Raksha Bandhan spl: फिल्मों में कितना बदल गया बहन-भाई का किरदार? यश-नयनतारा ने Toxic में लिखी रिश्ते की नई कहानी

Raksha Bandhan spl: फिल्मों में कितना बदल गया बहन-भाई का किरदार? यश-नयनतारा ने Toxic में लिखी रिश्ते की नई कहानी

Toxic में नयनतारा और यश भाई-बहन बने हैं

हिंदी फिल्मों में भाई-बहन के किरदारों का जब भी जिक्र आता है- दो बातें खासतौर पर रेखांकित होती हैं. एक- कि भाई बड़ा होता है, बहन छोटी होती है; दूसरे कि भाई बहुत जांबाज होता है, डकैत होता है या क्रांतिकारी होता है जो संकट में बहन की रक्षा करता है. मेरे भैया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन… काजल फिल्म का यह गाना याद होगा. फिल्म में भाई बने सुनील दत्त के लिए बहन बनीं मीना कुमारी यही गाने गाती है और दुआएं मांगती हैं. इसी तरह रेशम की डोरी में धर्मेंद्र को घेर कर बहनें गाती हैं- रेशम की डोरी से संसार बांधा है… गुजरे ज़माने की इन जैसी अनेक फिल्मों में भाई के लिए बहनें यही कामना करती हैं कि वह स्वस्थ रहे, निरोग रहे, सुखी रहे, वीर-बहादुर और एक कामयाब इंसान बने. जबकि उन कहानियों में हकीकत में भाई ही हमेशा बहनों की रक्षा करता हुआ प्रतीत होता है.

अब वर्तमान दौर की फिल्मों में बहनें खुद भी आगे बढ़ कर भाई के हाथों को मजबूत करती दिख रही हैं. वह भाई को बलवान और कामयाब बनाने के लिए केवल दुआएं नहीं मांगती बल्कि कंधे से कंधे भिड़ा कर मैदान में उसके दुश्मनों से मुकाबला भी करती हैं. साल 2000 से ही यह बदलाव दिखता है. यश की टॉक्सिक इसका सबसे ताजा उदाहरण है. फिल्म की कहानी सामने आ चुकी है लेकिन फोकस करने वाली बात ये है कि इसमें यश और नयनतारा भाई-बहन बने हैं. दोनों ने फिल्मों में दिखाए जाने वाले भाई-बहन की परंपरागत छवि को बिल्कुल बदल दिया है. दोनों मिलकर बंदूक उठाते हैं और गैंगस्टर से लड़ते हैं.

खून खराबा के बीच रिश्ते की नई परिभाषा

हां, इस फिल्म में ना तो रक्षा बंधन का कोई सीन रखा गया है और ना ही इस भावना को आगे बढ़ाने वाला कोई गाना ही है. वैसे भी आजकल फिल्मों से राखी के गानों की इतिश्री हो चुकी है. जैसा कि हम जान चुके हैं कि टॉक्सिक एक हिंसा प्रधान फिल्म है, एक्शन, धुआं और खून खराबा इस फिल्म के हर सीन में है. फिल्म के सारे किरदार खून के प्यासे हैं. कौन किसको, कब और किधर से गोली मार कर खत्म कर देता है- सबकुछ तबाह कर देता है, दर्शकों को ये बात अभी तक ठीक से समझ नहीं आई है. लेकिन इन्हीं खून खराबों और धुंआधार धमाके के बीच फिल्म लेखक-निर्देशक ने रिश्ते की नई परिभाषा भी गढ़ी है.

‘गंगा’ बनी छोटे भाई ‘राया’ की रक्षक

प्रेमी-प्रेमिका, पति-पत्नी का फरेब और बाप-बेटे के जटिल और जानलेवा परिदृश्यों के बीच नयनतारा एक ऐसी बहन की भूमिका में हैं, जो अपने छोटे भाई की हिफाजत और कामयाबी की मंजिल तक पहुंचाने की कोशिश में अपना बलिदान दे देती हैं. नयनतारा के किरदार का नाम ‘गंगा’ है. यश छोटे भाई बने हैं, जिसके किरदार का नाम ‘राया’ है. दुर्भाग्य से ‘गंगा’ और ‘राया’ बचपन में ही माता-पिता के साये से महरूम हो जाते हैं.

बचपन अत्यंत गरीबी में बीता है. माता-पिता में बनती नहीं है. मां ही उसके पिता का कत्ल कर देती है. ऐसे में ‘गंगा’ अपने छोटे भाई ‘राया’ की परवरिश के लिए बड़ी बहन होने के साथ-साथ मां-बाप की भूमिका भी निभाने लगती है. किशोरावस्था में दलदल की जिंदगी से समझौता करती है ताकि भाई एक दिन बड़ा आदमी बने.

‘गंगा’ के रोल की गहराइयों में उतरती है नयनतारा

जब दोनों बड़े होते हैं तो उनका एक ही ज्वाइंट मिशन होता है- गोवा के अंडरवर्ल्ड डॉन सल्वाडोर की गद्दी को हासिल करना. ‘गंगा’ अपने भाई के लिए कुछ भी कर सकती है. उसे पता है कि उसके भाई के कई दुश्मन हैं, लिहाजा वह हमेशा उसके साये से भी चिपक के रहना चाहती है और उससे मिलने वाली लड़कियों और दूसरे लोगों के प्रति चौकस भी रहती है. जब ‘राया’ ‘सल्वाडोर’ के अवैध धंधे में सहयोगी बनकर शामिल हो जाता है तब भी ‘गंगा’ उस गैंग के अंदर भाई का ढाल बनकर रहती है.

