नए मामलों पर लागू नहीं होगी उद्योग की पुरानी परिभाषा, SC के फैसले से लाखों कर्मचारियों पर असर
Aug 21, 2026 05:12 am ISTहिन्दुस्तान टीम
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उद्योग शब्द की परिभाषा के लिए औद्योगिक संबंध संहिता 2020 को आधार नहीं माना जाएगा। इस फैसले के बाद पुराने श्रम विवाद और नए मामलों को लेकर स्थिति अलग-अलग होगी।

नए मामलों पर नहीं लागू होगी उद्योग की पुरानी परिभाषा- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के नौ जज की संविधान पीठ ने कहा है कि 1978 का वह फैसला जिसमें ‘उद्योग’ शब्द की जो व्यापक और श्रमिक हितैषी परिभाषा दी गई थी, उसे औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की व्याख्या के लिए आधार नहीं माना जाएगा।
संविधान पीठ ने 6:3 के बहुमत से पारित इस महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि ‘उद्योग’ की परिभाषा पर सात जजों की पीठ के 1978 के फैसले पर पुनर्विचार की मांग करने वाला संदर्भ सही था। संविधान पीठ के इस फैसले के बाद पुराने श्रम विवाद और नए मामलों के लिए अब अलग-अलग स्थिति होगी।
लागू रहेगा ट्रिपल टेस्ट
पुराने श्रम कानून यानी औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत पुराने कानून के तहत पहले से चल रहे मामलों में 1978 में तय ‘ट्रिपल टेस्ट’ लागू रहेगा। जबकि 2020 के औद्योगिक संबंध संहिता के तहत दाखिल नए श्रम विवाद से जुड़े मामलों में उस कानून और मामले की परिस्थितियों के आधार पर फैसला होगा। बेंगलुरु वाटर स्पलाई और सीवरेज बोर्ड के मामले में 21 फरवरी 1978 को सात जजों की संविधान पीठ ने ‘उद्योग’ शब्द की व्यापक परिभाषा देते हुए इसके दायरे को विस्तार दिया था। उस फैसले से अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, क्लबों और सरकारी कल्याण विभागों में काम करने वाले लाखों कर्मचारी औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत सुरक्षा के दायरे में आ गए थे।
सीजेआई सूर्यकांत जिन्होंने खुद के साथ-साथ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, आलोक अराधे और विपुल एम पंचोली की ओर से बहुमत का फैसला लिखा, उन्होंने स्पष्ट किया कि 1978 के फैसले में तय किया गया ट्रिपल टेस्ट से पता चलता है कि क्या चीज ‘उद्योग’ है- मान्य रहेगा। उन्होंने साफ किया कि ट्रिपल टेस्ट उन लंबित श्रम-संबंधी मामलों में लागू होगा जो अब रद्द हो चुके 1947 के औद्योगिक विवाद कानून के तहत दर्ज किए गए थे। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्य बागची ने अलग-अलग लिखे फैसले में सीजेआई के बहुमत वाले फैसले से सहमति जाहिर की। जस्टिस बीवी नागरत्ना, दीपांकर दत्ता और उज्ज्वल भुइयां ने अलग-अलग लिखे अपने फैसले में बहुमत के फैसले से असहमति जाहिर की।
क्या था 1978 का फैसला
1978 में सात जजों की संविधान पीठ के सर्वसम्मति से पारित फैसले में जस्टिस वीआर कृष्ण अय्यर द्वारा तैयार किया गया ‘ट्रिपल टेस्ट’ मोटे तौर पर यह कहता है कि कोई भी व्यवस्थित गतिविधि जिसमें सामान और सेवाओं के उत्पादन या वितरण के लिए नियोक्ता-कर्मचारी का सहयोग शामिल हो, उसे ‘उद्योग’ माना जाएगा। कई तरह के क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
कैसे पड़ेगा फैसले का असर
इस फैसले का असर लाखों कर्मचारियों पर पड़ने वाला है। सरकारी विभागों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में काम करने वाले लोगों पर इसका असर पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य में बनने वाले श्रम कानूनों और कर्मचारियों के अधिकारियों को लेकर नई दिशा तय करेगा।
