तिरुमाला गर्भगृह में क्यों नहीं है कोई घंटी? जानिए वो दिव्य रहस्य, जिससे जन्मा था चमत्कारी बालक

Andhra Pradesh News: विश्व प्रसिद्ध तिरुमाला स्थित भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) मंदिर अपनी भव्यता, चमत्कारों और अनूठी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. अमूमन हर हिंदू मंदिर के गर्भगृह में पूजा-आरती के समय बजाने के लिए छोटी घंटियां जरूर होती हैं, लेकिन तिरुमाला के मुख्य गर्भगृह में ऐसा नहीं है. गर्भगृह के भीतर घंटी न होने के पीछे जहां एक ओर भगवान के परम भक्त और वैष्णव संत श्री वेदांत देशिका से जुड़ी एक बेहद सुंदर लोककथा प्रचलित है. वहीं, दूसरी ओर इसके पीछे प्राचीन ‘वैखानस आगम’ शास्त्र के कड़े नियम भी शामिल हैं. आइए जानते हैं इस रहस्य की पूरी इनसाइड स्टोरी.

पारंपरिक मान्यताओं और स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, तिरुमाला के गर्भगृह में घंटी न होने का संबंध वैष्णव परंपरा के महान संत श्री वेदांत देशिका के जन्म से जुड़ा हुआ है. प्राचीन काल में द्रोथम्बा और अनंत सूर्य नामक एक परम भक्त विवाहित जोड़ा रहता था. विवाह के बारह वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई संतान नहीं हुई थी. संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर दोनों ने तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर की कड़ी आराधना की.

उनकी निश्चल भक्ति से प्रसन्न होकर एक रात भगवान वेंकटेश्वर स्वामी ने दोनों को स्वप्न में दर्शन दिए. भगवान ने अपने हाथ की दिव्य घंटी द्रोथम्बा को प्रसाद स्वरूप देते हुए उसे निगलने का आदेश दिया और आशीर्वाद दिया कि उनके घर एक महान दिव्य पुत्र का जन्म होगा. सुबह जागने पर पति-पत्नी ने पाया कि दोनों को एक जैसा ही स्वप्न आया था.

गायब हो गई मंदिर की मुख्य घंटी

अगली सुबह जब मंदिर के पुजारियों ने पट खोले, तो गर्भगृह की मुख्य घंटी वहां से गायब थी. शुरुआत में पुजारियों को लगा कि दंपत्ति ने घंटी चुराई है. लेकिन तभी ध्यानमग्न मुख्य पुजारी को भगवान ने दर्शन देकर समझाया कि वह घंटी उन्होंने स्वयं द्रोथम्बा को दी है और उसी दिव्य अंश से एक महापुरुष का जन्म होगा. मान्यता है कि इसी घटना के बाद से तिरुमाला के गर्भगृह में दोबारा कोई छोटी घंटी नहीं रखी गई.

घंटी के अवतार थे महान संत श्री वेदांत देशिका!

भगवान के कहे अनुसार द्रोथम्बा और अनंत सूर्य के घर वेदांत देशिका नाम के अद्भुत बालक का जन्म हुआ, जिन्हें साक्षात भगवान की घंटी का अवतार माना गया. बालक देशिका ने बचपन से ही विलक्षण बुद्धि का प्रदर्शन किया. उन्होंने तमिल और संस्कृत में महान ग्रंथों की रचना की. जगद्गुरु रामानुजाचार्य के बाद उन्हें वैष्णव परंपरा को सुदृढ़ करने वाला सबसे महान स्तंभ माना गया. अपने मामा के निर्देश पर देशिका ने तमिलनाडु के तिरुवाहिंद्रपुरम की एक पहाड़ी पर गरुड़ मंत्र का कठोर जाप किया. गरुड़ देव ने प्रकट होकर उन्हें भगवान हयग्रीव (ज्ञान के देवता) की मूर्ति और मंत्र दिया. हयग्रीव देव के आशीर्वाद से उन्होंने तुरंत 32 श्लोकों वाली ‘हयग्रीव स्तुति’ रच दी, जिसके बाद उन्हें ‘कवितार्किक केसरी’ की उपाधि मिली.

चमत्कारों से शत्रुओं को किया परास्त

उन्होंने देवी लक्ष्मी की आराधना में श्री स्तुति का पाठ कर कनकधारा (सोने के सिक्कों) की वर्षा कराई. जब शत्रुओं ने उन्हें एक रात में हजार श्लोक रचने की चुनौती दी, तो उन्होंने भोर होने से पहले ही ‘पादुका सहस्रम्’ की रचना कर दी. जब शत्रुओं ने उन पर विषैला सांप छोड़ा, तो उन्होंने गरुड़ दंडकम का पाठ किया, जिसे सुनकर साक्षात गरुड़ पक्षी ने आकर सांप को उठा लिया. श्रीरंगम पर मुगलों के आक्रमण के दौरान उन्होंने शवों के ढेर के नीचे छिपकर पवित्र वैष्णव साहित्य की रक्षा की थी.

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वैज्ञानिक और आगम शास्त्र का क्या है विधिक नियम?

