संपत्ति में मान पीछे, आय में सैनी -सुक्खू से आगे: एडीआर रिपोर्ट -कर्ज में हरियाणा के सीएम सबसे आगे, हिमाचल सीएम पर चार केस - Chandigarh News
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान देश के सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्रियों की सूची में पांचवें स्थान पर हैं। उनकी कुल संपत्ति 1.97 करोड़ रुपए है। पड़ोसी राज्य हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की संपत्ति 5.80 करोड़ रुपए है, जो मान से करीब तीन गुना
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रिपोर्ट मुख्यमंत्रियों द्वारा चुनावी शपथ पत्रों में दी गई जानकारी पर आधारित है। इसमें देश के 31 मुख्यमंत्रियों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक कनार्टक के सीएम डीके शिवकुमार देश में सबसे अमीर ज्यादा संपत्ति वाले सीएम है। उनकी कुल संपत्ति1,413 करोड़ करोड़ रुपए है। जबकि सबसे कम संपत्ति जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला की है। उन्होंने 55 लाख संपत्ति घोषित की हुई है।
वार्षिक आय में मान दोनों पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आगे
एडीआर रिपोर्ट के अनुसार भगवंत मान ने अपने पेशे में केवल राजनीति का उल्लेख किया है। उनकी वार्षिक आय 18.34 लाख रुपए है। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद को पेंशनभोगी और ठेकेदार बताया है। उनकी वार्षिक आय 17.22 लाख रुपए है। वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधायक, मुख्यमंत्री और स्टोन क्रशर मालिक के रूप में 13.45 लाख रुपए की वार्षिक आय घोषित की है।
कर्ज के मामले में हरियाणा के सीएम सबसे आगे
तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों में सबसे अधिक कर्ज हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर है। उन्होंने 74.82 लाख रुपए का कर्ज घोषित किया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर 30.35 लाख रुपए और हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर 22.42 लाख रुपए का कर्ज है।
तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों का रिकॉर्ड
हरियाणा: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। वह देश के 17 ऐसे मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड पूरी तरह साफ है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ चार आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों में सबसे अधिक हैं। इनमें एक गंभीर आईपीसी धाराओं से जुड़ा मामला भी शामिल है। उन पर गैरकानूनी सभा, सरकारी आदेश की अवहेलना और लोगों की जान को खतरे में डालने जैसे आरोप हैं। पंजाब सीए भगवंत मान के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है। इसमें एक गंभीर आईपीसी धारा भी शामिल है। उन पर सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और दंगे से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज है।
