Pusa की 4 हाइब्रिड मक्का किस्में हैं खास, जानें खासियत और औसत उपज

Pusa की 4 हाइब्रिड मक्का किस्में हैं खास, जानें खासियत और औसत उपज

15 सितंबर 2026, नई दिल्ली: Pusa की 4 हाइब्रिड मक्का किस्में हैं खास, जानें खासियत और औसत उपज – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI) के जेनेटिक्स डिवीजन ने मक्के की कई उन्नत हाइब्रिड किस्में विकसित की हैं। इनमें पूसा विवेक QPM9 इम्प्रूव्ड, पूसा HM4 इम्प्रूव्ड, पूसा HM8 इम्प्रूव्ड और पूसा HM9 इम्प्रूव्ड शामिल हैं। इन किस्मों को वर्ष 2017 में जारी किया गया था। इनकी खासियत बेहतर पोषण गुणवत्ता, उपज और अलग-अलग कृषि क्षेत्रों के अनुसार अनुकूलता है।

1. पूसा विवेक QPM9 इम्प्रूव्ड

यह Vivek QPM9 का उन्नत संस्करण है। इसे crtRB1 एलील की मार्कर-असिस्टेड इंट्रोग्रेशन तकनीक से विकसित किया गया है। इसमें प्रोविटामिन-A की मात्रा 8.15 ppm है, जबकि Vivek QPM9 में यह 2.26 ppm थी। यह देश का पहला प्रोविटामिन-A से भरपूर मक्का हाइब्रिड है। इसमें opaque2 की मौजूदगी के कारण प्रोटीन में ट्रिप्टोफैन 0.74% और लाइसिन 2.67% की मात्रा भी अधिक है। इस वजह से इसे बहु-पोषक मक्का हाइब्रिड बताया गया है। यह जल्दी पकने वाली किस्म है। बुवाई के बाद उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में 93 दिन और प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 83 दिन में 75% सूखी भूसी प्राप्त होती है। इसकी औसत उपज उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में 5.59 और प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 5.92 है। यह किस्म उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र और प्रायद्वीपीय क्षेत्र के लिए जारी की गई है। इसकी खेती खरीफ मौसम में सिंचित परिस्थितियों में की जाती है।

2. पूसा HM4 इम्प्रूव्ड

यह HM4 का उन्नत संस्करण है, जिसे opaque2 एलील की मार्कर-असिस्टेड इंट्रोग्रेशन तकनीक से विकसित किया गया है। इस किस्म में प्रोटीन की गुणवत्ता बेहतर है। इसमें ट्रिप्टोफैन 0.91% और लाइसिन 3.62% है, जबकि HM4 में यह क्रमशः 0.58% और 2.26% था। यह मध्यम अवधि में पकने वाली हाइब्रिड है और बुवाई के 87 दिन बाद 75% सूखी भूसी प्राप्त करती है। इसकी औसत उपज 6.42 है। इसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए जारी किया गया है। इसकी खेती खरीफ मौसम में सिंचित परिस्थितियों में की जाती है।

3. पूसा HM8 इम्प्रूव्ड

यह HM8 का उन्नत संस्करण है। इसे भी opaque2 एलील की मार्कर-असिस्टेड इंट्रोग्रेशन तकनीक से विकसित किया गया है। इसमें प्रोटीन की गुणवत्ता बेहतर है। इसके प्रोटीन में ट्रिप्टोफैन 1.06% और लाइसिन 4.18% है, जबकि HM8 में इनकी मात्रा क्रमशः 0.59% और 2.37% थी। यह मध्यम अवधि में पकने वाली हाइब्रिड है। बुवाई के 95 दिन बाद 75% सूखी भूसी प्राप्त होती है। इसकी औसत उपज 6.23 है। इसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु के लिए जारी किया गया है। इसकी खेती खरीफ मौसम में सिंचित परिस्थितियों में की जाती है।

4. पूसा HM9 इम्प्रूव्ड

यह HM9 का उन्नत संस्करण है और इसे opaque2 एलील की मार्कर-असिस्टेड इंट्रोग्रेशन तकनीक से विकसित किया गया है। इसकी प्रोटीन गुणवत्ता में सुधार किया गया है। इसमें ट्रिप्टोफैन 0.68% और लाइसिन 2.97% है, जबकि HM9 में यह क्रमशः 0.28% और 1.78% था। यह मध्यम अवधि में पकने वाली हाइब्रिड है और बुवाई के 89 दिन बाद 75% सूखी भूसी प्राप्त होती है। इसकी औसत उपज 5.20 है। इसे बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए जारी किया गया है। इसकी खेती खरीफ मौसम में सिंचित परिस्थितियों में की जाती है।

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