पायल का इतिहास जानकर रह जाएंगे हैरान, सदियों से है भारतीय नारी के श्रृंगार की शान
Anklet for women:अक्सर महिलाओं को अपने आभूषणों से काफी प्रेम होता है यदि सोलह श्रृंगार की बात की जाए तो पाजेब सोलह श्रृंगार में महिलाओं की खासा पसंद होती है। पैरों में पहनी जाने वाली पायल पैरों को तो खुबसूरत बनाती है। साथ ही चांदी को पैरों में पहना जाना भी काफी ज्यादा अच्छा माना जताा है। भारतीय संस्कृति और परंपरा का ये हिस्सा भी मानी जाती है। हजारों वर्षों से पाजेब का चलन भारतीय सभ्यता में मौजूद है और समय के साथ इसका रूप बदलता गया, लेकिन इसकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है।
पाजेब का इतिहास और शुरूआत
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हजारों वर्षो से पाजेब भारतीय सभ्यता में मौजूद इै इसका इतिहास लगभग 4,000 से 5,000 वर्ष पुराना माना जाता है। यदि प्राचीन सभ्यता पर एक नजर डाले तो सिंधु घाटी सभ्यता में मिली मूर्तियों और कलाकृतियों में महिलाओं के पैरों में पाजेब पहनी हुई दिखती है। जिससे पता चलता है कि पाजेब का चलन कितना पुराना था। इसके अलावा प्राचीन मिस्त्र की महिलााअें के द्वारा टखनों में ये आभूषण पहनने का प्रमाण मिलता है। देखा जाए तो भारम में पाजेब ने धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान के रूप में विशेष स्थान बनाया।
प्राचीन भारत में पाजेब का महत्व
यदि प्राचीन काल में पाजेब के महत्व की बात की जाए तो वैदिक और पौराणिक काल में पाजेब को सोलह श्रृंगार में महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। यहां तक की रामयण और महाभारत साहित्य में भी इसका उल्लेख मिलता है। रानियां या फिर राजघरानों की महिलाएं अपने पैरों में बेशकिमती सोने,चांदी और रत्नों की पाजेब पहनती थी जबकि सामान्य घरों की महिलाएं चांदी की पाजेब। विवाह या शुभ अवसर पर उपहार के रूप मंे ये भेट की जाती थी। साथ ही पायल में लगे घुंघरू जिनकी आवाज मधुर होती थी बल्कि पुराने समय में यह घर के सदस्यों को महिला के आने की सुचना भी देती थी। साथ ही इसे परिवार के सम्मान, शिष्टाचार और सकारात्मक ऊर्जा से भी जोड़ा जाता था।
चांदी की पाजेब पैरों में पहनना क्यों अच्छा माना जाता था
सोने से ज्यादा चांदी की पायल को पैरों में पहनना अच्छा माना जाता है। क्योंकि भारतीय परंपरा में सोने को देवी देवाताओं का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में सोने की पायल पैरों में पहनना उचित नहीं माना गया है। इसके साथ ही आयुवेंद और लोक मान्यातों के अनुसार चांदी को पैरों में पहनने से शरीर को ठंडक पहुंचती है साथ ही उर्जा संतुलित रखने में ये मदद करती है।
भारत के अलग अलग राज्यों में पाजेब के डिजाइन
यदि आप भारत के राज्यों में पाजेब को देखते है तो हर जगह अलग अलग डिजाइन देखने को मिलते है। जैसे राजस्थान में भारी पाजेब पहनी जाती है जो साइज में चैड़ी भी होती है। इसी तरह उतर प्रदेश में नक्काशीदार पारंपरिक पायल पहनी जाती है। और गुजरात में आदिवासी और कारीगरी वाली चैड़ी पाजेब पहनी जाती है। दक्षिण भारत में थोड़ी हल्दी लेकिन बेहद खूबसूरत पाजेब पहनी जाती है। हर क्षेत्र की पाजेब वहां की कला और संस्कृति को दर्शाती है।
आधुनिक काल में पाजेब ट्रेंड बदल चुका है।
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Anklet trend :अब पायल को फैशन एक्सेरीज की तरह पहना जा रहा है। आपने देखा होगा एक पैर में पहनने का पायल का चलन भी काफी जोरो पर है। साथ ही इनमें काफी ज्यादा बदलाव आ गया है। पायल के नए नए डिजाइन मार्केट में उपलब्ध है। जिनमे ये कुछ स्टाइल काफी ट्रेंड में है ये पायल केवल ट्रेडिशनल कपड़ों के साथ ही नहीं वेस्टर्न कपड़ों के साथ भी खूब जंचती है-
मिनिमल सिल्वर पाजेब
ऑक्सीडाइज्ड पाजेब
बीड्स और पर्ल पाजेब
चेन स्टाइल एंकलेट
चार्म वाली पाजेब
ब्राइडल हैवी पाजेब
मिक्स्ड मेटल डिजाइन
चार्म और पर्ल वाली एंकलेट
FAQ
Q.
