भागवत बोले-कुछ लोगों को अहंकार कि सब उनके नियंत्रण में: उज्जैन में कहा- यह उनकी गलतफहमी है; धर्म संसद में देशभर के युवाओं को दिए संदेश - Ujjain News
भागवत बोले-कुछ लोगों को अहंकार कि सब उनके नियंत्रण में:उज्जैन में कहा- यह उनकी गलतफहमी है; धर्म संसद में देशभर के युवाओं को दिए संदेश
उज्जैन13 घंटे पहले
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को उज्जैन में युवा धर्म संसद को संबोधित किया। उन्होंने धर्म, पर्यावरण, युवाओं के आचरण और पड़ोसी देश पाकिस्तान का नाम लिए बिना भारत के प्रति उसके रवैये का उल्लेख किया। धर्म संसद में देशभर के 1700 युवा शामिल हो रहे हैं।
भागवत ने युवाओं से अपील की कि वे धर्म को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन और आचरण में उतारें। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं का जीवन ऐसा होना चाहिए, जिससे पूरा विश्व प्रेरणा ले।
भागवत ने कहा कि जब व्यक्ति अहंकार में आकर काम करता है और यह मानता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में। हर चीज उसकी इच्छा के अनुसार होनी चाहिए, तो उसे गलतफहमी हो जाती है। उन्होंने युवाओं से जीवन में धर्म के सिद्धांतों को समझने और उन्हें आचरण में उतारने की बात कही।
अब पढ़िए भागवत ने क्या-क्या कहा…
धर्म रिलिजन नहीं, जीवन का अनुशासन है
धर्म रिलिजन नहीं है, बल्कि जीवन का अनुशासन है। किसी इच्छा की पूर्ति, भय, लोभ या प्राण बचाने के लिए भी धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। सुख-दुख आते-जाते रहते हैं, लेकिन धर्म नित्य रहता है।
धर्म को लेकर भ्रम का एक कारण अपनी भाषा और धर्म के वास्तविक अर्थ को भूल जाना है। पश्चिमी देशों के लोगों ने भारत में धर्म के आचरण, कर्मकांड और अनुशासन को देखा और उसे अपने यहां के ‘रिलिजन’ के समान समझ लिया। बाद में भारत में भी धर्म को रिलिजन कहा जाने लगा।
जैसे कुश्ती सीखने के लिए अखाड़े में दंड-बैठक लगाना जरूरी है, उसी तरह धर्म के कर्मकांड और अनुशासन उसके अभ्यास का हिस्सा हैं। कर्मकांड धर्म का एक अंग है, लेकिन पूरा धर्म नहीं है।

युवा धर्म संसद के दौरान दीप प्रज्जवलित करते संघ प्रमुख मोहन भागवत।
कचरा न करना और ट्रैफिक नियमों का पालन भी धर्म
धर्म केवल पूजा या धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि हम खाते हैं, लेकिन कचरा नहीं करते, यह भी धर्म है। ट्रैफिक के नियमों का पालन करते हुए चलते हैं, यह भी धर्म है।
अपनी उपासना-पद्धति, जो प्रकृति, गुरु या परंपरा से मिली है, उसका सम्मान करना चाहिए और दूसरों की उपासना का भी उतना ही सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी उपासना का सम्मान करते हुए दूसरों की उपासना का सम्मान करना और किसी को कन्वर्ट नहीं करना भी धर्म का हिस्सा है।
पश्चिमी दिशा के पड़ोसी देश का किया उल्लेख
भागवत ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि पश्चिम दिशा में एक पड़ोसी देश बिना कारण विवाद करता है और बार-बार तकलीफ देता है। उन्होंने कहा कि उसे कई बार सबक भी सिखाया गया, लेकिन भारत ने कभी यह नहीं कहा कि विवाद करने के कारण वह वापस आ जाए या उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाए।
उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग विचारधाराओं की सरकारें रही हैं, लेकिन दुनिया के संघर्षों में भारत ने अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप नहीं किया। जिन लोगों ने भारत को तकलीफ दी, जरूरत पड़ने पर भारत ने उनकी मदद भी की और यह नहीं देखा कि वहां किस विचारधारा के लोग सत्ता में हैं। भागवत ने कहा कि ऐसा इसलिए है, क्योंकि भारत के डीएनए में धर्म है।

