जांच हुई, कमेटियां बनीं, क़ानून बना, फिर भी क्यों नहीं थमता पेपर का लीक होना - BBC News हिंदी
जांच हुई, कमेटियां बनीं, क़ानून बना, फिर भी क्यों नहीं थमता पेपर का लीक होना

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- Author, विष्णुकांत तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
प्रकाशित 2 घंटे पहले
पढ़ने का समय: 21 मिनट
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है. पिछले कई हफ़्तों से चल रहे विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शन के बाद आख़िरकार धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर पोस्ट करके यह जानकारी दी.
शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा दिल्ली के जंतर मंतर पर कई दिनों से चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और राष्ट्रव्यापी स्टूडेंट आंदोलन के दौरान दिया गया है.
विद्यार्थियों की माँग है कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय की जाए, पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए
हालाँकि, एक सवाल अब भी मौजूद है कि क्या इस इस्तीफ़े से कोई बदलाव आएगा? क्या पेपर लीक अब रुकेंगे?
साल 2021 से 2026 के बीच मेडिकल प्रवेश परीक्षा हो या शिक्षक भर्ती या पुलिस भर्ती या फिर लोक सेवा आयोग की परीक्षा, कई बड़ी परीक्षाएँ पेपर लीक के आरोपों से घिरीं. करोड़ों अभ्यर्थियों पर इसका असर पड़ा. कई परीक्षाएँ रद्द हुईं. कई दोबारा कराई गईं. पेपर लीक के आरोप में कई लोग गिरफ़्तार भी किए गए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार देर रात 12 बजे सेल्फ़ी स्टाइल वीडियो बनाकर बयान दिया कि पेपर लीक 'कोई छोटी बात नहीं' है. इससे लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों को तकलीफ़ होती है.
पीएम मोदी ने अपने गुरुवार के बयान में इस सिलसिले में क़ानून सख्त करने, फ़ास्ट-ट्रैक अदालतें और नई व्यवस्था बनाने की बात भी कही.
यह पहली बार नहीं है

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मोदी सरकार ने साल 2024 में कहा था कि सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली संगठित धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए एक सख़्त क़ानून की ज़रूरत है. इसके बाद संसद ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 पारित किया.
सरकार ने संसद में कहा था कि प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा माफ़िया से निपटने के लिए यह क़ानून एक मज़बूत आधार देगा. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी और विद्यार्थियों का भरोसा बहाल किया जाएगा.
लेकिन दो साल बाद देश के सामने फिर वही सवाल है. आख़िर पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताएँ कब रुकेंगी?
साल 2021 से 2026 के बीच राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रमुख प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामलों, उनके बाद हुई जाँच, गठित समितियों और लागू किए गए सुधारों की पड़ताल से कुछ बातें सामने आती हैं.
इस पड़ताल से एक पैटर्न सामने आता है. लगभग हर बड़े विवाद के बाद जाँच एजेंसियाँ सक्रिय हुईं. कई मामलों में परीक्षाएँ रद्द हुईं. नई समितियाँ बनाई गईं. यही नहीं, कुछ मामलों में क़ानून भी बदला.
लेकिन मौजूदा हालात यह बताते हैं कि या तो जाँच के बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई या समितियों द्वारा बताए गए सुझावों पर अमल नहीं किया गया.
साल 2021 से 2026 के बीच कितनी परीक्षाएँ विवादों में रहीं?

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सार्वजनिक मीडिया रिपोर्टों को खंगालने से पता चलता है कि साल 2021 से 2026 के बीच कम से कम 50 परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोप लगे.
इनमें राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएँ, लोक सेवा आयोग, पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाएँ शामिल हैं.
इन मामलों से यह भी पता चलता है कि पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप किसी एक साल या किसी एक तरह की परीक्षा तक सीमित नहीं रहे. हालाँकि साल 2022 और 2024 ऐसे साल रहे, जब सबसे अधिक 11-11 प्रमुख परीक्षाएँ विवादों में रहीं.
साल 2021 में ऐसे 10 मामले सामने आए जबकि साल 2023 में नौ, साल 2025 में छह और साल 2026 में अब तक चार परीक्षाओं पर पेपर लीक या उससे जुड़ी अनियमितताओं के आरोप लगे.
राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक या उससे जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों का असर लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ा. कहीं परीक्षा रद्द हुई. कहीं दोबारा कराई गई. तो कई मामलों में जाँच अब भी जारी है.
नीट-यूजी 2021

