पटवारियों के कार्य बहिष्कार से किसानों के सामने ये तीन बड़े संकट - Sehore News
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समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने की उम्मीद लगाए बैठे सीहोर जिले के हजारों किसानों के सामने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। 15 सितंबर से धान उपार्जन के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है, लेकिन शुरुआत के 9 दिन में पूरे जिले में केवल 463 किसानों का ही पंजीयन हो सका है।
पंजीयन कराने की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर तय की गई है। इसके विपरीत, पिछले साल जिले में 9,011 किसानों के पंजीयन हुए थे। पंजीयन की इस कछुआ चाल के पीछे पटवारियों द्वारा गिरदावरी का काम न करना है। जिले के पटवारी 17 सितंबर से तीन प्रमुख शासकीय कामों का बहिष्कार कर रहे हैं, जिनमें फसल गिरदावरी, स्वामित्व अधिकार पत्र और फार्मर रजिस्ट्री शामिल हैं। गिरदावरी न होने से उपार्जन पोर्टल पर किसानों की फसल का सत्यापन दर्ज नहीं हो पा रहा है, जिसका सीधा असर मूंग के पंजीयन पर पड़ रहा है।
फार्मर रजिस्ट्री : फार्मर रजिस्ट्री में किसानों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करते हैं, जिससे उन्हें भविष्य में सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। बाहर से आकर सीहोर जिले में जमीनें खरीदने वाले कई लोगों के रजिस्ट्री में दर्ज नंबर बंद मिलते हैं। फोन लगने पर भी वे विवरण देने से मना कर देते हैं या पटवारी को टाल देते हैं। इसके अलावा, जिन बेटियों की शादियां हो चुकी हैं, उनकी सहमति प्राप्त करने में पटवारियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्वामित्व अधिकार पत्र : यह योजना ग्रामीण आबादी क्षेत्र में भू-स्वामियों को उनके मकानों के मालिकाना हक का अधिकार पत्र सौंपना है। लेकिन विक्रय पत्र के प्रारूप में विक्रेता की जगह 'पटवारी' शब्द दर्ज किया गया है। पटवारियों की मांग है कि इस जगह पर 'मप्र शासन' लिखा होना चाहिए। भविष्य में कानूनी विवाद होने पर पटवारी को न्यायालयीन प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा, इसलिए वे इस कार्य का विरोध कर रहे हैं।
ई-गिरदावरी : खेतों में जाकर फसल का भौतिक सत्यापन और एप पर एंट्री दर्ज करना होता है। इसके रुकने से धान पंजीयन ठप हो गया है। पटवारियों का कहना है कि गिरदावरी का काम अब जियो-टैग सिस्टम से हो रहा है, जिसके लिए बीच खेत में खड़ा होना पड़ता है। अभी फसल खड़ी है और खेतों में कई जगह पानी भरा है। जियो-टैगिंग सिस्टम से सीमा में 10 से 100 मीटर तक का अंतर आने लगता है, जिससे विवाद होता है।
आंकड़ों में समझिए पंजीयन की स्थिति 5 दिन शुरुआत के, महज 51 पंजीयन 9 दिन में कुल पंजीयन: केवल 463 किसान (जबकि पिछले साल 9,011 पंजीयन हुए थे)। 15,000 से अधिक धान उत्पादक किसान परेशान 42,000 हेक्टेयर में मूंग की खेती
ई-उपार्जन पोर्टल पर दिखा रहा फसल सत्यापन लंबित समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर किसान का रकबा और उसकी बोई गई फसल का सत्यापन होना अनिवार्य होता है। यह सत्यापन पटवारियों द्वारा की जाने वाली ई-गिरदावरी (फसल सर्वेक्षण) के आधार पर ही पोर्टल पर ऑटो-अपडेट होता है। जब किसान समिति या लोक सेवा केंद्र पर पंजीयन कराने पहुंचता है, तो आधार लिंक और खसरा नंबर डालते ही गिरदावरी का रिकॉर्ड खुलकर सामने आ जाता है। हालांकि, 17 सितंबर से पटवारियों ने गिरदावरी का काम पूरी तरह बंद कर रखा है। नतीजा यह है कि जब किसान पंजीयन कराने केंद्र पर पहुंच रहे हैं, तो पोर्टल पर "नो रिकॉर्ड फाउंड" या "फसल सत्यापन लंबित" का मैसेज आ रहा है और उन्हें बिना पंजीयन के ही निराश लौटना पड़ रहा है।