Reels और Shorts देखने से दिमाग के कुछ हिस्से हो सकते हैं कम एक्टिव, स्टडी में सामने आया असर
टेक एंड गैजेट्स
- Authored by: प्रदीप पाण्डेय
- Updated Aug 19, 2026, 04:00 PM IST
नई स्टडी के निष्कर्ष शॉर्ट वीडियो और दिमाग की गतिविधि के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध की ओर इशारा करते हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि Reels या Shorts सीधे तौर पर दिमाग को नुकसान पहुंचाते हैं।
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पहले की रिसर्च में भी सामने आया है असर
Instagram Reels और YouTube Shorts जैसे शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म लोगों को लगातार स्क्रॉल करते रहने के लिए डिजाइन किए गए हैं। कुछ सेकंड के छोटे-छोटे वीडियो देखने के दौरान समय का पता नहीं चलता और यूजर्स लंबे समय तक स्क्रॉल करते रहते हैं। अब एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि शॉर्ट वीडियो देखने का असर सिर्फ समय बिताने तक सीमित नहीं हो सकता। रिसर्च के मुताबिक, वीडियो देखते समय दिमाग के कुछ हिस्सों की गतिविधि अस्थायी रूप से कम हो सकती है, जो ध्यान केंद्रित करने, आत्म-नियंत्रण और निर्णय लेने जैसे कामों से जुड़े हैं।
56 लोगों पर किया गया अध्ययन
NeuroImage में प्रकाशित इस स्टडी में 56 युवा वयस्कों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि जब लोग अपनी पसंद से शॉर्ट वीडियो देखते हैं तो उनके दिमाग में किस तरह की गतिविधि होती है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (fMRI) का इस्तेमाल किया।
इसके साथ ही प्रोटॉन मैग्नेटिक रेजोनेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी के जरिए दिमाग में ग्लूटामेट और GABA जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर की भी जांच की गई। प्रतिभागियों को लोगों, पालतू जानवरों, गेम्स और प्रकृति से जुड़े अलग-अलग तरह के वीडियो दिखाए गए। ज्यादातर वीडियो 30 सेकंड से छोटे थे और प्रतिभागी जब चाहें किसी वीडियो को स्किप कर सकते थे।
फोकस और सेल्फ-कंट्रोल से जुड़े हिस्सों पर असर
शोधकर्ताओं ने दिमाग के कॉग्निटिव कंट्रोल नेटवर्क के दो प्रमुख हिस्सों पर खास ध्यान दिया। इनमें dorsal anterior cingulate cortex (dACC) और dorsolateral prefrontal cortex (dlPFC) शामिल हैं। ये हिस्से इंसान के व्यवहार को नियंत्रित करने, बदलती परिस्थितियों के अनुसार प्रतिक्रिया देने और ध्यान को नियंत्रित करने जैसे महत्वपूर्ण कामों में भूमिका निभाते हैं।
स्टडी में पाया गया कि जब प्रतिभागी किसी वीडियो में ज्यादा रुचि ले रहे थे और उसे देखते रहे, तो इन क्षेत्रों में ब्रेन एक्टिविटी कम हुई। यानी जिस समय लोग अपनी पसंद का शॉर्ट वीडियो देख रहे थे, उस दौरान दिमाग के फोकस, सेल्फ-कंट्रोल और निर्णय लेने से जुड़े कुछ हिस्से अपेक्षाकृत कम सक्रिय दिखाई दिए।
लगातार स्क्रॉल करने की वजह समझने में मिल सकती है मदद
शोधकर्ताओं का मानना है कि ये निष्कर्ष यह समझने में मदद कर सकते हैं कि यूजर्स के लिए शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करना रोकना इतना मुश्किल क्यों हो सकता है। अक्सर लोग कुछ मिनट के लिए Reels या Shorts देखने के लिए फोन उठाते हैं, लेकिन एक के बाद एक वीडियो देखते हुए काफी समय बीत जाता है।
हालांकि, स्टडी का मतलब यह नहीं है कि Reels या Shorts देखने से पूरा दिमाग ‘बंद’ हो जाता है। रिसर्च में सिर्फ यह देखा गया कि वीडियो देखने के दौरान दिमाग के कुछ हिस्सों की गतिविधि कम हुई। साथ ही, यह स्टडी यह साबित नहीं करती कि शॉर्ट वीडियो देखने से दिमाग को स्थायी नुकसान होता है या लंबे समय तक कॉग्निटिव क्षमता खराब होती है।
पहले की रिसर्च में भी सामने आया है असर
शॉर्ट-फॉर्म वीडियो के संभावित कॉग्निटिव प्रभावों को लेकर यह पहली स्टडी नहीं है। 2025 में Nicholas Barton और Michael Smyth की रिसर्च “Context-switching in short-form videos: What is the impact on prospective memory?” में शॉर्ट वीडियो में तेजी से बदलते संदर्भों और prospective memory के बीच संबंध का अध्ययन किया गया था। Prospective memory का मतलब उन कामों को याद रखना है, जिन्हें भविष्य में करना होता है। रिसर्च में संकेत मिला कि तेजी से बदलते वीडियो संदर्भ इस तरह की याददाश्त को प्रभावित कर सकते हैं।
लंबे समय तक Shorts देखने से याददाश्त पर भी असर?
जून 2026 में Kaiyue Zhai, Yunfei Guo और Li Wang की एक अन्य स्टडी “The Influence of Short-Video Usage on Prospective Memory Under Different Cue Type Conditions” में भी शॉर्ट वीडियो देखने के प्रभाव का अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि लंबे समय तक शॉर्ट वीडियो देखने से ऐसे कामों में सटीकता कम हो सकती है, जिनमें लोगों को बाद में किए जाने वाले किसी काम को याद रखना होता है। हालांकि, इसका प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करता था कि उस काम में कितने ध्यान की जरूरत थी।
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प्रदीप पाण्डेयauthor
प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।
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