लोककथाओं से इतर, यदि मंदिर के प्रशासनिक और शास्त्रीय पहलुओं को देखा जाए, तो गर्भगृह में घंटी न होने का एक ठोस तकनीकी कारण भी सामने आता है. तिरुमाला मंदिर प्रशासन (TTD) ने आधिकारिक रूप से घंटी न होने का कोई विशिष्ट कारण घोषित नहीं किया है. हालांकि, आगम शास्त्रों के अनुसार, हर मंदिर की निर्माण शैली और पूजा पद्धतियां अलग होती हैं. तिरुमाला मंदिर में प्राचीन वैखानस आगम परंपरा का अक्षरशः पालन किया जाता है, जिसके नियमों के तहत ही गर्भगृह की आंतरिक व्यवस्था का संचालन होता है.

विजयनगर काल का घंटा मंडपम: जहां आज भी बजती हैं विशाल घंटियां

भले ही मुख्य गर्भगृह के भीतर घंटी न हो, लेकिन मंदिर के ठीक बाहर एक ऐतिहासिक घंटा मंडपम मौजूद है, जिसे ‘महामणि मंडपम’ भी कहा जाता है. यह मंडपम मंदिर के ‘बंगारू वकीली’ (गोल्डन गेट) के ठीक सामने स्थित है. इसका निर्माण 1461 ईस्वी में विजयनगर साम्राज्य के तत्कालीन मंत्री चंद्रगिरि वासी मल्लन्ना ने करवाया था. इस मंडपम के दक्षिणी हिस्से में लकड़ी के चबूतरे पर लोहे की भारी जंजीरों से दो बहुत विशाल घंटियां लटकी हुई हैं. इन घंटियों को बजाने वाले विशेष ब्राह्मण को ‘घंटापानी’ कहा जाता है. जब भगवान वेंकटेश्वर स्वामी को महाप्रसाद (नैवेद्य) भोग लगाया जाता है, तब ये घंटियां जोर-शोर से बजाई जाती हैं.

विजयनगर साम्राज्य के इतिहास के अनुसार, जब सम्राट चंद्रगिरि के किले में डेरा डालते थे, तो तिरुमाला से लेकर चंद्रगिरि तक की पहाड़ियों के बीच कई उप-घंटा मंडप बनाए गए थे. तिरुमाला में घंटी बजते ही श्रृंखला बद्ध तरीके से अन्य मंडपों की घंटियाँ बजती थीं. चंद्रगिरि किले में इन घंटियों की आवाज सुनकर ही राजा अपना भोजन ग्रहण करते थे. आज भी कई श्रद्धालु तिरुमाला में इन घंटियों के बजने के बाद ही भोजन करते हैं.

डिस्क्लेमर: आध्यात्मिक और लोक मान्यताओं की दृष्टि से तिरुमाला गर्भगृह में घंटी न होने और संत वेदांत देशिका की यह कहानी बेहद रोचक और आस्था से भरी है. हालांकि, ऐतिहासिक और विधिक स्रोतों के अनुसार, इस कथा का कोई प्रामाणिक या लिखित दस्तावेज उपलब्ध नहीं है. यह कहानी तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के आधिकारिक इतिहास, वेंकटचल महात्म्यम, वराह पुराण या प्रामाणिक वैष्णव पारंपरिक ग्रंथों में दर्ज नहीं है. संत वेदांत देशिका की प्रामाणिक जीवनी में भी इस विशिष्ट घटना का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है. इसलिए इसे ऐतिहासिक सत्य के बजाय भक्तों की अटूट आस्था और लोक-परंपरा का हिस्सा मानना ही न्यायसंगत होगा.

तन्वी गुप्ता

तन्वी गुप्ता

तन्वी गुप्ता मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की रहने वाली हैं. स्कूल-कॉलेज धर्मशाला से करने के बाद शिमला में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से MMC की पढ़ाई की. मीडिया में 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. चंडीगढ़, हैदराबाद में नौकरी करने के बाद फिलहाल दिल्ली में जॉब कर रही हैं. प्रिंट, टेलीविजन के बाद 2017 से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रही हैं. इससे पहले आजतक, न्यूज18, द ट्रिब्यून, ईटीवी भारत और इंडिया न्यूज सहित कुछ अन्य मीडिया संस्थानों में काम कर चुकी हैं. क्राइम, इतिहास और साइंस एक्सपेरिमेंट्स की खबरों में खास रूचि है. फिलहाल टीवी9 डिजिटल में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम संभाल रही हैं. नौकरी के अलावा खेल-कूद और घूमने फिरने में भी काफी दिलचस्पी है. नेशनल लेवल पर वॉलीबॉल और बैडमिंटन खेल चुकी हैं. साथ ही खो-खो खेल में भी स्टेट लेवल तक खेल चुकी हैं. इसके अलावा एनसीसी 'C' सर्टिफिकेट प्राप्त है. गाना सुनना तो पसंद है ही. लेकिन सिंगिंग का भी शौक रखती हैं. स्कूल और कॉलेज लेवल पर सिंगिंग में भी काफी पुरस्कार मिल चुके हैं.

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