एल नीनो का असर: नासिक संभाग पर मंडराया सूखे का खतरा, पीने के पानी के लिए आरक्षित होगा बांधों का जल!| Navbharat Live
एल नीनो का असर: नासिक संभाग पर मंडराया सूखे का खतरा, पीने के पानी के लिए आरक्षित होगा बांधों का जल!
-
Written By:
अंकिता पटेल
Updated On: Jul 23, 2026 | 10:14 AM IST
विज्ञापन
सार
Nashik Water Crisis: एल नीनो के असर से नासिक संभाग में सामान्य से कम बारिश हुई है। संभावित जलसंकट और सूखे को देखते हुए प्रशासन ने बांधों का पानी पेयजल के लिए आरक्षित रखने का फैसला किया है।

नासिक मानसून, एल नीनो,प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
विस्तार
Nashik El Nino Water Crisis: प्रशांत महासागर में एल नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष मानसून उम्मीद के मुताबिक नहीं बरसा है, जिससे नासिक संभाग पर संभावित पेयजल संकट और सूखे का खतरा गहराने लगा है। मानसून का आधा समय बीत जाने के बाद भी क्षेत्र में पर्याप्त बारिश दर्ज नहीं की गई है।
भविष्य में उत्पन्न होने वाले संकट की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाने तेज कर दिए हैं और बांधों में उपलब्ध मौजूदा जल साठे को प्राथमिकता के आधार पर पीने के पानी के लिए आरक्षित रखने का निर्णय लिया है।
जिला प्रशासन ने तैयार की एक्शन प्लान
मौसम विभाग के अनुसार, एल नीनो के कारण इस साल औसतन 70 से 80 प्रतिशत बारिश होने का ही अनुमान है। नासिक संभाग में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। संभाग की वार्षिक औसत बारिश 707 मिमी है, जबकि अब तक महज 25 प्रतिशत बारिश ही दर्ज की गई है।
सम्बंधित ख़बरें
बारिश में आई इस भारी कमी का सीधा असर कृषि, जलापूर्ति और ग्रामीण जनजीवन पर पड़ने लगा है। बारिश न होने से ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग पौने सात लाख नागरिक पीने के पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हो चुके हैं। पर्याप्त बारिश के अभाव में खरीफ की फसल की बुवाई अटक गई है, और कई इलाकों में किसानों पर दोबारा बुवाई का संकट मंडरा रहा है।
संभावित संकट से निपटने के लिए प्रमुख उपाय
संभावित जल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को तत्काल निवारक कदम उठाने के निर्देश जारी किए है। इसके तहत निम्नलिखित मुख्य उपाय योजनाएं शुरू कर दी गई हैं- बांधों में उपलब्ध सीमित पानी को केवल पीने के उपयोग के लिए आरक्षित किया जाएगा।
यह भी पढ़ें:-FSI नियम का बड़ा असर, TDR महंगा, मकान भी महंगे! नासिक में नए निर्माण की रफ्तार पड़ी धीमी
खेती के लिए दिए जाने वाले सिंचाई के पानी के चक्र पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। पशुओं के लिए पीने के पानी और चारे की पर्याप्त व्यवस्था करना तथा आवश्यकता पड़ने पर चारा छावनियां शुरू करना सरकार ने प्रत्येक जिले को संभावित सूखे और जल संकट से निपटने के लिए एक स्वतंत्र एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है।