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कितने अभ्यर्थी?
करीब 16.14 लाख अभ्यर्थियों ने नीट-यूजी 2021 के लिए पंजीकरण कराया था. इनमें से लगभग 15.44 लाख परीक्षा में शामिल हुए.
क्या हुआ?
सितंबर 2021 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा के दौरान राजस्थान के जयपुर स्थित एक परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया.
जयपुर पुलिस ने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्र से मोबाइल फ़ोन के ज़रिए प्रश्नपत्र की तस्वीरें बाहर भेजी गईं. इन्हें व्हाट्सऐप पर साझा कर हल कराया गया. पुलिस के अनुसार, अभ्यर्थी से इसके बदले 35 लाख रुपये की डील हुई थी.
क्या कार्रवाई हुई?
राजस्थान पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू की. शुरुआती कार्रवाई में एक अभ्यर्थी, एक इनविजिलेटर, परीक्षा केंद्र के प्रशासनिक प्रभारी समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया. बाद में मामले में आरोपपत्र भी दाखिल किए गए और जाँच आगे बढ़ी.
परीक्षा पर क्या असर पड़ा?
हालाँकि, इस मामले को एक स्थानीय केंद्र तक सीमित माना गया. राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने देशभर में परीक्षा रद्द नहीं की और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परिणाम घोषित किए.
अब मामला कहाँ तक पहुँचा?
मामले की सुनवाई अदालत में जारी है. इस मामले में किसी वरिष्ठ परीक्षा अधिकारी के ख़िलाफ़ अंतिम दोषसिद्धि नहीं हुई है.
नीट-यूजी 2024

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कितने अभ्यर्थी?
करीब 24 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था. इनमें से लगभग 23.33 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए.
क्या हुआ?
5 मई 2024 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद ग्रेस मार्क्स, असामान्य रूप से अधिक टॉप स्कोर और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर देशभर में विवाद शुरू हुआ. बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पटना में कथित पेपर लीक की जाँच शुरू की. बाद में जाँच में झारखंड के हजारीबाग सहित अन्य स्थानों के संभावित संबंध भी सामने आए. मामला राष्ट्रीय स्तर का बन गया.
क्या कार्रवाई हुई?
बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने शुरुआती जाँच की. इसे बाद में केंद्र सरकार ने सीबीआई को सौंप दिया. सीबीआई ने कई राज्यों में छापेमारी की. अनेक अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया और मामले में कई आरोपपत्र दाखिल किए. इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में भी विस्तृत सुनवाई हुई.
परीक्षा पर क्या असर पड़ा?
सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में नीट-यूजी दोबारा कराने से इनकार कर दिया और माना कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना उचित नहीं होगा. हालांकि, समय की कमी के आधार पर 1,563 अभ्यर्थियों को दिए गए ग्रेस मार्क्स रद्द कर दिए गए. इन अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने का विकल्प दिया गया और बाद में संशोधित परिणाम जारी किए गए.
अब मामला कहाँ तक पहुँचा?
सीबीआई की जाँच जारी है. एजेंसी कई आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और विभिन्न अदालतों में मुक़दमों की सुनवाई चल रही है.
हालाँकि, इस मामले में अभी अंतिम न्यायिक फैसला नहीं आया है. वहीं अब तक मुख्य अभियुक्त माने जा रहे संजीव कुमार उर्फ़ संजीव मुखिया पर सीबीआई ने कहा है कि प्रश्नपत्र चोरी और उसके वितरण में उनकी भूमिका का कोई सबूत जाँच में नहीं मिला है.
यूजीसी-नेट 2024

