Sawan Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत में भोलेनाथ के साथ माता पार्वती की पूजा क्यों है जरूरी? जानें महत्व

प्रदोष व्रत का महत्वImage Credit source: pexels
Pradosh Vrat Significance: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे उत्तम साधन माना गया है. विशेषकर जब यह व्रत सावन के पवित्र महीने में पड़े और मंगलवार के दिन हो, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है. भौम प्रदोष का व्रत न केवल कर्ज से मुक्ति दिलाता है, बल्कि व्यक्ति को आरोग्य और शक्ति भी प्रदान करता है. आइए जानते हैं सावन में भौम प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और भोलेनाथ के साथ माता पार्वती की पूजा को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है.
सावन में कब है भौम प्रदोष व्रत 2026?
सावन का दूसरा प्रदोष व्रत इस बार मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को रखा जाएगा. द्रिक पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त को सुबह 6:20 बजे शुरू होगी और 26 अगस्त को सुबह 7:59 बजे समाप्त होगी. प्रदोष व्रत में प्रदोष काल के दौरान त्रयोदशी तिथि का होना विशेष महत्व रखता है. ऐसे में 25 अगस्त की शाम प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि होने के कारण इसी दिन भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा. मंगलवार के दिन पड़ने की वजह से इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है.
प्रदोष व्रत में माता पार्वती की पूजा क्यों जरूरी?
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, लेकिन शिव पूजा के साथ माता पार्वती की आराधना को भी महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक दृष्टि से भगवान शिव और माता पार्वती को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है. इसलिए शिव-पार्वती की एक साथ पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और परिवार में सौहार्द की कामना की जाती है. मान्यता है कि माता पार्वती शक्ति का स्वरूप हैं, जबकि भगवान शिव चेतना और कल्याण के प्रतीक माने जाते हैं. दोनों की संयुक्त पूजा जीवन में शक्ति, संतुलन और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है. यही वजह है कि प्रदोष काल में भगवान शिव के साथ माता पार्वती का ध्यान और पूजन करने की परंपरा रही है.
शिव-पार्वती की पूजा से क्या मिलता है लाभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख और आपसी प्रेम बढ़ने की कामना की जाती है. जिन लोगों के विवाह में किसी तरह की बाधा आ रही हो, वे भी इस दिन श्रद्धापूर्वक शिव-पार्वती की पूजा करते हैं. माना जाता है कि भगवान शिव की आराधना से मन को शांति मिलती है और माता पार्वती की पूजा से परिवार में सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है. संतान, दांपत्य सुख और पारिवारिक खुशहाली की इच्छा रखने वाले भक्त भी इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करते हैं.
भौम प्रदोष पर कैसे करें शिव-पार्वती की पूजा?
प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय स्नान करके पूजा स्थल की सफाई करें. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. भगवान शिव का जल और दूध से अभिषेक किया जा सकता है. इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें. माता पार्वती को लाल या सुहाग से जुड़ी पूजा सामग्री अर्पित करना शुभ माना जाता है. इसके बाद शिव-पार्वती को धूप और दीप दिखाकर विधि-विधान से पूजा करें. भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और आखिर में आरती करके परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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