‘काफी उलझन की स्थिति है, चुनाव आयोग स्पष्टीकरण दे’, चिराग पासवान के बाद उपेंद्र कुशवाहा की मांग
Bihar Politics: देश में एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश्वर कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी घमासान के बीच एनडीए के सहयोगी दल भी सवाल उठाने लगे हैं। केंद्र और बिहार की सत्ता में साझेदार राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चीफ उपेंद्र कुशवाहा के ट्वीट ने बिहार की सियासत में हलचल बढ़ा दी है।
चिराग पासवान के बाद अब राज्यसभा सांसद और आरएमएल चीफ उपेंद्र कुशवाहा ने भी कन्फ्यूज दूर करने की मांग की है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “SIR से संबंधित विवाद पर जनता में काफी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है। विषय को एड्रेस करने की जरूरत है। कंफ्यूजन दूर करने हेतु चुनाव आयोग के द्वारा अविलंब स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।”
इससे पहले एनडीए की सहयोगी लोजपा(रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी कहा था कि चुनाव आयोग को जनता के मन में उत्पन्न हुई शंका को दूर करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि वह सरकार का हिस्सा होने के नाते किसी संवैधानिक संस्था का बचाव नहीं करना चाहते और विपक्ष के आरोपों को अधिक महत्व नहीं देते हैं।
बता दें कि विधानसभा चुनाव के पहले बिहार में भी चुनाव आयोग की तरफ से एसआईआर कराया गया था। तब विपक्ष ने केंद्र सरकार पर वोट चोरी के आरोप लगाए थे। हाल में सामने आई एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू एवं विवेक जोशी के बीच कथित मतभेदों का जिक्र किया गया है।
एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों के दौरान कम-से-कम 14 बार विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों का संबंध मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा से जुड़े मामलों से था।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी दी गई थी। इसके बाद 9 सितंबर को चार महीने के अंतराल के बाद तीनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण बैठक हुई। हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। अब इसको लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। विपक्षी दलों के साथ साथ एनडीए गठबंधन में भी कंफ्यूजन दूर करने की मांग उठ रही है।
वहीं, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन रिपोर्टों के बाद कहा कि आयोग के सभी फैसले, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) भी शामिल है, तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और निर्णय सर्वसम्मति से हुए। विपक्ष का विरोध इसी पूरे विवाद और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लेकर है।