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कितने अभ्यर्थी?
करीब 9.08 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए. यह परीक्षा 18 जून 2024 को देशभर के 317 शहरों में आयोजित की गई थी.
क्या हुआ?
18 जून 2024 को परीक्षा आयोजित होने के अगले ही दिन शिक्षा मंत्रालय ने यूजीसी-नेट रद्द कर दी.
मंत्रालय ने कहा कि गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से ऐसे इनपुट मिले हैं जिनसे प्रथम दृष्टया यह संकेत मिला कि परीक्षा की शुचिता प्रभावित हो सकती है. इसी आधार पर परीक्षा रद्द कर दी गई और मामला सीबीआई को सौंप दिया गया.
क्या कार्रवाई हुई?
जाँच के दौरान एजेंसी ने डिजिटल साक्ष्यों, टेलीग्राम चैनलों और सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित प्रश्नपत्रों की फ़ॉरेंसिक जाँच कराई. बाद में सीबीआई ने निष्कर्ष निकाला कि जिस डिजिटल सामग्री के आधार पर पेपर लीक की आशंका बनी थी, उसमें छेड़छाड़ की गई थी. इसलिए परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुआ है इसका कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिला.
परीक्षा पर क्या असर पड़ा?
पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई. बाद में यूजीसी-नेट का आयोजन 21 अगस्त से 4 सितंबर 2024 के बीच कंप्यूटर आधारित परीक्षा के रूप में दोबारा कराया गया.
अब मामला कहाँ तक पहुँचा?
सीबीआई ने अपनी जाँच पूरी कर अदालत में क्लोज़र रिपोर्ट दाख़िल की. इसमें कहा गया कि परीक्षा से पहले संगठित पेपर लीक के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले.
हालाँकि साल 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने इस क्लोज़र रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए सीबीआई से जवाब माँगा. इसलिए इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है.
नीट-पीजी 2024

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कितने अभ्यर्थी?
करीब 2.28 लाख अभ्यर्थियों को नीट-पीजी 2024 के लिए प्रवेश पत्र जारी किए गए थे.
क्या हुआ?
नीट-पीजी की परीक्षा 23 जून 2024 को आयोजित होनी थी. लेकिन परीक्षा से एक दिन पहले, 22 जून की रात, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे स्थगित कर दिया.
मंत्रालय ने कहा कि हाल में कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को लेकर उठे सवालों के चलते परीक्षा प्रक्रिया कितनी सुरक्षित है, इसका आकलन करना ज़रूरी है. सरकार ने इसे एक एहतियात के तौर पर लिया फ़ैसला बताया था.
क्या कार्रवाई हुई?
परीक्षा स्थगित करने के बाद राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) ने परीक्षा प्रक्रिया की जाँच की और सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत किया.
बाद में संशोधित कार्यक्रम जारी किया गया. परीक्षा दो शिफ़्ट में आयोजित करने, निगरानी बढ़ाने, केंद्रीय कमांड सेंटर स्थापित करने, फ़्लाइंग स्क्वॉड तैनात करने और सोशल मीडिया पर नज़र रखने जैसे अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए.
परीक्षा पर क्या असर पड़ा?
23 जून को होने वाली परीक्षा टाल दी गई. बाद में संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 11 अगस्त 2024 को देशभर में परीक्षा आयोजित की गई.
नीट-यूजी 2026

