Pregnant Dolphin Rescue: महराजगंज में नहर से बचाई गई 147 किलो की गर्भवती गंगा डॉल्फिन, राप्ती नदी में सुरक्षित छोड़ा - Haribhoomi

हराजगंज की नहर में तीन दिनों से फंसी 147 किलोग्राम वजनी और 7 फीट 2 इंच लंबी गर्भवती गंगा डॉल्फिन को वन विभाग की संयुक्त टीम ने सोमवार को सकुशल बचा लिया। रेस्क्यू के तुरंत बाद भटहट से राजघाट तक 52 किमी लंबा विशेष 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाकर कड़ी निगरानी में महज 1 घंटा 5 मिनट के भीतर उसे राप्ती नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

Dolphin Rescue UP Maharajganj

7 फीट 2 इंच लंबी और 147 किलो वजनी होने के कारण डॉल्फिन संकरे और कम पानी वाले नहर के हिस्से से बाहर नहीं निकल पा रही थी और करीब तीन दिनों तक वहीं फंसी रही।

  • Published: 21 Jul 2026, 04:11 PM IST
  • Last Updated: 21 Jul 2026, 04:11 PM IST

नेपाल सीमा से सटे त्रिवेणी नदी से भटककर एक विशालकाय गर्भवती गंगा डॉल्फिन शनिवार को देवरिया कैनाल के रास्ते महराजगंज जिले के धरमौली बाजार के पास नहर में पहुंच गई थी। 7 फीट 2 इंच लंबी और 147 किलो वजनी होने के कारण डॉल्फिन संकरे और कम पानी वाले नहर के हिस्से से बाहर नहीं निकल पा रही थी और करीब तीन दिनों तक वहीं फंसी रही।

शनिवार को जब स्थानीय ग्रामीणों और मछुआरों के जाल में फंसने के बाद इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो प्रशासनिक अमला तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया।

महराजगंज की अहिरौली नहर में दिखी दुर्लभ डॉल्फिन, डॉल्फिन को देख ग्रामीणों ने जाल से पकड़ लिया, कुछ देर तक उसे देखने और फोटो-वीडियो बनाने के बाद लोगों ने समझदारी दिखाते हुए सुरक्षित वापस नहर में छोड़ दिया #Maharajganj #Dolphin #UttarPradesh #Wildlife @Heritage_fn @ravikishann pic.twitter.com/5nfdY9GLDX

— Rajeev Datt Panday (@DattRajeev) July 19, 2026

तेज बहाव और जलस्तर बना रेस्क्यू में बड़ी चुनौती
गोरखपुर पुलिस, सिंचाई विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर और लखनऊ से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने रविवार से ही बचाव अभियान शुरू कर दिया था। एसडीओ विनीत सिंह के मुताबिक, नहर में पानी के अत्यधिक तेज बहाव, ज्यादा जलस्तर और डॉल्फिन के बार-बार स्थान बदलने के कारण रविवार को टीम को सफलता नहीं मिल सकी।

नमामि गंगे एवं राज्य स्वच्छ गंगा मिशन केवल नदियों की स्वच्छता के लिए ही नहीं, बल्कि उनमें बसने वाले प्रत्येक जलीय जीव के संरक्षण के लिए भी निरंतर कार्यरत है। स्वच्छ और सुरक्षित नदियां ही गंगा डॉल्फिन सहित सभी जलीय जीवों का सुरक्षित घर हैं।
इसी संकल्प के तहत गोरखपुर में तीन दिनों… pic.twitter.com/zFm0YsqJAk

— SMCG UP (@smcgup) July 21, 2026

इसके बाद सिंचाई विभाग से तालमेल बिठाकर नहर के जलस्तर को कम कराया गया और चौपरिया, अहिरौली, धरमौली, सिसवा शुक्ल, सुम्हाखोर, मेहाबार, देवीपुर और धनगड़ा के सिवान तक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। आखिरकार सोमवार को कुशीनगर वन प्रभाग के हाटा रेंज अंतर्गत सिसवां शुक्ल गांव के पास डॉल्फिन को सुरक्षित जाल में पकड़ लिया गया।

52 किमी लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाकर राप्ती में छोड़ा
नहर से सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद विशेष एंबुलेंस में डॉल्फिन का प्राथमिक उपचार और मेडिकल टेस्ट किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि वह गर्भवती है और उसे तुरंत उसके प्राकृतिक आवास में पहुंचाना अनिवार्य है। डीएफओ गोरखपुर शुभम सिंह के निर्देशन में भटहट से राजघाट तक 52 किलोमीटर लंबा 'ग्रीन कॉरिडोर' तैयार कराया गया।

पुलिस की सख्त निगरानी और एंबुलेंस के तेज मूवमेंट के जरिए महज 1 घंटे 5 मिनट में डॉल्फिन को राप्ती नदी में पहुंचाकर सुरक्षित प्रवाहित कर दिया गया। भारत के राष्ट्रीय जलीय जीव गंगा डॉल्फिन को बचाने के इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनुराधा बेमुरी, मुख्य वन संरक्षक डॉ. बीसी ब्रह्मा, चिड़ियाघर के उपनिदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह और टीएसए फाउंडेशन इंडिया के डॉ. शैलेंद्र सिंह की टीम का मुख्य योगदान रहा।