संजय निषाद बोले- विधानसभा चुनाव में मुझे सीट नहीं चाहिए: सरकार चाहे तो मेरा मंत्रालय छीन ले; बस निषादों को SC आरक्षण दे - Uttar Pradesh News
योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने निषाद समाज के SC में आरक्षण पर आर-पार का रुख अपनाया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर निषाद समाज को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा मिल जाता है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी भा
.
संजय निषाद का दावा है कि केवट, मल्लाह, मांझी और मझवार जातियां पहले से SC सूची में दर्ज हैं। लेकिन, यूपी में उन्हें OBC में रखकर उनका हक मारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग नई नहीं है, बल्कि संविधान में दिए अधिकार को लागू कराने की लड़ाई है। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…
आपने कहा था कि आरक्षण नहीं मिला तो मंत्री पद छोड़ देंगे, अगला कदम क्या होगा?
संजय- सरकार को लगता है कि मंत्री पद देकर हमें शांत करा दिया है, तो वह गलत है। सरकार चाहे, तो आरक्षण के बदले मेरा मंत्रालय वापस ले ले। हमारी मांग है कि OBC के 9% कोटे से हमारा नाम हटाकर 9% SC कोटे में जोड़ा जाए और ‘मझवार’ प्रमाण पत्र जारी किया जाए। अगर ऐसा होता है, तो निषाद पार्टी 2027 में भाजपा से एक भी सीट नहीं मांगेगी। हम पूरे प्रदेश में भाजपा के लिए प्रचार करेंगे।
निषाद समाज को SC आरक्षण नहीं मिला, तब क्या करेंगे?
संजय- लोकतंत्र में बंदूक की नहीं, बटन और बोली की ताकत होती है। पहले मैं अकेला था, अब सदन में हमारे साथ 200 विधायक बोलते हैं। हम मुख्यमंत्री योगी और भाजपा नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे। हमारा लक्ष्य अपना संवैधानिक हिस्सा हासिल करना है।

11 साल से केंद्र और राज्य में NDA की सरकार है, फिर पेंच फंसा कहां है?
संजय- यह सवाल भाजपा से पूछना चाहिए। महिलाओं को 33% और अपर कास्ट यानी EWS को 10% आरक्षण दे दिया गया। जज वही (मोदी-योगी) हैं। मैं तो पैरोकार हूं और मुद्दा उठाता रहूंगा। मुझे मोदी-योगी से ही उम्मीद है।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आते ही आपको आरक्षण याद आता है?
संजय- आरोप लगाने वाले खुद लुटेरे हैं। 30 साल तक बसपा और सपा ने हमें सिर्फ उलझाकर रखा। जब हमारा समाज पहले से अनुसूचित जाति की सूची में दर्ज था, तो हमें गैर-संवैधानिक तरीके से OBC में डालना ही सबसे बड़ा धोखा था। सपा दिल्ली में मुसलमानों के आरक्षण की मांग तो उठाती है, लेकिन मछुआरा समाज की बात करने में उसे कष्ट होता है।
मैं समाज का वकील हूं और लोकतंत्र में वकालत की जगह सदन है। 70 साल के इतिहास में पहली बार निषाद पार्टी विधानसभा और विधान परिषद तक पहुंची है। अगर निषाद समाज को अपना हक मिल गया, तो साइकिल, हाथी और पंजे का खेल हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
मुकेश सहनी के यूपी चुनाव में उतरने से कितना नुकसान होगा?
संजय- दल और दलाल में अंतर होता है। दलाल का काम केवल दाल-रोटी से चलता है। जबकि दलील और अपील वही कर सकता है, जिसके पास शिक्षा और सोच हो। हमारे समाज की गरीबी का फायदा उठाकर कुछ लोग 100, 500 या 2000 रुपए देकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। समाज को पूछना चाहिए कि यह पैसा कहां से आ रहा है? कौन सी पार्टियां इन्हें पीछे से चला रही हैं?

संजय निषाद ने कहा कि कांग्रेस, सपा और बसपा ने हमारे समाज के साथ छल किया।
आप अपने समाज को राष्ट्रवादी क्यों बताते हैं?
संजय- हां, यह सच है। निषाद समाज की जातियां अंग्रेजों और मुगलों से लड़ीं और उजड़ती चली गईं। अंग्रेजों ने अपने साथ देने वाली जातियों के नाम पर रेजिमेंट बनाईं और उन्हें इनाम दिया। जो अंग्रेजों के पक्ष में लड़े, उन्हें इनाम मिला। जो देश के लिए लड़े, वे रोड पर भीख मांग रहे हैं।
आरोप लगता है कि आप सिर्फ अपने बेटों को राजनीति में आगे बढ़ा रहे?
संजय- यह आरोप पूरी तरह गलत है। पीयूष रंजन और विनोद बिंद मेरे बेटे नहीं हैं। भदोही से विनोद बिंद को निषाद पार्टी के कोटे से हमने चंदा जुटाकर सांसद बनवाया, जिससे सदन में हमारे समाज की आवाज पहुंचे। हमारे संगठन से मिठाई लाल, रवि मणि और जनकनंदनी तीन आयोगों के सदस्य हैं। कमलेश कुमारी और चंदन निषाद समेत कई कार्यकर्ता अलग-अलग पदों पर हैं। 18 कार्यकर्ता नगर निकायों में सभासद हैं।
समाजवादी पार्टी के एक ही परिवार में 56 नेता हैं, तो कोई सवाल नहीं उठाता। लेकिन, निषाद का बेटा सांसद-विधायक बन जाए तो बवाल मच जाता है। मेरे बेटे पढ़े-लिखे हैं, एक इंजीनियर है। वह 2013 में नौकरी छोड़कर समाज सेवा के लिए राजनीति में आए।