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कितने अभ्यर्थी?
करीब 22 लाख स्टूडेंट्स ने यह परीक्षा दी थी.
क्या हुआ?
परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आए. कई राज्यों में विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन किए और परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए.
क्या कार्रवाई हुई?
केंद्र सरकार ने मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी.
कई राज्यों में छापेमारी और गिरफ्तारियाँ हुईं. सरकार ने फ़ास्ट ट्रैक अदालतों और पेपर लीक के मामलों में सख़्त सज़ा के लिए नया विधेयक लाने की घोषणा की.
परीक्षा पर क्या असर पड़ा?
एनटीए ने परीक्षा रद्द करके अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा कराई.
अब मामला कहाँ तक पहुँचा?
सीबीआई की जाँच जारी है. कई अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया गया है. मामले की जाँच विभिन्न राज्यों में चल रही है. अंतिम न्यायिक फैसला अभी आना बाकी है.
राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के अलावा, राज्य लोक सेवा आयोगों यानी पीएससी और अन्य सिविल सेवा भर्ती परीक्षाओं में भी 2021-26 के बीच प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप लगे.
कई राज्यों में परीक्षाएँ रद्द करनी पड़ीं. कई दोबारा आयोजित हुईं. कुछ मामलों की जाँच सीबीआई तक पहुँची.
बीपीएससी 67वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (2022)

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कितने अभ्यर्थी?
क़रीब छह लाख.
क्या हुआ?
8 मई 2022 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे. सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र वायरल होने के बाद विवाद शुरू हुआ.
क्या कार्रवाई हुई?
बिहार लोक सेवा आयोग ने जाँच के आदेश दिए. आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने मामला दर्ज किया और कई लोगों को गिरफ़्तार किया.
परीक्षा पर क्या असर पड़ा?
अब मामला कहाँ तक पहुँचा?
आरोपपत्र दाख़िल किए जा चुके हैं. मुक़दमे की सुनवाई जारी है.
अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (एपीपीएससी) सहायक अभियंता भर्ती (2022)

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कितने अभ्यर्थी?
सैकड़ों अभ्यर्थी.
क्या हुआ?
भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आए. जाँच के दौरान भर्ती प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं के आरोप भी लगे.
क्या कार्रवाई हुई?
मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी गई. आयोग के पूर्व अधिकारियों सहित कई लोगों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दाख़िल किए गए.
परीक्षा पर क्या असर पड़ा?
एपीपीएससी ने पूरी भर्ती परीक्षा रद्द कर दी. नए सिरे से परीक्षा कराने का फ़ैसला लिया.
अब मामला कहाँ तक पहुँचा?
सीबीआई ने आरोपपत्र दाख़िल कर दिए हैं. मामला अदालत में विचाराधीन है.
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) राज्य सेवा परीक्षा (2021)

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कितने अभ्यर्थी?
क़रीब 1.29 लाख अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हुए थे.
क्या हुआ?
भर्ती प्रक्रिया में पक्षपात और अनियमितताओं के आरोप लगे. बाद में सीबीआई ने आरोप लगाया कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों तथा चुनिंदा अभ्यर्थियों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए पेपर लीक किया. चयन प्रक्रिया में हेरफेर की.
क्या कार्रवाई हुई?
भारतीय सूचना पत्र के मुताबिक राज्य सरकार ने मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी. सीबीआई ने पूर्व अध्यक्ष, आयोग के अधिकारियों और कई चयनित अभ्यर्थियों समेत कई लोगों को गिरफ़्तार किया तथा आरोपपत्र दाखिल किए.
परीक्षा पर क्या असर पड़ा?
भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर गई. चयन सूची को अदालत में चुनौती दी गई. कुछ नियुक्तियाँ रुकीं. बाद में अदालत ने जाँच से असंबंधित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ़ किया.
अब मामला कहाँ तक पहुँचा?
सीबीआई आरोपपत्र दाख़िल कर चुकी है. कई अभियुक्त न्यायिक हिरासत में रहे हैं और मामला अदालत में विचाराधीन है. कुछ पहलुओं की जाँच और न्यायिक कार्यवाही अभी भी जारी है.
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) आरओ/एआरओ भर्ती परीक्षा (2023)

