क्या स्तनपान कराते समय मोबाइल चलाना सही है? जानें एक्सपर्ट की राय

Breastfeeding and smartphone: स्मार्टफोन आज हर किसी की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। नई माताएं भी इससे अछूती नहीं हैं। बच्चे को स्तनपान कराते समय सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, चैट करना या वीडियो देखना अब आम बात हो गई है। इसी आदत को ब्रेक्सटिंग कहा जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आदत लगातार बनी रहे, तो इसका असर मां और शिशु दोनों पर पड़ सकता है।

यशोदा हॉस्टिल की सीनियर कंसल्टेंट प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. माधवी रेड्डी वेन्नापुसा का कहना है कि ब्रेक्सटिंग दो शब्दों ब्रेस्टफीडिंग और टेक्सिंग (मोबाइल पर संदेश भेजना या इस्तेमाल करना) से मिलकर बना है। इसका मतलब है स्तनपान के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना। इसमें केवल मैसेज करना ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया देखना, वीडियो देखना या ऑनलाइन खरीदारी करना भी शामिल है।

स्तनपान सिर्फ दूध पिलाना नहीं, इमोशनल अटैचमेंट भी है

डॉक्टर का कहना है कि स्तनपान सिर्फ च्चे का पेट भरने का जरिया नहीं है। यह वह समय होता है, जब मां और शिशु के बीच सबसे मजबूत भावनात्मक रिश्ता बनता है। इस दौरान मां का चेहरे का भाव, आंखों का संपर्क, मुस्कान और स्पर्श बच्चे को सुरक्षा का एहसास दिलाते हैं। यही अनुभव उसके मानसिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मोबाइल में व्यस्त रहने से क्या हो सकता है असर?

अगर मां का पूरा ध्यान मोबाइल स्क्रीन पर है, तो वह बच्चे के साथ होने वाले इस प्राकृतिक संवाद से दूर हो सकती है। कई बार बच्चा दूध पीना बंद कर देता है, असहज महसूस करता है या मां का ध्यान चाहता है, लेकिन मोबाइल में व्यस्त रहने की वजह से ये संकेत नजरअंदाज हो सकते हैं। लंबे समय तक ऐसा होने पर मां और बच्चे के बीच जुड़ाव प्रभावित होने की आशंका रहती है। 

An Indian mother breastfeeding her newborn baby while absentmindedly looking at a smartphone in one hand, the baby gazing toward the mother's face seeking eye contact
एक मां अपने नवजात शिशु को स्तनपान करा रही है, लेकिन उसका ध्यान हाथ में पकड़े स्मार्टफोन पर है।

बच्चे के संकेत समझना क्यों जरूरी है?

नवजात शिशु बोल नहीं सकता, इसलिए वह अपनी जरूरतें चेहरे के हावभाव, रोने और शरीर की हरकतों से बताता है। स्तनपान के दौरान मां यदि बच्चे पर ध्यान देती है, तो वह आसानी से समझ सकती है कि बच्चा भूखा है, उसका पेट भर गया है या उसे किसी तरह की परेशानी हो रही है। लेकिन मोबाइल स्क्रीन पर नजर रहने से ये संकेत छूट सकते हैं।

मां की सेहत पर भी पड़ सकता है असर

लगातार मोबाइल इस्तेमाल करने से स्क्रीन टाइम बढ़ता है, जिससे नींद प्रभावित हो सकती है। नींद पूरी न होने पर थकान, तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। इसका असर स्तनपान के अनुभव और बच्चे की देखभाल पर भी पड़ सकता है।

क्या स्तनपान के दौरान मोबाइल बिल्कुल नहीं चलाना चाहिए?

यशोदा हॉस्पिटल की डॉ. माधवी रेड्डी वेन्नापुसा का कहना है कि हम ऐसा नहीं कहते कि मोबाइल का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। यदि कोई जरूरी कॉल हो या महत्वपूर्ण संदेश देखना हो, तो ऐसा किया जा सकता है। लेकिन स्तनपान के पूरे समय सोशल मीडिया स्क्रॉल करना या वीडियो देखने की आदत से बचना बेहतर माना जाता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

डॉ. माधवी रेड्डी वेन्नापुसा सलाह देती हैं कि स्तनपान के दौरान मोबाइल को कुछ मिनट के लिए दूर रख दें। इस समय बच्चे से आंख मिलाकर बात करें, उसे प्यार से सहलाएं और उसकी हर प्रतिक्रिया पर ध्यान दें। इससे न केवल मां और बच्चे का रिश्ता मजबूत होता है, बल्कि बच्चे के मस्तिष्क, भावनात्मक और सामाजिक विकास को भी बेहतर सहयोग मिलता है।

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FAQ

Q.

Brexting क्या है?

A.

स्तनपान के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने की आदत को Brexting कहा जाता है।

Q.

क्या Brexting बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकती है?

A.

लगातार मोबाइल में व्यस्त रहने से मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव और संवाद प्रभावित हो सकता है।

Q.

क्या स्तनपान के समय मोबाइल चलाना पूरी तरह गलत है?

A.

जरूरी काम के लिए सीमित उपयोग ठीक है, लेकिन लगातार सोशल मीडिया या वीडियो देखने से बचना चाहिए।

Q.

स्तनपान के दौरान सबसे जरूरी क्या है?

A.

बच्चे से आंखों का संपर्क, प्यार भरा स्पर्श और उसकी जरूरतों पर ध्यान देना।

Q.

Brexting से बचने का सबसे आसान तरीका क्या है?

A.

स्तनपान के दौरान मोबाइल को कुछ देर के लिए दूर रखकर पूरा ध्यान बच्चे पर केंद्रित करें।