डीएपी के स्थान पर एसएसपी के उपयोग की सलाह, सरसों एवं दलहनी फसलों के लिए अधिक उपयोगी

26 सितंबर 2026, जयपुर: डीएपी के स्थान पर एसएसपी के उपयोग की सलाह, सरसों एवं दलहनी फसलों के लिए अधिक उपयोगी – राजस्थान के बूंदी जिले में रबी सीजन में फसलों की पोषक तत्व आवश्यकता एवं उर्वरकों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किसानों से निवेदन है की डीएपी (DAP) के विकल्प के रूप में एसएसपी (SSP-सिंगल सुपर फॉस्फेट) का उपयोग करें। इससे फसल को फॉस्फोरस के साथ सल्फर एवं कैल्शियम जैसे पोषक तत्व भी प्राप्त होते हैं। विशेष रूप से सरसों एवं दलहनी फसलों में इसका उपयोग लाभकारी होता है।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि केवल डीएपी पर निर्भर रहने के बजाय खेत की जरूरत के अनुसार एसएसपी सहित अन्य उर्वरकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। एसएसपी में 16 प्रतिशत फॉस्फोरस, 11 प्रतिशत सल्फर और 21 प्रतिशत कैल्शियम होता है। इसके मुकाबले डीएपी में मुख्य रूप से फॉस्फोरस और नत्रजन मिलता है। ऐसे में एसएसपी का उपयोग करने पर फसल को फॉस्फोरस के साथ सल्फर और कैल्शियम की भी आपूर्ति होती है। दलहनी फसलों के लिए भी सल्फर महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि सल्फर पौधों की जड़ों में बनने वाली गांठों के विकास में सहायक होता है। इन गांठों के माध्यम से पौधे वायुमंडल से नाइट्रोजन का उपयोग करने में सक्षम होते हैं। इसलिए दलहनी फसलों में संतुलित पोषण के लिए सल्फर की उपलब्धता जरूरी मानी जाती है। एसएसपी में उपलब्ध सल्फर मिट्टी की दशा सुधारने में भी सहायक होता है। विशेष रूप से क्षारीय भूमि में मिट्टी की जांच के आधार पर सल्फर युक्त उर्वरकों का उपयोग करने से मिट्टी की स्थिति में सुधार किया जा सकता है तथा पहले से मौजूद पोषक तत्व पौधों को अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
एसएसपी में मौजूद कैल्शियम पौधों की कोशिकाओं को मजबूती प्रदान करने तथा जड़ों के सामान्य विकास में सहायक होता है। मिट्टी में कैल्शियम की पर्याप्त उपलब्धता से मिट्टी की संरचना एवं फसल के विकास को भी लाभ मिलता है।
सभी कृषकों से निवेदन है कि वे मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों की मात्रा निर्धारित करें तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दी गई सिफारिशों के अनुसार डीएपी, एसएसपी, यूरिया एवं अन्य उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें। किसानों को अनावश्यक रूप से किसी एक उर्वरक पर निर्भर रहने के बजाय फसल एवं मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
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