युवा धर्म संसद में मंच पर भागवत।
युवाओं के धर्म पर सोचने से खुशी
भागवत ने कहा कि उन्हें खुशी है कि युवा धर्म के बारे में सोच रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजकल धर्म के बारे में यह बात कम सुनाई देती है और कई लोग इसे बुढ़ापे की चीज मानते हैं। लोग कहते हैं कि गीता और रामायण रिटायरमेंट के बाद पढ़ने के ग्रंथ हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।
उन्होंने कहा कि धर्म अस्तित्व के प्रारंभ से लेकर अंत तक रहता है और सब कुछ उसी के अनुसार चलता है। व्यक्ति इसे माने या न माने, धर्म जीवन में बना रहता है।

युवा धर्म संसद में शामिल देशभर से आए विद्वार्थी और विद्वान।
धर्म से मोक्ष की ओर जाने का मार्ग
संघ प्रमुख ने कहा कि जीवन में व्यक्ति भौतिक सुख, इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति चाहता है, लेकिन इनकी पूर्ति धर्म के पालन से ही होती है। उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्ति को मोक्ष की ओर ले जाता है।
भागवत ने युवाओं से कहा कि किसी इच्छा को पूरा करने, डर, लालच या अपनी जान बचाने के लिए भी धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक सुख-दुख और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन धर्म स्थायी है।

आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचे गए हैं।।
देशभर से चयनित युवाओं का विशेष उद्बोधन सत्र भी होगा
दूसरे दिन सुबह युवा धर्म संसद का विधिवत उद्घाटन होगा। कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत, आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण महाराज, संरक्षक-सेवाज्ञ संस्थानम्, प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, कुलगुरु-केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली और आशीष कुमार आशु, अध्यक्ष-सेवाज्ञ संस्थानम् शामिल होंगे। इस दौरान धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा पर व्याख्यान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सूचना-विचार संघर्ष पर संवाद तथा देशभर से चयनित युवाओं का विशेष उद्बोधन सत्र होगा।

व्याख्यान सत्र में प्रसिद्ध गीतकार मनोज मुंतशिर भी शामिल होंगे
उद्घाटन सत्र के बाद दोपहर 12 से 2 बजे तक व्याख्यान सत्र आयोजित होगा। इसमें अवधेशानंद गिरि जी महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा; मनोज मुंतशिर, प्रसिद्ध पटकथा लेखक एवं गीतकार; प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, कुलपति, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय; स्मृति अनंतलक्ष्मी जी, सह-संस्थापिका एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शिका, अनादि फाउंडेशन और जे. नंद कुमार जी, राष्ट्रीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे।

25 राज्यों से 1,700 युवा कार्यक्रम का हिस्सा बने
सह-मीडिया प्रमुख बादल सिंह ने बताया कि युवा धर्म संसद का छठा संस्करण इस बार उज्जैन में आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर से करीब 1,700 छात्र-छात्राओं के साथ लगभग 300 विद्वान, शिक्षक और प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन को ध्यान में रखते हुए युवा धर्म संसद का आयोजन किया गया है।
इससे पहले काशी, अयोध्या, हरिद्वार, मथुरा और कांचीपुरम में इसका आयोजन हो चुका है। इन आयोजनों में करीब 7,100 प्रतिभागी शामिल हो चुके हैं। इस बार रजिस्ट्रेशन जुलाई में शुरू हुए थे और 31 अगस्त को बंद कर दिए गए।

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