'सीमा तक पहुंचाने वाली सड़कें युद्ध का पहला मोर्चा': रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले-बीआरओ की भूमिका सराहनीय

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध का स्वरूप चाहे कितना भी बदल जाए, बुनियादी ढांचे की अहमियत कभी कम नहीं होगी। सड़कें, एयरफील्ड, बंदरगाह और सुरंगों जैसी अवसंरचनाएं देश की सुरक्षा और विकास दोनों के लिए हमेशा महत्वपूर्ण बनी रहेंगी। रक्षा मंत्री सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के रणनीतिक अवसंरचना सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस देश का ढांचागत विकास मजबूत होता है, उस देश का भविष्य भी मजबूत होता है।



रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में देश ने गांवों, शहरों, पहाड़ों, नदियों और दूरदराज के इलाकों को जोड़ने का बड़ा अभियान चलाया। कनेक्टिविटी केवल सड़क परिवहन तक सीमित नहीं रही, बल्कि रेल, हवाई मार्ग और डिजिटल अवसंरचना के जरिए हर क्षेत्र को जोड़ने पर जोर दिया गया। सरकार का लक्ष्य केवल भारत के नक्शे पर सड़कें बनाना नहीं, बल्कि हर नागरिक के मन में यह विश्वास पैदा करना है कि देश का कोई भी कोना अब दूर नहीं है।

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राजनाथ ने कहा कि बीआरओ सीमावर्ती और कठिन क्षेत्रों में एयरफील्ड भी बना रहा है। युद्ध का पहला मोर्चा कभी-कभी सीमा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर बनता है जो सैनिक को सीमा तक पहुंचाती है। इसलिए जो सड़क बना रहा, वो भी राष्ट्र सुरक्षा का उतना ही बड़ा प्रहरी है। उन्होंने लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर-पूर्व, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बीआरओ कर्मियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने हर चुनौती के बीच देशसेवा का उदाहरण पेश किया है।

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दुर्गम क्षेत्रों को जोड़ने में बीआरओ की भूमिका सराहनीय


राजनाथ ने बीआरओ की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि रोहतांग की अटल टनल, दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़क उमलिंग ला और करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी सेला टनल जैसी परियोजनाएं संगठन के श्रम, समर्पण और तकनीक के इस्तेमाल का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि कठिन इलाकों में निर्माण कार्य संभव बनाना मानव संकल्प और आधुनिक तकनीक की संयुक्त जीत है। तकनीक के इस्तेमाल और उसे अपनाने के मामले में यह अग्रिम पंक्ति का संगठन बताया।



रक्षा मंत्री ने कहा कि वह सीमा सड़क संगठन को केवल एक निर्माण एजेंसी के रूप में देखने की बजाय अपने परिवार की तरह देखते हैं। पिछले एक दशक में बीआरओ ने जिस गति से कठिन इलाकों में सड़कें और हाईवे बनाए हैं, वह अभूतपूर्व है।



अनुभव साझा करने पर जोर


रक्षा मंत्री ने ढांचागत विकास के लिए सरकार, उद्योग, अकादमिक संस्थानों, इंजीनियरों और प्रशासकों के सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई। उन्होंने सुझाव दिया कि पुराने इंजीनियरों के अनुभव, संघर्ष और सफलताओं को प्रशिक्षण संस्थानों तक पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी के इंजीनियर उनसे सीख सकें। सम्मेलन के दौरान राजनाथ ने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और भर्ती के लिए बीआरओ के दो डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए। साथ ही पथ प्रदर्शक, ऊंची सड़कें और पथ विकास नाम के प्रकाशनों का विमोचन भी किया। इस अवसर पर बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कहा कि संगठन तकनीक और एआई आधारित समाधानों के जरिए खुद को बदल रहा है।