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कितने अभ्यर्थी?
करीब 10.76 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था.
क्या हुआ?
11 फरवरी 2024 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे. अभ्यर्थियों ने प्रयागराज समेत कई जगहों पर प्रदर्शन किया और परीक्षा रद्द करने की माँग की.
क्या कार्रवाई हुई?
उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जाँच एसटीएफ़ को सौंपी. जाँच के दौरान कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया. बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इस मामले की जाँच शुरू की.
परीक्षा पर क्या असर पड़ा?
राज्य सरकार ने प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा कराने का फ़ैसला किया. बाद में संशोधित कार्यक्रम के तहत परीक्षा फिर से आयोजित की गई.
एसटीएफ़ आरोपपत्र दाख़िल कर चुकी है. ईडी भी मनी लॉन्डरिंग के मामले की जाँच कर रही है और एक पूरक आरोपपत्र दाख़िल कर चुकी है. विभिन्न अदालतों में मुक़दमों की सुनवाई जारी है.
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) सीजीएल भर्ती परीक्षा (2023)

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कितने अभ्यर्थी?
करीब 6.5 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था. इनमें से तीन लाख से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए.
क्या हुआ?
सितंबर 2024 में आयोजित परीक्षा के बाद पेपर लीक होने के आरोप लगे. अभ्यर्थियों ने परिणाम पर सवाल उठाए और मामले की सीबीआई जाँच की माँग करते हुए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
क्या कार्रवाई हुई?
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने विशेष जाँच दल (एसआईटी) गठित करने की घोषणा की. एसआईटी ने कई लोगों को गिरफ़्तार किया और जाँच शुरू की.
परीक्षा पर क्या असर पड़ा?
हाईकोर्ट ने कुछ समय के लिए अंतिम परिणाम जारी करने पर रोक लगाई. बाद में अदालत ने परिणाम जारी करने और नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी.
अब मामला कहाँ तक पहुँचा?
एसआईटी की जाँच जारी है. झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई जाँच की माँग खारिज करते हुए एसआईटी को जाँच पूरी करने का निर्देश दिया. अब तक जाँच में संगठित प्रश्नपत्र लीक के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं. हालाँकि, कथित तौर पर प्रश्नपत्र दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने के सबूत मिलने की बात कही गई है.
पुलिस भर्ती परीक्षाएँ: अलग-अलग राज्य, एक जैसा पैटर्न

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साल 2021 से 2026 के बीच पुलिस भर्ती से जुड़ी कम से कम आठ प्रमुख परीक्षाएँ भी विवादों में रहीं.
इनमें हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की पुलिस कांस्टेबल भर्ती, राजस्थान पुलिस की उपनिरीक्षक (एसआई) और कांस्टेबल भर्ती, कर्नाटक पुलिस उपनिरीक्षक (पीएसआई) भर्ती, हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती, बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती, उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती और झारखंड उत्पाद कांस्टेबल भर्ती शामिल हैं.
इन मामलों में कहीं परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की गई. कहीं भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई, जबकि कई मामलों में विशेष जाँच दल (एसआईटी), स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़), राज्य पुलिस या केंद्रीय एजेंसियों ने जाँच की. कई मामलों में बड़ी संख्या में गिरफ़्तारियाँ भी हुईं.
शिक्षक भर्ती परीक्षाएँ भी विवादों में

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शिक्षक भर्ती और पात्रता परीक्षाएँ भी पिछले छह सालों में बार-बार विवादों में रहीं. साल 2021 से 2026 के बीच कम से कम आठ प्रमुख परीक्षाओं में पेपर लीक या परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगे.
इनमें उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी), राजस्थान-आरईईटी, बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई 3.0), उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की सहायक प्रोफ़ेसर भर्ती, महाराष्ट्र टीईटी, हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा, हरियाणा ग्राम सचिव भर्ती परीक्षा और तमिलनाडु की कुछ भर्ती परीक्षाएँ शामिल हैं.
जाँच, गिरफ्तारियाँ और दोबारा परीक्षाएँ तत्काल प्रतिक्रिया थीं. लेकिन सरकारों ने यह भी माना कि समस्या केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है.
यही वजह रही कि अलग-अलग समय पर राज्य और केंद्र सरकारों ने परीक्षा प्रणाली की समीक्षा के लिए समितियां और आयोग गठित किए. सवाल यह है कि इन समितियों की सिफ़ारिशों का क्या हुआ.
हर बड़े पेपर लीक के बाद सरकारों ने क्या किया?