अगर निषाद पार्टी बड़ी हो गई है, तो भाजपा ने उपचुनाव में 2 सीटें वापस क्यों ले लीं?
संजय- हम फिर से सीटें ले लेंगे। हमने 2022 में भाजपा से 16 सीटें ली थीं। भाजपा ने जब कहा कि माहौल चुनौतीपूर्ण है और 2024 के लोकसभा चुनाव में हम 43 सीटें हार गए, तो हमने समझा। क्योंकि, हम मित्र हैं। मित्र का मतलब ही यही है कि जहां गठबंधन कमजोर हो, वहां एक-दूसरे की मदद की जाए।
आप 11 साल से निषादों को SC में शामिल करने की मांग कर रहे। कब पूरी होगी?
संजय- यह कोई नई मांग नहीं है, बल्कि संविधान में दिया गया हमारा अधिकार है। संविधान में 53 नंबर पर ‘मझवार’ और 66 नंबर पर ‘मांझी’ दर्ज हैं। राष्ट्रपति के नोटिफिकेशन में केवट, मल्लाह, मांझी और मझवार को अनुसूचित जाति में दर्ज किया गया है। इन्हें OBC में रखना पूरी तरह गैर-संवैधानिक है।
क्या सबूत है कि निषाद समाज SC सूची में दर्ज है?
संजय- इसके पुख्ता प्रमाण हैं। RGI (रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया) ने जनवरी- 2022 में माना था कि ये जातियां SC सूची में हैं। 2016 में राज्यपाल ने भी स्पष्ट किया था कि ये जातियां OBC में नहीं रहेंगी। असलियत यह है कि आज OBC का बड़ा हिस्सा मिल्कमैन (यादव) और SC का बड़ा हिस्सा लेदरमैन (दलित) खा रहे हैं। हमारी लड़ाई बस अपना छीना हुआ हक वापस लेने की है।

संजय निषाद बोले- हमें बेईमानी का नहीं, संविधान में दिया हुआ अपना हक चाहिए।
क्या भाजपा ने निषाद समाज को SC में शामिल करने का वादा किया था?
संजय- भाजपा ने इसे अपने ‘मछुआ विजन’ और संकल्प पत्र में शामिल किया था। सीएम योगी ने भी सदन में माना था कि निषाद समाज SC का हकदार है। मैं इसी वादे के पूरा होने का इंतजार कर रहा हूं।
1871 में अंग्रेजों ने 193 जातियों को ‘क्रिमिनल कास्ट’ घोषित किया था। आजादी के बाद भी उन्हें नजरअंदाज किया गया। लोग आज ‘जेन-जी’ की बात करते हैं। हम ‘डेल्टा’ यानी बेलचा उठाने वाले और बेघर समाज की बात करते हैं। अब हमारा समाज पढ़-लिख रहा है।
2024 में सपा कई निषाद बहुल सीटें जीत गई, कैसे?
संजय- आरक्षण संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर विपक्ष ने लोगों को गुमराह किया। भाजपा को इस मामले को सुलझाना चाहिए। 70 साल में किसी ने प्रमाणिक दस्तावेज सामने नहीं रखे। असली पेंच यही है कि जिन दलालों की दाल-रोटी इस व्यवस्था से चलती है, वे समाज और भाजपा को गुमराह करते हैं। सपा-बसपा हक छीनने वाली पार्टियां हैं, जबकि भाजपा कम से कम अधिकार देने की पहल कर रही है।
अखिलेश ने NDA में निषाद पार्टी को 31 सीटें मिलने का जिक्र किया है?
संजय- किसी के लिख देने से कुछ नहीं होता। सपा प्रमुख ने गलत लिखा है। अगर प्रदेश में 18% निषाद आबादी है, तो उन्हें 72 सीटें लिखनी चाहिए थीं। अपने कार्यकाल में वे हमारे समाज को एक भी सीट नहीं दे पाए। 2018 के उपचुनाव में निषाद पार्टी ने साथ दिया तो गोरखपुर, फूलपुर जैसी सीटों पर उन्हें जीत मिली। 2019 में सपा-बसपा एक हुए, तब भी हमारे बगैर वे कुछ नहीं कर पाए।
2027 में NDA की कितनी सीटें आएंगी?
संजय- NDA की जीत होगी। निषाद ही जितवाएगा। हाथी-साइकिल का बटन दबाने से हमारी हिस्सेदारी चली गई। सपा-बसपा यूपी की 28 लाख नौकरियां खा गए। सामाजिक न्याय समिति के अनुसार, 14 लाख में 99.99% यादव और 7 लाख SC में 6.5 लाख दलितों के पास नौकरी है। अगर औसत 2 लाख रुपए मानें तो यादव और दलित परिवारों में हर साल 28 अरब रुपए पहुंच रहे हैं। हम डेल्टा वालों यानी निषाद समाज का हिस्सा कहां है?

--------------------------
यह खबर भी पढ़ें-
'अखिलेश कभी यूपी के मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे', केशव बोले- विधायकों के टिकट कटेंगे, लेकिन ये प्रदेश भाजपा तय नहीं करेगी

यूपी चुनाव से पहले PDA फैक्टर पर केशव प्रसाद मौर्य ने सवाल उठाया है। कहा- अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। 5 साल बहुमत की सरकार थी। तब उन्होंने पिछड़ों-दलितों के लिए क्या किया? सपा का PDA फर्जी है। सपा-कांग्रेस तो जेन-जी विरोधी पार्टियां हैं। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…