Putrada Ekadashi Vrat Katha: राजा को कैसे मिली योग्य संतान? पढ़ें पुत्रदा एकादशी की ये कथा
Putrada Ekadashi Vrat Katha: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। एक साल में कुल 24 एकादशी होती है। हर एकादशी की अलग कथा है, जिसे सुनने के बाद ही उस एकादशी का पूरा फल मिलता है।
Putrada Ekadashi 2026: सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते हैं। इस साल पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026, रविवार को है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से संतान सुख की कामना पूरी होती है। संतान की इच्छा रखने वाले लोगं के लिए यह एकादशी विशेष फलदायी मानी गई है। इस व्रत से जुड़ी एक कथा भी है, जिसे सुनने के बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे पढ़ें पुत्रदा एकादशी व्रत की रोचक कथा…
पुत्रदा एकादशी की कथा
द्वापर युग के आरंभ में महिष्मती नगरी में महाजित नामक राजा राज्य करते थे। वे बहुत धर्मात्मा और प्रजा का पुत्र के समान पालन करने वाले थे, लेकिन उनके कोई संतान नहीं थी। पुत्र न होने के कारण राजा हमेशा चिंतित और दुखी रहते थे। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए कई उपाय किए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
एक दिन राजा ने अपनी सभा में मंत्रियों से कहा कि उन्होंने कभी अन्याय नहीं किया, प्रजा को कष्ट नहीं दिया और हमेशा धर्म के मार्ग पर चलते हुए शासन किया। फिर भी उन्हें संतान सुख क्यों नहीं मिल रहा, यह उनकी समझ से बाहर है। उन्होंने मंत्रियों से इस समस्या का समाधान खोजने के लिए कहा।
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राजा के दुख का कारण जानने के लिए मंत्री वन में पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात महर्षि लोमश से हुई। मंत्रियों ने उन्हें राजा की समस्या बताई। ऋषि ने ध्यान लगाकर राजा के पूर्व जन्म के कर्मों को देखा।
महर्षि लोमश ने बताया कि पिछले जन्म में राजा बहुत उद्दंड थे। एक बार ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के दिन वे दो दिनों से भूखे थे। दोपहर में पानी पीने के लिए एक तालाब पर पहुंचे। वहां एक प्यासी गाय अपने बछड़े के साथ पानी पी रही थी। राजा ने गाय को वहां से हटा दिया और स्वयं पानी पी लिया। इसी कर्म के कारण उन्हें इस जन्म में पुत्रहीन होने का कष्ट भोगना पड़ रहा है। हालांकि उस दिन भूखे रहने से उन्हें एकादशी व्रत का पुण्य भी मिला, जिसके कारण उन्हें राजपद प्राप्त हुआ।
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मंत्रियों ने पाप का निवारण पूछा तो महर्षि ने श्रावण शुक्ल पुत्रदा एकादशी का व्रत करने और उसका पुण्य राजा को समर्पित करने की सलाह दी। मंत्रियों ने विधि-विधान से पुत्रदा एकादशी का व्रत किया और उसका फल राजा को समर्पित कर दिया। इसके पुण्य प्रभाव से रानी गर्भवती हुईं और नौ महीने बाद एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख की इच्छा रखने वालों के लिए विशेष फलदायी होता है। इस व्रत से पापों का नाश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
Disclaimer
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