क्या लड़कियां पायल पहन सकती हैं?
A.
भारतीय उपमहाद्वीप में सिंधु घाटी सभ्यता की लड़कियाँ और महिलाएँ कम से कम 8,000 वर्षों से नंगे पैर पायल और अंगूठियाँ पहनती आ रही हैं, जहाँ इसे आमतौर पर पट्टिलु, पायल, गोलुसु और कभी-कभी नूपुर के नाम से जाना जाता है। मिस्र की महिलाएँ भी प्रागैतिहासिक काल से इन्हें पहनती आ रही हैं।
Q.
क्या हम पायल को एक पैर में पहन सकते हैं?
A.
संक्षिप्त उत्तर: पायल किस पैर में पहननी चाहिए, इसका कोई निश्चित नियम नहीं है । परंपरा के अनुसार, बायां टखना विवाह या अंतर्ज्ञान से और दायां टखना स्वतंत्रता से जुड़ा होता है, जबकि आधुनिक फैशन इसे व्यक्तिगत शैली का हिस्सा मानता है। भारत में, पायल आमतौर पर दोनों पैरों में पहनी जाती है, जिन्हें सुंदरता, गरिमा और परंपरा के लिए समान रूप से महत्व दिया जाता है
Q.
पायल किस पैर में पहननी चाहिए?
A.
पायल आप अपनी सुविधा, फैशन या पसंद के अनुसार किसी भी पैर में पहन सकती हैं। आजकल दोनों पैरों में पायल पहनने का भी चलन है। यदि आप किसी पारंपरिक या सांस्कृतिक मान्यता का पालन कर रही हैं, तो पायल पहनने के कुछ प्रचलित नियम व अर्थ निम्नलिखित हैं: Grahams Jewellers +2 भारतीय संस्कृति और पारंपरिक मान्यता: भारतीय मान्यताओं के अनुसार, चांदी की पायल बाएं पैर में पहनना शुभ माना जाता है और यह वैवाहिक जीवन में सुख-शांति व सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है। इसके अलावा, नसों पर दबाव के कारण इसे पहनने से स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं।
Q.
क्या पायल पहनने का कोई वैज्ञानिक कारण है?
A.
पायल पहनने का एक और लाभ रक्त संचार में सुधार है। हालांकि वैज्ञानिक प्रमाण सीधे तौर पर चांदी की पायल को रक्त संचार से नहीं जोड़ते, लेकिन धातु की सुचालक प्रकृति और त्वचा के संपर्क से टखनों के आसपास की रक्त वाहिकाएं उत्तेजित हो सकती हैं।
Q.
पायल के साथ कौन से आउटफिट सबसे अच्छे लगते हैं?
A.
पायल जींस से लेकर ड्रेस तक, सभी तरह के कपड़ों के साथ अच्छी लगती है, लेकिन नंगे टखनों पर ये सबसे अच्छी लगती हैं क्योंकि पैंट के ऊपर ये अजीब लग सकती हैं और टाइट्स में फंस सकती हैं। ढीली-ढाली पायल त्योहारों, समुद्र तट पर घूमने और गर्मियों के ब्रंच के लिए आरामदायक, बोहेमियन स्टाइल के साथ सबसे अच्छी लगती हैं।