Putrada Ekadashi Vrat Katha: निसंतान राजा को कैसे मिला संतान सुख? पुत्रदा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये रोचक कथा

Putrada Ekadashi Vrat Katha: निसंतान राजा को कैसे मिला संतान सुख? पुत्रदा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये रोचक कथा

पुत्रदा एकादशी 2026Image Credit source: unsplash

Putrada Ekadashi 2026: पुत्रदा एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना और संतान सुख की कामना से जोड़कर देखा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान श्रीहरि की पूजा करने से संतान संबंधी मनोकामनाओं के लिए आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसी वजह से संतान की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए इस एकादशी का विशेष महत्व माना गया है. द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त 2026 यानी आज रखा जा रहा है. मान्यता के अनुसार, संतान सुख की कामना से इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. आइए जानते हैं पुत्रदा एकादशी की वह पौराणिक कथा जिसे बिना पढ़ें ये व्रत अधूरा माना जाता है.

क्या है पुत्रदा एकादशी की पौराणिक कथा?

पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग के आरंभ में महिष्मती नाम की एक नगरी हुआ करती थी. वहां महाजित नाम के राजा शासन करते थे. राजा अपनी प्रजा का बहुत ध्यान रखते थे और राज्य में किसी तरह की कमी नहीं थी. उनके पास धन-दौलत, वैभव और सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उनके जीवन में एक बड़ा दुख था. राजा महाजित निसंतान थे. संतान न होने की वजह से वह भीतर ही भीतर काफी परेशान रहते थे. उन्हें चिंता सताती थी कि उनके बाद राज्य की जिम्मेदारी कौन संभालेगा और उनके वंश को आगे कौन बढ़ाएगा. धीरे-धीरे यह चिंता इतनी बढ़ गई कि राजा का मन राज-पाट और सुख-सुविधाओं से भी हटने लगा.

राजा की परेशानी देखकर प्रजा भी हुई परेशान

राजा महाजित अपनी प्रजा का पालन-पोषण पिता की तरह करते थे. इसलिए प्रजा भी राजा के दुख को अपना दुख मानती थी. जब लोगों ने देखा कि राजा हर समय संतान न होने की चिंता में डूबे रहते हैं, तो मंत्रियों और प्रजा ने मिलकर इस समस्या का समाधान खोजने का फैसला किया. इसके बाद सभी लोग लोमश ऋषि के पास पहुंचे. उन्होंने ऋषि को राजा की परेशानी बताई और पूछा कि आखिर ऐसा कौन सा उपाय किया जाए, जिससे राजा को संतान सुख प्राप्त हो सके. ऋषि ने ध्यान लगाकर राजा के पूर्व जन्म के कर्मों के बारे में विचार किया.

लोमश ऋषि ने बताया पिछले जन्म का रहस्य

लोमश ऋषि ने बताया कि राजा महाजित ने पिछले जन्म में कुछ ऐसे कर्म किए थे, जिनका प्रभाव उनके वर्तमान जीवन पर पड़ रहा था. ऋषि ने कहा कि पूर्व जन्म में राजा एक बार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन भूखे थे. भूख से परेशान होकर उन्होंने एक जलाशय से पानी पीने के लिए एक गाय और उसके बछड़े को वहां से हटा दिया था. ऋषि ने बताया कि उसी कर्म के प्रभाव के कारण वर्तमान जन्म में राजा को संतान सुख से वंचित रहना पड़ा.

पुत्रदा एकादशी के व्रत से दूर हुआ संकट

लोमश ऋषि ने राजा की प्रजा और मंत्रियों को सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि सभी लोग श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा करें, एकादशी का उपवास रखें और रात में जागरण करें.ऋषि ने यह भी कहा कि इस व्रत से मिलने वाले पुण्य को राजा महाजित को समर्पित कर दिया जाए. ऋषि की बात मानकर मंत्री और प्रजा अपने राज्य लौट आए और उन्होंने विधि-विधान से पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा. व्रत पूरा होने के बाद द्वादशी के दिन सभी ने उस व्रत का पुण्य राजा महाजित को समर्पित कर दिया. धार्मिक कथा के अनुसार, इस पुण्य के प्रभाव से राजा की पत्नी ने गर्भ धारण किया.

नौ महीने बाद घर में गूंजी किलकारी

पुत्रदा एकादशी के व्रत और उसके पुण्य के प्रभाव से कुछ समय बाद रानी ने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया. तभी से इसी कथा के कारण सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा गया और इसे संतान सुख की कामना से जोड़कर देखा जाने लगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और कथा श्रवण करने से भक्त को पुण्य की प्राप्ति होती है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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