Sangrand August 2026 Date: अगस्त 2026 में संग्रांद कब है, जानें भादो संग्रांद की तारीख और इसका धार्मिक महत्व
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अगस्त 2026 में संग्रांद कब है, जानें नानकशाही कैलेंडर में कौन सा माह होगा आरंभ
Bhado Sangrand August 2026 Date: पंजाबी और सिख समुदाय में हर नए महीने की शुरुआत को खास माना जाता है। इसे संग्रांद कहा जाता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि साल 2026 में भादो संग्रांद कब है, तो बता दें कि यह 17 अगस्त 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। नानकशाही कैलेंडर के अनुसार इस दिन 1 भादो, संवत 558 होगा। इसी तारीख से नानकशाही कैलेंडर में भादो का नया महीना शुरू हो जाएगा।
भादो संग्रांद 2026 कब है
| जरूरी जानकारी | विवरण |
|---|---|
| अवसर | भादो संग्रांद |
| अंग्रेजी तारीख | 17 अगस्त 2026 |
| दिन | सोमवार |
| नानकशाही तिथि | 1 भादो 558 |
सीधे शब्दों में समझें तो संग्रांद नानकशाही कैलेंडर के नए महीने का पहला दिन होता है। इसलिए 17 अगस्त को सावन का महीना पूरा होगा और भादो की शुरुआत हो जाएगी। यह समय केवल कैलेंडर का पन्ना बदलने का नहीं, बल्कि बीते दिनों के बारे में सोचने और आने वाले महीने के लिए अच्छी शुरुआत करने का अवसर भी माना जाता है।
सिंह संक्रांति 2026 के दिन आएगी भादो संग्रांद
संग्रांद को हिंदू पंचांग में संक्रांति से जोड़ा जाता है। यानी जब सूर्य अपनी राशि बदलते हैं, उसी दिन संक्रांति मनाई जाती है। ग्रहों के राजा सूर्य जिस भी दिन अपनी राशि सिंह में गोचर करते हैं, उसी तारीख पर सिंह संक्रांति मनाई जाती है। यही सिंह संक्रांति नानकशाही कैलेंडर में भादो संग्रांद मानी जाती है। इस बार 17 अगस्त 2026, वार सोमवार को सिंह संक्रांति मनाई जाएगी।
भादो संग्रांद का क्या महत्व है
सिख परंपरा में संग्रांद का आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन श्रद्धालु गुरुद्वारे जाकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सामने मत्था टेकते हैं। कई गुरुद्वारों में गुरबाणी का पाठ, कीर्तन और अरदास होती है। परिवार की सुख-शांति और सभी की अच्छी सेहत के लिए भी अरदास की जाती है।
संग्रांद हमें यह समझाती है कि मौसम और महीने लगातार बदलते रहते हैं। इसी तरह जीवन में भी परिस्थितियां कभी एक जैसी नहीं रहतीं। ऐसे में इंसान को सुख और दुख दोनों में वाहेगुरु को याद करते हुए सही रास्ते पर चलते रहना चाहिए।
बारहमाहा की बाणी से क्या मिलता है संदेश
संग्रांद के अवसर पर गुरुद्वारों में बारहमाहा की बाणी का पाठ और कीर्तन किया जाता है। बारहमाहा में साल के 12 महीनों के माध्यम से जीव और परमात्मा के संबंध को समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि परमात्मा को पाने के लिए किसी खास मौसम या महीने की जरूरत नहीं होती। सच्ची श्रद्धा, अच्छे कर्म और नाम-सिमरन के माध्यम से हर समय वाहेगुरु से जुड़ा जा सकता है।
भादो संग्रांद के दिन क्या करें
भादो संग्रांद के दिन सुबह स्नान करके गुरबाणी का पाठ और वाहेगुरु का सिमरन किया जा सकता है। समय मिले तो गुरुद्वारे जाकर मत्था टेकें और कीर्तन सुनें। लंगर बनाने, परोसने या बर्तन साफ करने जैसी किसी सेवा में हिस्सा लेना भी इस दिन को सार्थक बना सकता है।
जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन देना या अपनी क्षमता के अनुसार उसकी सहायता करना भी अच्छा माना जाता है। कुल मिलाकर भादो संग्रांद हमें नए महीने की शुरुआत अच्छे विचारों, सेवा और सिमरन के साथ करने का संदेश देती है।
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मेधा चावलाauthor
मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।
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