मोहम्मद जुनैद पर एक्शन से भड़का उद्धव गुट; 'सामना' में बीजेपी सरकार को घेरा, पूछा- 'भोजन कराना अपराध है क्या?'| Navbharat Live
जंतर-मंतर पर लोगों को खाना खिलाने वाले मोहम्मद जुनैद पर एक्शन से भड़का उद्धव गुट
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Written By:
अनिल सिंह
Updated On: Jul 28, 2026 | 04:04 PM IST
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सार
Shiv Sena UBT on Mohammad Junaid: जंतर-मंतर पर नीट प्रदर्शनकारियों को भोजन कराने वाले मोहम्मद जुनैद पर यूपी पुलिस की कार्रवाई पर भड़का उद्धव गुट। कहा- धर्म के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है।

जंतर-मंतर पर लोगों को खाना खिलाने वाले मोहम्मद जुनैद (फोटो क्रेडिट-X)
विस्तार
Saamana Editorial on Mohammad Junaid: नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले 35 दिनों के ऐतिहासिक छात्र आंदोलन के बाद अब उस आंदोलन को मानवीय सहायता प्रदान करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हो रही पुलिसिया कार्रवाई को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय के माध्यम से केंद्र की बीजेपी सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है।
पार्टी का आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों को भोजन और पानी उपलब्ध कराने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद जुनैद और शादाब सैफी को राजनीतिक द्वेष के चलते निशाना बनाया जा रहा है।
जुनैद के पूरे परिवार को किया जा रहा परेशान
‘सामना’ के संपादकीय में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस न केवल जुनैद, बल्कि उनके पूरे परिवार और ससुराल पक्ष के लोगों को भी प्रताड़ित कर रही है। आरोप है कि उनके माता-पिता और बहन को कई बार पुलिस थानों में ले जाकर 12-12 घंटे तक बैठाया गया और उनसे यह पूछताछ की गई कि 35 दिनों तक हजारों प्रदर्शनकारियों को भोजन कराने के लिए फंड कहां से आया।
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संपादकीय में आरोप लगाया गया कि प्रशासन ने जंतर-मंतर के आसपास के होटल, ठेले और भोजन पहुंचाने वाली सेवाओं को बंद करा दिया था ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके। इसके बावजूद, पैर में चोट होने के बावजूद मोहम्मद जुनैद स्थानीय सिख लंगरों के सहयोग से दिन-रात प्रदर्शनकारियों तक भोजन पहुंचाने का काम करते रहे।
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पहलगाम और पुलवामा मामले को लेकर सरकार को घेरा
उद्धव गुट ने आरोप लगाया कि सरकार मानवीय सहायता देने वालों की जांच में अपनी पूरी ताकत लगा रही है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों में विफल रही है। संपादकीय में सवाल उठाया गया कि पहलगाम आतंकी हमले में 27 पर्यटकों की हत्या करने वाले आतंकियों और पुलवामा हमले में 40 जवानों की जान लेने वाले RDX के स्रोत का आज तक पता नहीं चल पाया।
‘सामना’ ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पूरी सरकारी मशीनरी सिर्फ इसलिए जुनैद के भोजन अभियान की फंडिंग की जांच में लगी है क्योंकि वे दाढ़ी और टोपी पहनते हैं।
बीजेपी के चुनावी फंड की जांच की मांग; सोनम वांगचुक से अपील
सामना ने मांग की कि जिस तरह जुनैद के अभियान की फंडिंग की जांच हो रही है, उसी तरह राजनीतिक दलों की आर्थिक व्यवस्था और विशेष रूप से बीजेपी के चुनावी फंड की भी आधिकारिक व पारदर्शी जांच होनी चाहिए। संपादकीय में जंतर-मंतर आंदोलन को ‘तानाशाही के खिलाफ युवाओं का विशाल और जीवंत महोत्सव’ बताया गया है।
अंत में, शिवसेना (यूबीटी) ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे मोहम्मद जुनैद, शादाब सैफी और अन्य जमीनी स्तर के सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित सरकारी कार्रवाई के विरोध में एकजुट होकर आवाज उठाएं।