वास्तव में गंगा की अपनी निजी जिंदगी की कोई ख्वाहिश नहीं- वह भाई से कहती है- मैं तुम्हें एक दिन गोवा पर राज करते हुए देखना चाहती हूं. उसने किशोरोवस्था में वही काम करके भाई को बड़ा किया जो उसकी मां करती थी. फिल्म के लेखक-निर्देशक ने फिर भी उस किरदार का नाम ‘गंगा’ रखा जो केवल दूसरों के लिए बहती है. नयनतारा ‘गंगा’ के इस रोल की गहराइयों में उतरती है. एक दिन भाई की खातिर अपनी कुर्बानी दे देती है.

भाई-बहन के रिश्तों की नई परिभाषा की अन्य फिल्में

वैसे भाई की हिफाजत करने वाला बड़ी बहन का ऐसा रोल किसी फिल्म में पहली बार नहीं आया है. फिल्मों में बहनें पहले छोटी होती थीं लेकिन जोश (2000) में शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय बच्चन को जुड़वां भाई-बहन के तौर पर बराबर बनाकर पेश किया गया है. मंसूर खान निर्देशित यह फिल्म भी संयोगवश गोवा पृष्ठभूमि की है, इस कहानी में भी ड्रग्स का मुद्दा है. इसके बाद कई फिल्में आईं जो आज के दौर में भाई-बहन के रिश्ते को नए संदर्भ के साथ परिभाषित करती हैं. मसलन दिल धड़कने दो, माई ब्रदर निखिल, सरबजीत, जिगरा तो एनिमल भी.

ओनिर निर्देशत माई ब्रदर निखिल (2005) में भी गोवा पृष्ठभूमि की कहानी थी. फिल्म में संजय सूरी छोटे भाई हैं जबकि जूही चावला बड़ी बहन. संजय सूरी का किरदार एचआईवी ग्रस्त हो जाता है, ऐसे में पूरा परिवार उससे मुंह मोड़ लेता है लेकिन बड़ी बहन बनीं जूही चावला उसकी सुरक्षा और मदद के लिए आगे आती हैं. भारतीय फिल्मों की परंपरागत अवधारणा के उलट कहानी आलिया भट्ट की जिगरा और सरबजीत जैसी फिल्मों में भी दिखती है.

‘जिगरा’ फिल्म में आलिया भट्ट भी बनीं बड़ी बहन

वासन बाला निर्देशित जिगरा (2024) में भी आलिया भट्ट अपने छोटे भाई की रक्षक है. यहां भी टॉक्सिक की तरह आलिया और वेदांग रैना के किरदारों के माता-पिता बचपन से ही नहीं हैं. ऐसे में आलिया ही वेदांग की परवरिश करती है. लेकिन गलत संगति की वजह से वेदांग जब ड्रग रैकेट में फंसकर गिरफ्तार हो जाता है तो बहन उसे छुड़ाने की मुहिम में जुटती हैं.

इसी क्रम में पाकिस्तान की जेल में बंद सरबजीत सिंह की वास्तविक कहानी से प्रेरित बनी फिल्म सरबजीत (2016) है. जिसमें अपने भाई के लिए बहन दलबीर कौर के संघर्ष की दास्तां हैं. सरबजीत फिल्म को ओमांग कुमार ने निर्देशित की थी. अब गीतू मोहनदास के निर्देशन में आई टॉक्सिक में यश-नयनतारा ने भाई-बहन की गैर-परंपरागत भूमिका निभाकर रेशम की डोरी जैसे नाजुक इस रिश्ते को एक नया रूपक दिया है. फिल्मों में बहन की भूमिका बदल रही है, वह भाई को बहादुर बनाने के साथ साथ खुद भी बहादुर बन रही हैं.

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संजीव श्रीवास्तव

संजीव श्रीवास्तव

संजीव श्रीवास्तव का पैतृक गांव-घर बिहार के सीतामढ़ी में है लेकिन पिछले करीब ढाई दशक से दिल्ली से लेकर मुंबई तक मीडिया की मुख्यधारा में सक्रिय हैं. ब्रेकिंग न्यूज़ से लेकर क्रिएटिव राइटिंग तक का हुनर रखते हैं, देश-विदेश की राजनीति, फिल्म, लिटरेचर, क्राइम जैसे विषयों पर बेबाकी से लिखते हैं. आसानी से समझ आने वाली और सोचने-विचारने वाली भाषा लिखना पसंद है. सिनेमा प्रिय विषय है- लिहाजा फिल्मों पर अब तक तीन किताबें, दो उपन्यास और कुछ पटकथा-संवाद भी लिख चुके हैं. कुछेक प्रिंट मीडिया में सब एडिटरी के बाद साल 2000 से टीवी न्यूज़ की दुनिया में प्रवेश. सबसे पहले जैन टीवी फिर सहारा समय में करीब 14 साल गुजारा, जहां प्राइम टाइम स्पेशल शोज/प्रोग्राम बनाने से लेकर मुंबई की एंटरटेंमेंट फील्ड में रिपोर्टिंग तक की. उसके बाद सूर्या समाचार, एबीपी न्यूज़ और न्यूज़ इंडिया के आउटपुट होते हुए अब डिजिटल मीडिया में TV9 से सम्बद्ध.

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