SC-ST कोटे में सब-कैटेगरी पर संग्राम, चिराग ने घेरा तो मांझी ने भी दिखाए तेवर
पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार के दो कैबिनेट मंत्री – चिराग पासवान और जीतन राम मांझी – शनिवार को आरक्षण के मुद्दे पर भिड़ गए और एक-दूसरे से इस्तीफा मांगा. यह विवाद तब शुरू हुआ जब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे, संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण व्यवस्था में अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के सब-कैटेगरी बनाने का समर्थन करते हुए कोटा पॉलिसी की समीक्षा की मांग की.
सुमन ने कहा था, “मुझे लगता है कि आरक्षण का मकसद पूरा नहीं हुआ है. 22 दलित जाति ग्रुप में से 18 को मिलाकर महादलित कैटेगरी बनाने का कॉन्सेप्ट बेनिफिशियरी के बीच बड़े गैप की वजह से फेल हो गया है. एक्सट्रीमली बैकवर्ड क्लासेस (EBC) कैटेगरी दूसरी पिछड़ी जातियों (OBCs) से बनाई गई थी, और यही बात ऊंची जातियों में इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन (EWS) के कॉन्सेप्ट के लिए भी सच थी.”
उन्होंने कहा कि यह पूछना गलत नहीं है कि आखिर आरक्षण का लाभ किन तबकों को मिला और कितना मिला, जबकि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोग इससे अब भी कितने दूर हैं. बिहार की करीब 4 प्रतिशत आबादी वाले मुसहर समुदाय से अब तक कोई DM या SP क्यों नहीं बना? ऐसे सवालों के जवाब के लिए तुलनात्मक अध्ययन जरूरी है. उन्होंने सवाल उठाया कि आरक्षण का लाभ पाने वाले एक तबके को 8 प्रतिशत और दूसरे को 80 प्रतिशत तक फायदा क्यों मिले?
आरक्षण के सवाल पर NDA में फूट
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के इस रुख पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर जीतन राम मांझी और उनके बेटे एससी आरक्षण में सब-कोटा और क्रीमी लेयर लागू करने की मांग कर रहे हैं, तो उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए. चिराग ने कहा कि अगर उन्हें लगता है कि क्रीमी लेयर का प्रावधान होना चाहिए, तो उन्हें खुद आरक्षण का लाभ लेना बंद कर देना चाहिए.
संविधान में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण केवल अवसर का प्रावधान नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के विरुद्ध सामाजिक न्याय का सुरक्षा कवच है।
ऐसे में SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर या उप-वर्गीकरण (Sub-classification) की pic.twitter.com/TixE8YE6VY
— Office Of Chirag Paswan (@officeofchirag) August 29, 2026
चिराग ने कहा कि अगर मांझी इस व्यवस्था को लागू करने के पक्ष में हैं, तो उन्हें और उनके बेटे को इस्तीफा देकर इसकी शुरुआत करनी चाहिए, क्योंकि वे भी इसी श्रेणी में आते हैं. उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण का आधार सामाजिक परिस्थितियां हैं. इसे आर्थिक नजरिए से देखना संविधान की भावना के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि इसका मूल आधार सामाजिक भेदभाव और खास तौर पर समाज में छुआछूत का मुद्दा है.
चिराग और मांझी आमने-सामने
इसके बाद केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान पर पलटवार किया. उन्होंने आरोप लगाया कि चिराग गरीबों के हितों की परवाह नहीं करते. मांझी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में गरीब लोग आरक्षण के लाभ से वंचित रह जाएंगे. उन्होंने दावा किया कि आरक्षण में बंटवारे की व्यवस्था व्यापक जनहित में जरूरी है.
#WATCH | Gaya Ji, Bihar: On Union Minister Chirag Paswan’s statement, Union Minister Jitan Ram Manjhi says, “… People will end up being deprived of the benefits of reservation because of this stance. However, we maintain that this division is essential in the broader public https://t.co/Xo74JQihdY pic.twitter.com/zazhhne27T
— ANI (@ANI) August 29, 2026
मांझी ने कहा कि अगर चिराग गरीब लोगों के हितों का ध्यान नहीं रखना चाहते, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. SC-ST कोटा विवाद यह विवाद 2024 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से शुरू हुआ है, जिसमें राज्यों को अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) को सब-क्लासिफाई करने की अनुमति दी गई थी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आरक्षण का लाभ इन श्रेणियों के भीतर अधिक पिछड़े समूहों तक पहुंचे.
इसने सरकारों से SC और ST के बीच ‘क्रीमी लेयर’ को आरक्षण का लाभ उठाने से रोकने के लिए उपयुक्त मानदंड बनाने के लिए भी कहा. हालांकि, केंद्र ने एक हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को बताया कि क्रीमी लेयर सिद्धांत को SC और ST तक नहीं बढ़ाया जा सकता है. इसने कहा कि यह सिद्धांत वर्तमान में केवल अन्य पिछड़े वर्गों (OBCs) पर लागू होता है. यह कहीं भी विशेष रूप से नहीं माना गया है कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत SC और STs पर लागू होता है. क्रीमी लेयर की अवधारणा का संदर्भ… OBCs (अन्य पिछड़े वर्ग) / SEBCs (सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग) के संबंध में आरक्षण के संबंध में सामान्य अवलोकन प्रतीत होता है.
ये भी पढ़ें- जो ताकतवर नहीं होते हैं, वही ताकत होने का दिखावा करते हैं, जीतन राम मांझी का चिराग पर निशाना

अजय विद्यार्थी
कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रैजुएशन. प्रभात खबर में बतौर सीनियर न्यूज़ एडिटर काम किया. ग्राउंड रिपोर्टिंग और एडिटिंग में करीब 20 सालों से ज्यादा का अनुभव. राजस्थान पत्रिका में चीफ रिपोर्टर रहने के दौरान कई ऐसी स्टोरी की, जिन्हें सराहा गया.
Read More