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पिछले छह वर्षों में सामने आए लगभग हर बड़े पेपर लीक के बाद सरकारों की पहली प्रतिक्रिया रही जाँच के आदेश देना.
अलग-अलग मामलों में राज्य पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा, विशेष जाँच दल (एसआईटी), स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जाँच की.
इसके अलावा साल 2021-26 के बीच परीक्षा व्यवस्था की कमजोरियों की पहचान करने और भविष्य के लिए सुधार सुझाने के उद्देश्य से कुल चार विशेषज्ञ समितियाँ भी गठित की गईं.
पहली समिति: जस्टिस विजय कुमार व्यास समिति

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जनवरी 2022 में आरईईटी-2021 पेपर लीक विवाद के बाद राजस्थान सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त जस्टिस विजय कुमार व्यास की अध्यक्षता में समिति बनाई.
समिति को राज्य की भर्ती परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था की समीक्षा करने और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए सुझाव देने की ज़िम्मेदारी दी गई.
इस समिति ने पेपर के छपने, सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा और परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक के बेहतर उपयोग से जुड़े कई सुझाव दिए. साथ ही भर्ती परीक्षाओं के लिए अधिक मज़बूत सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाने की सिफ़ारिश की.
क्या लागू हुआ?
सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए, लेकिन सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि समिति की सभी सिफ़ारिशें पूरी तरह लागू की गईं या उनका स्वतंत्र मूल्यांकन किया गया. इस साल की नीट परीक्षा में पेपर लीक के मामले में राजस्थान के कई इलाक़े जाँच के केंद्र में हैं.
दूसरी समिति: जस्टिस राजेंद्र कुमार वर्मा आयोग

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दरअसल, रिज़ल्ट जारी होने के साथ ही पटवारी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर कई गंभीर आरोप लगे. मेरिट लिस्ट के 10 में से 7 टॉपर का एग्ज़ाम सेंटर एक ही कॉलेज (एनआरआई कॉलेज ) था.
यह कॉलेज तत्कालीन भिंड बीजेपी विधायक संजीव कुमार कुशवाहा का है.
इस आयोग का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार सुझाना नहीं था. इसका दायरा विशेष रूप से पटवारी भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों की जाँच तक सीमित था.
आयोग ने क्या पाया?
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि केवल एक परीक्षा केंद्र के असामान्य परिणामों के आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया को अवैध नहीं ठहराया जा सकता. उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने पूरी भर्ती रद्द करने की अनुशंसा नहीं की.
इसके बाद क्या हुआ?
राज्य सरकार ने आयोग की रिपोर्ट स्वीकार की और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ी.
तीसरी समिति: डॉ. के. राधाकृष्णन समिति द्वारा राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा

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जून 2024 में नीट-यूजी परीक्षा को लेकर उठे विवाद के बाद केंद्र सरकार ने पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया.
यह समिति पहले गठित समितियों से अलग थी. जहाँ राजस्थान की समिति का दायरा एक राज्य की भर्ती परीक्षाओं तक सीमित था और मध्य प्रदेश का आयोग एक विशेष भर्ती विवाद की जाँच कर रहा था. वहीं राधाकृष्णन समिति को पूरे देश की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और उसमें सुधार के सुझाव देने की ज़िम्मेदारी दी गई.
समिति ने अपनी रिपोर्ट में 101 सिफ़ारिशें कीं. इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की प्रशासनिक संरचना में बदलाव, राज्यों के साथ बेहतर समन्वय, आधार आधारित पहचान सत्यापन, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, परीक्षा केंद्रों की निगरानी मज़बूत करना, नई मानक संचालन प्रक्रियाएँ (एसओपी) लागू करना, ज़िला और राज्य स्तर पर समन्वय समितियाँ बनाना और प्रमुख परीक्षाओं को चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित प्रणाली की ओर ले जाना शामिल था.
सरकार ने इनमें से कुछ सिफारिशों पर अमल किया. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में प्रशासनिक बदलाव किए गए, और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू किया गया.
हालाँकि, सार्वजनिक रिकॉर्ड से यह पुष्टि नहीं होती कि समिति की सभी 101 सिफ़ारिशें पूरी तरह लागू हुई हैं या नहीं.
ख़ासतौर पर कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं को लेकर दिए गए सुझाव और कुछ तकनीकी सुरक्षा उपाय पूरी तरह लागू हो पाते इससे पहले ही 2026 में नीट-यूजी से जुड़ा एक और बड़ा विवाद सामने आ गया.
जुलाई 2026 में नीट-यूजी विवाद से जुड़ी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से यही पूछा कि डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर अब तक क्या प्रगति हुई है. अदालत ने सरकार से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के प्रशासनिक ढाँचे, विशेषज्ञों की नियुक्ति, नई सुरक्षा व्यवस्थाओं और अन्य सिफारिशों के क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तृत हलफनामा माँगा.
चौथी समिति: राष्ट्रीय तकनीकी समिति का प्रस्ताव

