मिडिल ईस्ट में बड़ा खेल! सऊदी अरब को परमाणु शक्ति बनाने की तैयारी में ट्रंप, ईरान-इजरायल की बढ़ी टेंशन| Navbharat Live
मिडिल ईस्ट में बड़ा खेल! सऊदी अरब को परमाणु शक्ति बनाने की तैयारी में ट्रंप, ईरान-इजरायल की बढ़ी टेंशन
-
Written By:
अमन उपाध्याय
Updated On: Jul 22, 2026 | 07:18 PM IST
विज्ञापन
सार
US Saudi Nuclear Deal: अमेरिका और सऊदी अरब के बीच आज एक ऐतिहासिक नागरिक परमाणु समझौते की घोषणा हो सकती है। इस डील से मीडिल ईस्ट में नए भू-राजनीतिक समीकरण बनेंगे।

परमाणु शक्ति बनेगा सऊदी अरब, AI फोटो
विस्तार
US Saudi Nuclear Deal Middle East Tension: ट्रंप प्रशासन आज बुधवार को सऊदी अरब के साथ एक ऐतिहासिक नागरिक परमाणु समझौते की औपचारिक घोषणा करने की तैयारी में है। इस रणनीतिक कदम का उद्देश्य सऊदी अरब में एक नागरिक परमाणु कार्यक्रम की नींव रखना है, जिसे मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। यह घोषणा ऐसे समय में हो रही है जब वाशिंगटन और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर है।
अमेरिकी परमाणु उद्योग को मिलेगा बड़ा बूस्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस 30-वर्षीय समझौते से अमेरिकी परमाणु उद्योग को अरबों डॉलर का निवेश और व्यापार प्राप्त होगा। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस डील के तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब में यूरेनियम संवर्धन सुविधा का निर्माण भी कर सकती हैं। गौरतलब है कि सऊदी अरब लंबे समय से अपने नागरिक परमाणु कार्यक्रम के अधिकार को लेकर अडिग रहा है।
ईरान के साथ बढ़ता तनाव
यह समझौता उस युद्ध की पृष्ठभूमि में हो रहा है जो अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा हुआ है। वाशिंगटन इस परमाणु करार को एक व्यापक रणनीतिक योजना के हिस्से के रूप में देख रहा है, जिसमें सऊदी अरब और इजरायल के बीच संबंधों को सामान्य बनाना और एक अमेरिकी रक्षा संधि पर हस्ताक्षर करना शामिल है।
सम्बंधित ख़बरें
हूतियों की धमकी के बीच फैसला
ईरान के सहयोगी हूती विद्रोहियों ने इस हफ्ते सऊदी बंदरगाहों की घेराबंदी करने की धमकी दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। पिछले हफ्ते सऊदी अरब और हूतियों के बीच हुई गोलीबारी ने साल 2022 से जारी युद्धविराम को भी खतरे में डाल दिया है।
इजरायल ने जताई चिंता
ट्रंप प्रशासन इस डील को लेकर उत्साहित है, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस के दोनों दलों के सांसदों और इजरायली अधिकारियों ने इस पर कड़ी चिंता जताई है। उनका का तर्क है कि नागरिक परमाणु तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है, जिससे खाड़ी देशों में हथियारों की होड़ मच सकती है।
हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इन आशंकाओं को खारिज किया है। मनीला में एक सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसा कोई समझौता नहीं करेगा जिससे परमाणु प्रसार का जोखिम पैदा हो। यह समझौता आने वाले दिनों में कांग्रेस के समक्ष पेश किया जा सकता है, हालांकि इसे लागू करने के लिए कांग्रेस की अनिवार्य मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।
यह भी पढ़ें:- Explainer: पहाड़ की छाती चीरकर बना ईरान का परमाणु बेस, क्या अमेरिकी बस्टर बमों में है इसे तबाह करने का दम?
पुराने समझौतों से तुलना
इससे पहले साल 2009 में अमेरिका ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ भी एक परमाणु समझौता किया था, हालांकि यूएई अपना यूरेनियम संवर्धन स्वयं नहीं करता है। हाल ही में मई महीने में यूएई के बराक परमाणु संयंत्र के पास एक ड्रोन हमले से आग लगने की घटना भी सामने आई थी, जो क्षेत्र में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर मंडराते खतरों को दर्शाती है।
