खाद माफियाओं और कृषि अफसरों में गजब की सेटिंग..भ्रष्टाचार रूपी गंगोत्री में जमकर डुबकी लगाया ! SDO-SDPO ने किया बेनकाब....मोतिहारी के एक और बड़े माफिया पर दर्ज हुआ केस
Bihar News: मोतिहारी में खाद की कालाबाजारी को लेकर बड़ी कार्रवाई ने कृषि विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला मुख्यालय में खाद कारोबारियों के गोदामों की जांच के दौरान ऐसी गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिन्हें देखकर जांच टीम भी हैरान रह गई। जिला कृषि कार्यालय को खाद माफियागिरी की यह जानकारी तब लगी,जब सदर एसडीओ ने ताबड़तोड़ छापेमारी की. अगर छापेमारी नहीं होती,तब कृषि विभाग के अधिकारी आंख मूंदकर सोये रहते, या फिर भ्रष्टाचार रूपी गंगोत्री में डुबकी लगाते रहते .
मोतिहारी के सदर एसडीओ-एसडीपीओ की रेड में कहीं सील गोदाम से 700 बोरी खाद गायब मिली, तो उसी गोदाम में दूसरी कंपनी की 250 बोरी यूरिया बरामद हुई। कहीं एक साल पहले लाइसेंस खत्म हो चुके कारोबारी के गोदाम से हजारों बोरी उर्वरक मिला। तो कहीं लाइसेंस में दर्ज जगह से करीब 5 किलोमीटर दूर गोदाम चलाकर खाद के कारोबार का मामला सामने आया।इतना ही नहीं, दो गोदाम के लाइसेंस पर तीन-तीन गोदाम संचालित किए जाने का मामला भी जांच में सामने आया है।
मोतिहारी में खाद की कालाबाजारी के खिलाफ सदर एसडीओ अरुण कुमार और सदर डीएसपी दिलीप सिंह के नेतृत्व में महज 10 दिनों के भीतर चार बड़ी कार्रवाई की गई है। इन कार्रवाइयों में सामने आई अनियमितताओं ने कृषि विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
तरुण खाद बीज भंडार पर FIR
इसी कड़ी में अब जिला मुख्यालय स्थित तरुण खाद बीज भंडार के संचालक तापस कर्मकार के खिलाफ बंजरिया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। सदर एसडीओ अरुण कुमार के निर्देश पर तरुण खाद बीज भंडार के तीन गोदामों की जांच कराई गई। खाद की भारी मात्रा और कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए मजिस्ट्रेट और अनुमंडल कृषि पदाधिकारी की मौजूदगी में वीडियोग्राफी के साथ जांच शुरू हुई। जांच इतनी बड़ी थी कि तीन दिनों तक लगातार गोदामों में रखे उर्वरक की गिनती और दस्तावेजों का मिलान किया गया।
जांच में सामने आया कि तरुण खाद बीज भंडार के प्रोपराइटर तापस कर्मकार के लाइसेंस में केवल दो गोदाम दर्ज हैं। लेकिन जांच के दौरान तीन अलग-अलग गोदामों में उर्वरक का स्टॉक पाया गया।यानी सवाल सीधा है—जब लाइसेंस में दो गोदाम दर्ज थे, तो तीसरे गोदाम में खाद का इतना बड़ा स्टॉक कैसे पहुंचा?
जांच में एक और गंभीर गड़बड़ी सामने आई। तापस कर्मकार को BVFCL, Matrix और HURL जैसी कंपनियों के उर्वरक बेचने का लाइसेंस निर्गत बताया गया है। लेकिन जांच के दौरान गोदामों से IFFCO, IPL, PPL समेत करीब एक दर्जन कंपनियों के हजारों बैग उर्वरक बरामद किए गए। अब जांच का बड़ा सवाल यही है कि जिन कंपनियों के उर्वरक की बिक्री के लिए लाइसेंस नहीं था, उनका इतना बड़ा स्टॉक गोदाम तक कैसे पहुंचा.
जांच टीम को स्टॉक पंजी और बिक्री पंजी भी उपलब्ध नहीं कराई गई। खाद जैसे नियंत्रित और संवेदनशील कृषि इनपुट के कारोबार में स्टॉक और बिक्री का हिसाब नहीं मिलना मामले को और गंभीर बनाता है। इसी आधार पर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी की ओर से तरुण खाद बीज भंडार के प्रोपराइटर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
10 दिन में चार बड़ी कार्रवाई
मोतिहारी में पिछले 10 दिनों के दौरान खाद की कालाबाजारी और अनियमितता के खिलाफ हुई चार बड़ी कार्रवाइयों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सील गोदाम से खाद गायब होने से लेकर बिना वैध लाइसेंस के कारोबार, लाइसेंस में दर्ज स्थान से बाहर गोदाम संचालन और लाइसेंस से अधिक गोदाम चलाने तक—एक के बाद एक मामले सामने आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि अगर खाद कारोबारियों के गोदामों में इतनी बड़ी अनियमितताएं चल रही थीं, तो कृषि विभाग की नियमित जांच और निगरानी व्यवस्था आखिर कहां थी?
सदर एसडीओ के निर्देश पर हुई कार्रवाई के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्राथमिकी के बाद जांच कहां तक पहुंचती है और खाद कालाबाजारी के इस नेटवर्क में सिर्फ कारोबारी पर कार्रवाई होती है या फिर जिम्मेदारी तय कर विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की जाती है।