राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- लाठियों से नहीं, जनता की आवाज से आएगा बदलाव

राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- लाठियों से नहीं, जनता की आवाज से आएगा बदलाव

Sonam Wangchuk at Rajghat: NEET पेपर लीक मुद्दे पर 26 दिन तक आमरण अनशन करने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक सोमवार को सबसे पहले राजघाट पहुंचे.

Sonam Wangchuk at Rajghat: NEET पेपर लीक मुद्दे पर 26 दिन तक आमरण अनशन करने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक सोमवार को सबसे पहले राजघाट पहुंचे.

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Sonam Wangchuk at Rajgath

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Sonam Wangchuk at Rajghat: NEET पेपर लीक मामले के विरोध में 26 दिन तक आमरण अनशन करने वाले समाज सुधारक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक अब अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए हैं. गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह सबसे पहले नई दिल्ली के राजघाट पहुंचे. वहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित किए और उनके विचारों को याद करते हुए देश के नाम एक महत्वपूर्ण संदेश दिया. अस्पताल से निकलने से पहले ही उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को बताया था कि वह राजघाट जाएंगे.

राजघाट पर बापू को किया नमन

राजघाट पहुंचकर सोनम वांगचुक ने महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके बाद वह कुछ देर वहां बैठे और गांधीजी के विचारों को याद किया. उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए गांधीजी का रास्ता आज भी सबसे प्रभावी है. उनके अनुसार, समाज में बदलाव लाने के लिए शांति, सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाना जरूरी है.

— Press Trust of India (@PTI_News) July 27, 2026

'अहिंसा का रास्ता आज भी सबसे मजबूत'

मीडिया से बातचीत में वांगचुक ने कहा कि महात्मा गांधी का अहिंसा का संदेश आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है. उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकारों को जनता की बात ध्यान से सुननी चाहिए. अगर लोगों की समस्याओं को बातचीत और संवाद के जरिए हल किया जाए तो विवाद बढ़ने की नौबत नहीं आती. उन्होंने कहा कि विरोध जताने का सबसे अच्छा तरीका शांतिपूर्ण आंदोलन और सत्याग्रह है.

'जनता की आवाज सबसे बड़ी ताकत'

सोनम वांगचुक ने कहा कि समाज में बदलाव हिंसा से नहीं बल्कि लोगों की एकजुट आवाज से आता है. उन्होंने कहा कि लाठियों और ताकत के इस्तेमाल से समस्याओं का समाधान नहीं होता. इसके बजाय सरकारों और नीति बनाने वालों को लोगों की परेशानियों को समझना चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि शांति और संवाद ही हर बड़ी चुनौती का सबसे बेहतर जवाब है.

डॉक्टरों और समर्थकों का जताया आभार

अस्पताल से बाहर आने के बाद सोनम वांगचुक ने मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और पूरे मेडिकल स्टाफ का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि कठिन समय में सभी ने पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ उनका इलाज किया. उन्होंने उन लोगों का भी आभार जताया, जिन्होंने उनके आंदोलन के दौरान लगातार उनका साथ दिया और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की. वांगचुक ने कहा कि अब स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद वह जल्द ही अपने गृह राज्य लद्दाख लौटेंगे.

26 दिन तक किया आमरण अनशन

सोनम वांगचुक ने 28 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक मामले के विरोध में आमरण अनशन शुरू किया था. उनका कहना था कि परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए. लगातार 26 दिन तक भोजन नहीं करने की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई.

पहले सफदरजंग, फिर मेदांता अस्पताल में हुआ इलाज

अनशन के दौरान स्वास्थ्य खराब होने पर उन्हें पहले दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बाद में दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 21 जुलाई 2026 को उन्हें बेहतर इलाज के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल भेजा गया. वहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चला. कई दिनों तक इलाज और देखभाल के बाद उनकी सेहत में सुधार हुआ, जिसके बाद सोमवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

अब आगे क्या करेंगे वांगचुक?

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने साफ किया कि वह अहिंसा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात उठाना जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुनना और समझना हर लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि देश में संवाद, शांति और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में सभी मिलकर काम करेंगे. अब स्वास्थ्य लाभ के बाद वह लद्दाख लौटकर अपनी सामाजिक और पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं.

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