SC on Vande Mataram: क्या वंदे मातरम् न गाना दंडनीय अपराध है? दायर PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब - Haribhoomi

कर्नाटक संगीत के प्रसिद्ध गायक टी.एम. कृष्णा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में वंदे मातरम् को गाना अनिवार्य बनाने और इसे न गाने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में लाने वाले प्रावधानों को चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही है।

Supreme Court

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  • Published: 22 Sep 2026, 02:14 PM IST
  • Last Updated: 22 Sep 2026, 02:43 PM IST

देश के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को लेकर दायर एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। कर्नाटक संगीत के प्रख्यात गायक टी.एम. कृष्णा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम' के तहत किए गए उन संशोधनों और गृह मंत्रालय के निर्देशों को चुनौती दी है, जो राष्ट्रगीत न गाने पर कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान करते हैं। कोर्ट ने याचिका पर विचार करते हुए केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।  

​सुप्रीम कोर्ट का रुख और सुनवाई के मुख्य बिंदु 
​मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि कोर्ट इस बात पर विचार नहीं करेगा कि राष्ट्रीय गीत को केवल दो स्टैंजा (छंद) तक सीमित रखा जाए या इसे छह स्टैंजा तक बढ़ाया जाए। हालांकि, शीर्ष अदालत इस संवैधानिक बिंदु की कानूनी समीक्षा करने के लिए सहमत हो गई है कि क्या 'वंदे मातरम्' न गाने को दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है।  

​'बिजोइ इमैनुएल' मामले के ऐतिहासिक फैसले का हवाला 
​सुनवाई के दौरान पीठ ने ऐतिहासिक 'बिजोइ इमैनुएल (Bijoe Emmanuel)' मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को रेखांकित किया। पीठ ने कहा कि उस फैसले में तय किया गया कानूनी सिद्धांत आज भी प्रभावी है, जिसके अनुसार अपनी धार्मिक या व्यक्तिगत आस्था के कारण राष्ट्रगान न गाने के लिए किसी व्यक्ति को आपराधिक रूप से दंडित नहीं किया जा सकता है।  

​याचिकाकर्ता टी.एम. कृष्णा के तर्क
याचिकाकर्ता टी.एम. कृष्णा ने याचिका में तर्क दिया है कि राष्ट्रगीत के सभी छह छंदों को गाना अनिवार्य करना और न गाने पर दंड का प्रावधान करना नागरिकों के मौलिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि 'वंदे मातरम्' के अंतिम चार छंदों में स्पष्ट रूप से हिंदू देवी-देवताओं के प्रति भाव व्यक्त किए गए हैं, ऐसे में इसे अनिवार्य बनाना देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप का उल्लंघन करता है।  

​सॉलिसिटर जनरल ने किया कड़ा विरोध 
​केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका में उठाए गए तर्कों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने पीठ के समक्ष कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पूरे देश को एक सूत्र में बांधने वाले राष्ट्रीय गीत पर इस तरह के सवाल उठाना उचित नहीं है।  

​आगे क्या होगा? 
सुप्रीम कोर्ट ने इस चरण में केंद्र सरकार को कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया है, लेकिन याचिका पर दो सप्ताह के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि कानून के तहत दंड के इन प्रावधानों की जांच संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मिलने वाले मौलिक अधिकारों के संदर्भ में की जाएगी।