Purnima Kab Hai: आज या कल... किस दिन मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा? जानें सही तिथि, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

Guru Purnima 2026 Kab Hai (पूर्णिमा कब है): गुरु पूर्णिमा सनातन धर्म का पवित्र पर्व होता है. यह पर्व गुरुओं को समर्पित होता है. इस दिन पर उन्हें श्रद्धा और सम्मान प्रकट किया जाता है. इस पर्व की शुरुआत वेदव्यास जयंती के रूप में हुई थी. इसलिए, इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि गुरु ही अपने शिष्य को ज्ञान के प्रकाश से सिंचता है और उसे अंधकार से निकालता है. इस दिन लोग अपने गुरुओं. माताओं-पिताओं और शिक्षकों तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन करने वाले को सम्मान देते हैं.

उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति और सफलता मिलती है. गुरु पूर्णिमा पर पूजा पाठ और दान करने का खास महत्व होता है. गुरु पूर्णिमा आज या कल, किस दिन मनाई जाएगी. आइए इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताते हैं. साथ ही जानिए गुरु पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त.

गुरु पूर्णिमा कब है (Purnima Kab Hai)

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम 6:22 से शुरू हो रही है. वहीं, पूर्णिमा तिथि का समापन 29 जुलाई 2026 को रात 8:08 मिनट पर हो रहा है. ऐसे में इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा क्योंकि पूर्णिमा की उदयातिथि 29 को पड़ रही है.

गुरु पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त (Guru Purnima 2026 Shubh Muhurat)

  • ब्रह्म मुहूर्त- प्रातकाल सुबह 4 बजकर 17 मिनट से 4:59 तक 
  • विजय मुहूर्त- दोपहर 2:43 से दोपहर 3:37 तक
  • संध्याकाल मुहूर्त- शाम 7 बजकर 14 मिनट से रात 8 बजकर 17 मिनट तक

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गुरु पूर्णिमा पूजा विधि?

गुरु पूर्णिमा के दिन आपको सुबह जल्दी उठना है और स्नान आदि करके स्वच्छ होना है. इस दिन पर पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए. इसके बाद घर के मंदिर में अच्छे से सफाई करें. अब एक चौकी बिठाएं और भगवान श्रीहरि की मूर्ति, भगवान शिव और महर्षि वेदव्यास की तस्वीर स्थापित करें. अगर आप किसी आध्यात्मिक गुरु को मानते हैं तो उनकी तस्वीर या फिर चरण पादुका स्वच्छ आसन पर स्थापित करें बिठाएं. इसके बाद अक्षत और चंदन का टीका करें. अब फूल, धूप, दीया और नैवेद्य अर्पित करें. इसके बाद गुरु मंत्रों का जाप करें. ऊं गुरवे नम: और गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु: गुरु देवो महेश्वर:, इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं. पूजा के समापन से पहले आरती करें और गुरु तथा गुरु तुल्य लोगों का आशीर्वाद लें. अगर संभव हो तो वस्त्र, अन्न, फल और पुस्तकों का वितरण करें और दक्षिणा भी दें. 

गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?

यह दिन हमारे जीवन को प्रकाशमय बनाने वाले गुरुओं और संतों को सम्मान, कृतज्ञता और श्रद्धा प्रकट करने के लिए मनाया जाता है. गुरु पूर्णिमा के दिन हिंदू धर्म के कुछ महत्त्वपूर्ण गुरुओं में श्री आदि शंकराचार्य, श्री रामानुज आचार्य तथा श्री माधवाचार्य की पूजा की जाती है. इसके अलावा, बौद्ध धर्म के लोग भी इस पूर्णिमा तिथि पर गौतम बुद्ध की पूजा करते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पर महान ऋषि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था. 

कौन थे वेदव्यास जी?

वेदव्यास जी हिंदू धर्म के महान ऋषि थे, जिन्होंने महाभारत की रचना की थी. उन्हें वेदों का वर्गीकरणकर्ता और अठारह पुराणों में प्रणेता माना जाता है. उनका मूल नाम 'कृष्णद्वैपायन' था और वे महर्षि पराशर तथा सत्यवती के पुत्र थे. वेदव्याज ने ही वेदों के मंत्रों को चार भागों- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद में बांटा, जिससे उनका नाम 'वेदव्यास' पड़ा था. उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण और ब्रह्मसूत्र की रचना की थी. 

गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म और परंपराओं में गुरु को ईश्वर का स्वरूप माना जाता है. माना जाता है कि गुरु ही व्यक्ति को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं. इसलिए, गुरु पूर्णिमा सिर्फ एक पर्व नहीं बल्कि अपने जीवन में मार्गदर्शन देने वाले सभी गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी होता है.

गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें और क्या न करें?

इस दिन पर अपने गुरुओं और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद जरूर लें. पूर्णिमा तिथि पर पीले वस्त्र पहनें. भगवान विष्णु और वेदव्यास की पूजा करें. गरीबों को अन्न, वस्त्र, पुस्तकें दान करें और भागवत गीता या धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें. 

गुरु पूर्णिमा के दिन अपने से बड़े और बुजुर्गों का अपमान बिल्कुल न करें.
गुस्से और विवाद से बचें. इस दिन नशा और तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. किसी का अपमान और मुख से कटु वचनों को नहीं बोलना चाहिए.

गुरु पूर्णिमा पर दान का खास महत्व

बता दें कि गुरु पूर्णिमा का दिन दानकर्म के लिए भी शुभ माना जाता है. इसलिए, इस दिन पीले वस्त्रों का, हल्दी का चने की दाल, केले, केसर, घी, पुस्तके, छाता और अन्न का दान करना चाहिए.

गुरु की आरती (बृहस्पति देव की आरती) (Brihaspati Dev Ki Aarti in Hindi)

जय बृहस्पति देवा, ऊं जय बृहस्पति देवा ।

छिन छिन भोग लगा‌ऊं, कदली फल मेवा ॥

ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।

जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥

ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।

सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥

ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।

प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥

ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।

पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥

ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।

विषय विकार मिटा‌ओ, संतन सुखकारी ॥

ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

जो को‌ई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।

जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥

ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

सब बोलो विष्णु भगवान की जय ।

बोलो बृहस्पतिदेव भगवान की जय ॥

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)