नासिक में ग्रामीण विकास विभाग का बड़ा फैसला: श्मशान भूमि नहीं तो गांवों को नहीं मिलेगी विकास निधि!| Navbharat Live
नासिक में ग्रामीण विकास विभाग का बड़ा फैसला: श्मशान भूमि नहीं तो गांवों को नहीं मिलेगी विकास निधि!
-
Written By:
अंकिता पटेल
Updated On: Jul 19, 2026 | 10:22 AM IST
विज्ञापन
सार
Nashik Rural Development: नासिक के जिन गांवों में श्मशान भूमि या शेड नहीं है, वहां अन्य विकास कार्यों की निधि रोकने का निर्णय लिया गया है। इससे जिले के 414 गांव प्रभावित हो सकते हैं।

नासिक ग्रामीण विकास, श्मशान भूमि, (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
विस्तार
Nashik Village Crematorium Policy: नासिक जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी को देखते हुए, ग्रामीण विकास विभाग ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय लिया है। अब जिन गांवों में श्मशान भूमि या शेड की सुविधा नहीं है, वहां अन्य विकास कार्यों के लिए निधि नहीं दी जाएगी।
सरकार की ‘गांव वहां श्मशान भूमि’ संकल्पना को सख्ती से लागू किया जा रहा है, जिससे नासिक जिले के करीब 414 गांवों की विकास निधि पर फिलहाल रोक का संकट मंडरा रहा है।
मृत्यु के बाद भी यातना
नासिक जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान घाटों का अभाव किसी त्रासदी से कम नहीं है, विशेषकर आदिवासी बहुल तहसीलों में खुले में अंतिम संस्कारः शेड न होने के कारण बारिश के दिनों में शवदाह के लिए सूखी जगह मिलना भी मुश्किल हो जाता है।
सम्बंधित ख़बरें
सागौन के पत्तों का सहारा
आदिवासी बहुल इलाकों में ग्रामीण बांस पर तिरपाल तानकर या सागौन के पत्तों की पल्ली सिलकर खुले में अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। बाढ़ या भारी बारिश के दौरान कमर तक पानी से गुजरकर शवदाह स्थल तक पहुंचना पड़ता है। गीली लकड़ियों के कारण अग्निदाह में भारी दिक्कतें आती हैं।
विकास की प्राथमिकता
अन्य विकास कार्यों को रोककर श्मशान घाटों के निर्माण को अनिवार्य करना यह दर्शाता है कि प्रशासन अब मानवीय और बुनियादी आवश्यकताओं को कागजी विकास से ऊपर रख रहा है। सुरगाणा के हालात न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाते हैं, बल्कि एक बड़े जन-आंदोलन और त्वरित सुधार की मांग भी करते हैं।
सरकार की नई नीतिः ‘गांव वहां श्मशान भूमि’
प्रशासन ने अब स्थिति की गंभीरता को समझते हुए गांववार समीक्षा शुरू की है। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि जब तक संबंधित गांव में श्मशान घाट और शेड का निर्माण सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक अन्य किसी भी विकास कार्य को मंजूरी या निधि नहीं दी जाएगी। यह नीति इसलिए अपनाई गई है ताकि गांवों में इस बुनियादी जरूरत को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले और किसी को भी अंतिम समय में ऐसी यातना न झेलनी पड़े।
यह भी पढ़ें:-उन्नत नासिक अभियान का चौथा चरण आज: दरी और शिवनई परिसर को देसी वृक्षों से समृद्ध करने की तैयारी!
सुरगाणा में सबसे भयावह स्थिति
- नासिक जिले में आदिवासी तहसीलों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है।
- पेठ, त्र्यंबकेश्वर और सुरगाणा में बुनियादी सुविधाओं का अभाव सबसे अधिक है।
- जिले के कुल 414 श्मशान घाट विहीन गांवों में से अकेले एक-तिहाई (1/3) गांव केवल सुरगाणा तहसील से है।
- ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार मांग के बावजूद प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई थी।
