SC/ST Relief Fund Misuse Probe: एससी/एसटी एक्ट राहत राशि के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट सख्त; पूरे यूपी में जांच के आदेश - Haribhoomi
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत पीड़ितों को दी जाने वाली आर्थिक राहत राशि के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर सरकारी फंड हड़पने की आशंका को देखते हुए पूरे उत्तर प्रदेश में निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं, ताकि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पीड़ितों तक पहुंच सके।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला (फाइल फोटो)
- Published: 07 Sep 2026, 02:06 PM IST
- Last Updated: 07 Sep 2026, 02:06 PM IST
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) नियम के तहत पीड़ितों के पुनर्वास के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता के संभावित दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने झांसी से जुड़ी आपराधिक अपीलों पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकारी खजाने से अनुचित लाभ लेने के लिए इस जनहितकारी योजना का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने पूरे राज्य में इसकी निगरानी और समीक्षा का आदेश दिया है।
एक ही परिवार को बांटे गए 23.36 लाख रुपये, कोर्ट ने जताई हैरानी
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि झांसी के संतोष कुमार धोहरे और उसके परिवार को विभिन्न आपराधिक मामलों में पीड़ित बताकर अब तक 23.36 लाख रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है। इसके अलावा 10 से 12 अन्य मामले भी जिला स्तरीय समिति के समक्ष लंबित हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे योजना के दुरुपयोग की बड़ी आशंका माना।
झांसी डीएम और एसएसपी को निष्पक्ष जांच के आदेश
हाईकोर्ट ने झांसी के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले और अब तक वितरित की गई राहत राशि की तीन महीने के भीतर निष्पक्ष जांच कराएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई फर्जीवाड़ा या गड़बड़ी पाई जाती है, तो फर्जीवाड़ा करने वाले व्यक्तियों के साथ-साथ दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
'वास्तविक पीड़ितों का हक न मरे', विशेष अदालतों को सतर्क रहने की सलाह
अदालत ने कहा कि एससी/एसटी एक्ट के तहत आर्थिक सहायता का प्रावधान पीड़ित व्यक्तियों के पुनर्वास और न्याय के लिए है। राज्य के सभी जिलों में स्थित विशेष न्यायाधीशों (एससी/एसटी एक्ट) और प्रशासनिक अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि वे बार-बार एक ही तरह के मामले दर्ज कराकर फंड हड़पने वाले तत्वों पर पैनी नजर रखें, ताकि वास्तविक पीड़ितों का अधिकार सुरक्षित रहे और किसी पात्र व्यक्ति का दावा प्रभावित न हो।
सभी जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को भेजी गई फैसले की प्रति
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया है कि इस आदेश की प्रति 10 दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिलाधिकारी, एसएसपी/एसपी, पुलिस आयुक्त, मुख्य सचिव, गृह सचिव और कानून/न्याय विभाग के प्रमुख सचिव को भेजी जाए, ताकि पूरे प्रदेश में इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।