Russia Economy Crisis: कंगाली की दहलीज पर रूस? सोना बेचने के बाद अब डायमंड रिजर्व की होगी निलामी
Updated: Monday, July 27, 2026, 20:48 [IST]
Russia Economy Crisis: यूक्रेन के साथ ढाई साल से ज्यादा समय से जारी युद्ध का असर अब रूस की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। पहले सरकारी खजाने से अरबों डॉलर का सोना बेचने की खबरें सामने आईं और अब मॉस्को ने अपने डायमंड रिजर्व की नीलामी का फैसला किया है। रूस के वित्त मंत्रालय ने 9 सितंबर को 2.16 ग्राम से अधिक वजन वाले हीरे की नीलामी का नोटिफिकेशन जारी किया है।
इसे रूस की आर्थिक चुनौतियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रतिबंधों और युद्ध के खर्च ने रूस को अपने रणनीतिक भंडार बेचने के लिए मजबूर कर दिया है?
4 अरब डॉलर का सोना बेचने के बाद अब हीरों की बारी
यूक्रेनी मीडिया और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने पिछले एक साल में करीब 4 अरब डॉलर का सोना बेचा, जबकि पिछले छह महीनों में 445 टन सोने की बिकवाली की गई। रूस सरकार ने इन दावों का सार्वजनिक तौर पर खंडन नहीं किया। अब वित्त मंत्रालय ने सरकारी खजाने में रखे डायमंड रिजर्व की नीलामी का फैसला किया है। इसे रूस की नकदी जुटाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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पहली बार बड़े डायमंड की होगी नीलामी
रूस के वित्त मंत्रालय के अनुसार 9 सितंबर को मॉस्को में 2.16 ग्राम वजन वाले हीरे की नीलामी होगी। यह पहली बार है जब 2.16 ग्राम या उससे अधिक वजन वाले सरकारी डायमंड को नीलामी के लिए रखा गया है। इससे पहले केवल छोटे आकार के हीरे ही बेचे जाते थे। नीलामी में हिस्सा लेने के लिए केवल रूसी नागरिक पात्र होंगे और उन्हें 20 अगस्त तक 2500 डॉलर की टोकन राशि जमा करनी होगी।
नीलामी के बाद मिलेगा मालिकाना हक
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सफल बोली लगाने वाले खरीदार के साथ औपचारिक अनुबंध किया जाएगा। इसी अनुबंध के आधार पर हीरे का कानूनी मालिकाना हक दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया तय नियमों के तहत होगी और केवल पात्र नागरिक ही इसमें भाग ले सकेंगे। माना जा रहा है कि इस नीलामी से सरकार को अतिरिक्त राजस्व जुटाने में मदद मिलेगी।
युद्ध और प्रतिबंधों ने बढ़ाया आर्थिक दबाव
2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर पश्चिमी देशों ने कई दौर के आर्थिक प्रतिबंध लगाए। इसका असर रूस के ऊर्जा निर्यात और विदेशी आय पर पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2025 में रूस का बजट घाटा GDP के 2.6 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो 2020 के बाद सबसे अधिक है। वहीं तेल और गैस से मिलने वाला राजस्व भी 24 प्रतिशत घट गया, जिससे सरकारी वित्त पर दबाव लगातार बढ़ा है।
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क्या रणनीतिक भंडार बेचने की मजबूरी में रूस?
हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस के तेल और गैस ठिकानों पर कई हमले किए हैं, जिससे ऊर्जा उत्पादन और निर्यात भी प्रभावित हुआ है। ऐसे में पहले सोना और अब डायमंड रिजर्व की नीलामी को रूस की आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि रूस सरकार ने इसे सामान्य वित्तीय प्रक्रिया बताया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध की बढ़ती लागत, घटती आय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच मॉस्को अपने रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल कर आर्थिक दबाव कम करने की कोशिश कर रहा है।