 200000 रुपये की राशि दी जाती है.

इस साल कौन-कौन कलाकार होगा सम्मानित
अब ये सिलसिला 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स तक पहुंच चुका है. इस साल दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड दिग्गज एक्टर अनंत नाग को दिया जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड आर्टिकल 70 को मिल रहा है वहीं बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड अमरन फिल्म के लिए राजकुमार पेरियासामी को मिल रहा है. इसके अलावा बेस्ट एक्टर का अवार्ड कार्तिक आर्यन और मामूटी के नाम रहा है और बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड आर्टिकल 370 के लिए ही यामी गौतम को दिया जा रहा है.

पुनीत उपाध्याय
पत्रकारिता जगत में 7 साल पूरे कर चुके पुनीत उपाध्याय रायबरेली से ताल्लुक रखते हैं. वे टीवी 9 के डिजिटल विंग में साल 2022 से सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. कला, संगीत, सिनेमा, साहित्य पर लिखने का शौक रखते हैं. साथ ही इससे जुड़ी हर छोटी, बड़ी और रोचक खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं. इसके अलावा वे अन्य बीट्स में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. पुनीत मानते हैं कि कला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि उससे इतर अंतरमन से जुड़ने और समाज से रूबरू होने का एक सार्थक जरिया भी है. CSJM कानपुर युनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद पुनीत ने ITMI (इंडिया टुडे मीडिया इंस्टिट्यूट) से मास कॉम्युनिकेशन में पीजी डिप्लोमा का कोर्स किया है. पुनीत की पहली जॉब आज तक में थी जहां उन्होंने 4 साल सब एडिटर की पोस्ट पर काम किया और मनोरंजन बीट के लिए अपनी सेवाएं दीं. पुनीत की रुचि लिखने में है और वे कलम की धार से समाज में बदलाव लाने में विश्वास रखते हैं. इसके अलावा उनकी रुचि आध्यात्म, साहित्य, गायन, दर्शन, क्रिकेट और मनोविज्ञान में है.
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