आरएसएस समय की कसौटी पर खरा-उपराष्ट्रपति | Hindi News Portal | Hindi News | Online Hindi News | swatantraawaz

आरएसएस समय की कसौटी पर खरा-उपराष्ट्रपति

साप्ताहिक विवेक की 'विश्वसंचार हिंदुत्व का' पुस्तक का विमोचन

'हिंदुत्व के पुनरुत्थान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सफल रहा'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 25 September 2026 01:44:10 PM

'vishvasanchar hindutva ka' a book by saptahik vivek released

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 1948 में महाराष्ट्र में स्थापित मीडिया संस्थान 'साप्ताहिक विवेक' की ‘विश्वसंचार हिंदुत्व का’ पुस्तक का विमोचन किया। उपराष्ट्रपति ने 'साप्ताहिक विवेक' के इतिहास और महाराष्ट्र के सामाजिक, सांस्कृतिक व सार्वजनिक जीवन में इसके जुड़ाव का उल्लेख किया। उन्होंने इसकी भारत की संस्कृति, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मामलों और महत्वपूर्ण सामाजिक प्रश्नों पर पुस्तकें और शोध आधारित साहित्य प्रकाशित करने की परंपरा की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने कहाकि पुस्तक का प्रकाशन ऐसे समय पर हुआ है, जब 1925 में नागपुर में डॉ केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने 100 वर्ष पूरे कर चुका है। उन्होंने कहाकि संघ से उनका नाता बहुत पुराना है, इसलिए इस किताब के विमोचन में शामिल होना उनके लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि ‘हिंदुत्व’ शब्द ने ऐतिहासिक और बौद्धिक संदर्भों में भिन्न-भिन्न अर्थ ग्रहण किए हैं, जबकि राजनीतिक विचारकों, विद्वानों, संगठनों, आलोचकों ने इसकी अलग-अलग सुंदर व्याख्याएं की हैं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना सांस्कृतिक हिंदुत्व के पुनरुत्थान के उद्देश्य से की गई थी, डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने हिंदुत्व और संघ केबीच के अटूट संबंध पर अपना जीवन और ध्यान केंद्रित किया और उन्हें इसमें सफलता मिली। उपराष्ट्रपति ने कहाकि यह शताब्दी वर्ष एक ऐसा अवसर है, जब एक लंबे समय से विकसित इस संगठन के इतिहास, विचारों और कार्यपद्धति पर चिंतन किया जाए। उन्होंने कहाकि संघ की कार्यपद्धति समय की कसौटी पर खरी उतरी है, जिससे यह सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति केसाथ एक महत्वपूर्ण संगठन के रूपमें स्थापित हुआ है। हिंदुत्व के समावेशी स्वरूप पर सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि हिंदुत्व किसी के खिलाफ नहीं है, हिंदुत्व किसी का विरोधी हो भी नहीं सकता, यह सबको साथ लेकर चलता है। उन्होंने कहाकि सांस्कृतिक हिंदुत्व मूल मूल्यों, सांस्कृतिक आदर्शों, सच्चे मानवीय संबंधों और सार्वभौमिक कल्याण के आदर्श का एक सुंदर संगम है।
सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि इसके विषयों को गहराई से समझने, इसके ऐतिहासिक विकास, दार्शनिक पहलुओं और इसके इर्द-गिर्द मौजूद विभिन्न दृष्टिकोणों को समझना आवश्यक है। गंगा नदी का उदाहरण देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि जिस प्रकार गंगा हिमालय से एक छोटी सी धारा के रूपमें निकलती है और आगे बढ़ते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुंचते-पहुंचते इतनी विशाल हो जाती हैकि उसमें बड़े-बड़े पोत आगे बढ़ने में सक्षम हो जाते हैं, इसी प्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा को भी एक अभूतपूर्व विस्तार और व्यापकता के रूपमें देखा जा सकता है। उन्होंने कहाकि संघ की शुरुआत कुछ ही लोगों केसाथ एक छोटे से संगठन के रूप में हुई थी। उन्होंने कहाकि आज यह एक वैश्विक संगठन बन चुका है और पूरे देश में अपनी जड़ें जमा चुका है, जहां इसके स्वयंसेवक राष्ट्रीय और सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान दे रहे हैं।
सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि योग एक प्राचीन भारतीय पद्धति से निकलकर आज एक वैश्विक अभ्यास बन चुका है, जो इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण हैकि कैसे कोई भारतीय परंपरा अपनी भौगोलिक और सांस्कृतिक सीमाओं से परे जाकर एक व्यापक वैश्विक संवाद का हिस्सा बन सकती है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि विश्वसंचार शब्द दुनियाभर में विचारों के प्रवाह और संवाद को दर्शाता है। उन्होंने कहाकि यह पुस्तक पाठकों को यह समझने का अवसर देती हैकि कैसे भारत की सांस्कृतिक विरासत के आयामों ने वैश्विक यात्रा की अन्य समाजों केसाथ संवाद कायम किया और नए रूप तथा अर्थ हासिल किए। उन्होंने युवाओं से आग्रह कियाकि वे वर्तमान को गढ़ने वाले संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक संस्थानों केप्रति सजग रहते हुए भारत की समृद्ध विरासत का अध्ययन करें, प्रश्न करें, शोध करें और उसे गहराई से समझें।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि कोई भी सभ्यता तभी फलती-फूलती और समृद्ध होती है, जब उसमें अपने बुनियादी मूल्यों, संस्कृति और जीवन-मूल्यों में अपनी जड़ें बनाए रखते हुए बदलावों को अपनाने का आत्मविश्वास होता है। सीपी राधाकृष्णन ने 'विश्वसंचार हिंदुत्व का' पुस्तक का प्रकाशन करने केलिए साप्ताहिक विवेक के लेखकों, शोधकर्ताओं, संपादकों और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने आशा व्यक्त कीकि यह पुस्तक भारत की सांस्कृतिक यात्रा के गहन अध्ययन को बढ़ावा देगी और हिंदुत्व, सांस्कृतिक पहचान तथा विश्व के साथ भारत के संबंधों पर अर्थपूर्ण चर्चा को प्रेरित करेगी। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े, सुयोग टेलीमैटिक्स लिमिटेड मुंबई के प्रबंध निदेशक शिवशंकर, साप्ताहिक विवेक के संपादक रवींद्र गोले और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।