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फरवरी 2024 में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक पेश करते समय केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं के लिए एक राष्ट्रीय तकनीकी समिति बनाने का भी प्रस्ताव रखा.
सरकार ने कहा था कि यह समिति ऑनलाइन और कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के लिए सुरक्षित आईटी प्रणाली विकसित करने, तकनीकी मानक तय करने और परीक्षा सुरक्षा के लिए प्रोटोकॉल तैयार करने का काम करेगी.
हालाँकि, उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि इस समिति का गठन कब हुआ, उसने क्या सिफ़ारिशें दीं या उसके काम की प्रगति क्या रही.
साल 2021 से 2026 के बीच परीक्षा विवादों के बाद चार प्रमुख समितियों और आयोगों का गठन हुआ. इनमें से एक राष्ट्रीय तकनीकी समिति केवल प्रस्ताव के रूप में सामने आई, जबकि तीन ने अपनी रिपोर्ट या निष्कर्ष सरकारों को सौंपे.
इन तीनों का दायरा अलग था. राजस्थान की समिति ने भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की. मध्य प्रदेश का आयोग एक विशेष भर्ती विवाद तक सीमित रहा. केवल डॉ. के. राधाकृष्णन समिति को पूरे देश की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था में सुधार के सुझाव देने की ज़िम्मेदारी मिली.
सरकार ने राधाकृष्णन समिति की कुछ सिफ़ारिशों पर अमल किया. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में प्रशासनिक बदलाव किए गए. नए एसओपी लागू किए गए. लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू किया गया.
लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड यह नहीं बताते कि इन समितियों की कुल कितनी सिफ़ारिशें पूरी तरह लागू हुईं, कितनी लंबित हैं, किन्हें छोड़ दिया गया और इन सुझावों का क्या असर हुआ, कुछ हुआ भी या नहीं- इनका भी कोई स्वतंत्र मूल्यांकन सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है. इसी दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में नई प्रवेश और भर्ती परीक्षाएँ विवादों में आती रहीं.
पिछले छह वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा विवादों के बाद जाँच एजेंसियाँ बदलीं. समितियाँ बनीं. नया क़ानून आया और परीक्षा प्रक्रिया में कुछ बदलाव भी हुए. लेकिन साफ़ तौर पर यह कहा जा सकता है कि यह बदलाव काफ़ी नहीं हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान कहा कि हर विवाद के बाद "एड-हॉक" (सिर्फ उस समय की समस्या सुलझाने वाले फौरी क़दम) उपायों से काम नहीं चलेगा और परीक्षा व्यवस्था में स्थायी संस्थागत सुधार ज़रूरी हैं. अदालत ने यह भी कहा कि वह इन सुधारों की प्रगति की निगरानी करेगी.
अब यह देखना होगा कि दिल्ली में चल रहे विद्यार्थियों और युवाओं के विरोध प्रदर्शन को शांत करने के लिए सरकार इस बार कौन-कौन से और क़दम उठाती है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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