हमनाम का फायदा उठा फर्जी वारिसों के नाम की जमीन - Ambikapur (Surguja) News

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शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड के पास रिंग रोड से लगे तालाब को पाटकर की जा रही प्लॉटिंग की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रशासनिक जांच में सामने आया कि खसरा नंबर-3714 की जमीन सन 1954-55 से जैलाल पिता बोधन, जाति गोंड़ के नाम दर्ज थी।

रिपोर्ट के अनुसार अमलभिट्ठी के पटवारी ने जैलाल पिता देवराम के वारिसों की जानकारी तैयार की थी। यानी जमीन जिस जैलाल पिता बोधन के नाम दर्ज थी, उसके वारिसों के रिकॉर्ड की जगह दूसरे पिता के नाम वाले जैलाल के वारिसों की जानकारी इस्तेमाल हुई। इसी नामांतरण के बाद जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया बढ़ी। अब कलेक्टर ने तहसीलदार को संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। यह जमीन अब सरकार के नाम करने की कार्रवाई की जाएगी। प्लॉटिंग की शिकायत भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने की थी। इस पर कलेक्टर अजीत बसंत ने प्लॉटिंग पर रोक लगाई और जांच टीम गठित की। कई महीनों तक चली जांच में जमीन के पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए, तो करीब 50 साल पुराना फर्जीवाड़ा सामने आया। शहर में जमीन के रिकॉर्ड में एक जैसे नाम का सहारा लेकर फर्जीवाड़े का यह दूसरा मामला है। इससे पहले दत्ता कॉलोनी में भी करोड़ों की जमीन का फर्जीवाड़ा हुआ था। दत्ता कॉलोनी की जमीन का पट्‌टा बंसू नामक व्यक्ति को मिला था, जो बाद में निरस्त हो गया था। भू-माफिया ने अफसरों से सांठ-गांठ कर दूसरा बंसू खड़ा कर दिया और जमीन उसके नाम कराकर बेच दी थी। प्रतीक्षा बस स्टैंड का मामला भी इसी तरह एक नाम की पहचान और जमीन के पुराने रिकॉर्ड से जुड़ा है। प्रतीक्षा बस स्टैंड और रिंग रोड से लगी 57 डिसमिल जमीन की मौजूदा कीमत करीब 13 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इसी जमीन को लेकर तालाब पाटकर प्लॉटिंग की शिकायत हुई थी। जांच में सामने आया कि जैलाल गोंड़ के नाम दर्ज जमीन के वारिसों की जगह दूसरे जैलाल के वारिसों की जानकारी से वंशावली तैयार कराई गई। इसी के आधार पर आगे नामांतरण और जमीन दूसरे लोगों के नाम करने की प्रक्रिया हुई। तालाब पाटने से जब रोका जा रहा था तब माफिया के अलावा नेताओं के जरिए अफसरों पर दबाव बनाया जा रहा था।

1976 में मौत होना बताया, निगम के रिकॉर्ड में प्रमाण तक नहीं जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। जमीन के खातेदार जैलाल पिता बोधन की मृत्यु 23 अप्रैल 1976 को बताई गई और इसी आधार पर नामांतरण की मांग की गई। जांच के दौरान नगर पालिक निगम अंबिकापुर से मृत्यु प्रमाण पत्र की जानकारी मांगी गई। निगम ने 4 मई 2026 को जानकारी दी कि संबंधित मृत्यु प्रमाण पत्र नगर निगम में दर्ज नहीं है और न ही निगम की ओर से जारी किया गया है। जांच रिपोर्ट में यह तथ्य नामांतरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले प्रमुख बिंदुओं में शामिल है।

57 डिसमिल जमीन, कीमत करीब 13 करोड़; यहीं से शुरू हुआ पूरा खेल

शहर के दत्ता कॉलोनी में बंसू के नाम पर भी हो चुका फर्जीवाड़ा