आईआईएम को ठुकराकर चुनी सेना की वर्दी, जानिए पैरा SF कर्नल अनुराग उपाध्याय की अनोखी जंग

Sep 09, 2026 07:45 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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CAT परीक्षा में 99 पर्सेंटाइल हासिल कर IIM का मौका छोड़ने वाले पैरा SF कर्नल अनुराग उपाध्याय ने देश सेवा चुनी। कर्नल अनुराग उपाध्याय स्ट्रोक के बाद लॉक्ड-इन सिंड्रोम से जूझ रहे हैं। उनकी कहानी पढ़ें। 

Colonel Anurag Upadhyay Para SF

कर्नल अनुराग उपाध्याय, पैरा SF  (X Account-@MajorPoonia)

Colonel Anurag Upadhyay Story: सफलता की जब भी बात होती है, तो अक्सर लोग बड़े कॉर्पोरेट पैकेज और आरामदायक जिंदगी की कल्पना करते हैं। लेकिन हमारे देश में कुछ ऐसे विरले वीर भी होते हैं, जिनके लिए देश प्रेम और वर्दी का सम्मान किसी भी बड़े पैकेज से ऊपर होता है। ऐसी ही एक बेहद प्रेरणादायक और दिल छू लेने वाली कहानी है भारतीय सेना के पैरा SF के रिटायर्ड कर्नल अनुराग उपाध्याय की। कर्नल अनुराग उपाध्याय की कहानी आज हर भारतीय का दिल छू रही है। एक गंभीर मेडिकल स्थिति स्ट्रोक के बाद वे दुर्लभ लॉक्ड-इन सिंड्रोम से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद, उनका दिमाग पूरी तरह एक्टिव है।

लाखों-करोड़ों का कॉरपोरेट करियर छोड़ चुनी थी भारतीय सेना

कर्नल अनुराग उपाध्याय ने अपनी युवावस्था में देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक CAT परीक्षा में 99 पर्सेंटाइल जैसा शानदार स्कोर हासिल किया था। इस बेहतरीन अंक के साथ देश के टॉप IIM के दरवाजे उनके लिए पूरी तरह खुले थे, जहां से वे लाखों-करोड़ों के पैकेज वाली कॉर्पोरेट नौकरी हासिल कर सकते थे। लेकिन उन्होंने आराम की जिंदगी के बजाय देश की रक्षा के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रास्ता चुना और भारतीय सेना में शामिल हो गए। उन्होंने अपनी मर्जी से पैरा स्पेशल फोर्सेज चुनी और 3 PARA (SF) में कठिन प्रोबेशन पूरा कर 12 PARA (SF) की रेजिंग टीम का हिस्सा बने।

दिल का दौरा पड़ने के बाद भी ड्यूटी पर लौटे

एक पैरा कमांडो के रूप में उन्होंने देश की सीमाओं पर अत्यंत दुर्गम इलाकों, आतंकवाद विरोधी अभियानों और बेहद खतरनाक मिशनों में रहकर सेवा दी। कर्नल अनुराग का जज्बा हमेशा से अद्भुत रहा है। वर्ष 2008 में जब उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, तब भी उन्होंने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर खुद को फिट किया और वापस एक्टिव आर्मी ड्यूटी पर लौट आए।

क्या होता है लॉक्ड-इन सिंड्रोम?

अगस्त 2025 में कर्नल अनुराग को एक गंभीर स्ट्रोक का सामना करना पड़ा। इस वजह से उनके शरीर को गहरा नुकसान पहुंचा और वे लॉक्ड-इन सिंड्रोम से ग्रस्त हो गए। यह एक ऐसी दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें व्यक्ति का पूरा शरीर पैरालाइज्ड हो जाता है और वह बोल या हिल-डुल नहीं पाता, लेकिन उसका दिमाग, सोचने-समझने की शक्ति और याददाश्त पूरी तरह सामान्य और सजग रहती है। बाद में मेडिकल मुश्किलों के कारण उनके दोनों पैर घुटने के नीचे से काटने पड़े।

आंखों के इशारों से कर रहे हैं बातचीत

अभी कर्नल अनुराग अपनी आंखों के इशारों और अक्षर स्कैनिंग सिस्टम के जरिए बात कर रहे हैं। उनकी यह कहानी देश के करोड़ों युवाओं के लिए एक मिसाल है कि सच्चा मार्गदर्शन, देश के प्रति समर्पण और कभी न हार मानने का जज्बा ही इंसान को असली हीरो बनाता है।

लेखक के बारे में

Prachi

शॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।

अनुभव और करियर का सफर
प्राची ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'नन्ही खबर' से की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा। इसके बाद, उन्होंने 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बतौर कंटेंट राइटर काम करते हुए अपनी लेखनी और रिसर्च स्किल्स को निखारा। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद, वे करियर डेस्क पर सक्रिय हैं और छात्रों के लिए करियर विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, जॉब और प्रतियोगी परीक्षाओं की बारीकियों को कवर कर रही हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
प्राची ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया है। उनकी शैक्षणिक नींव दिल्ली यूनिवर्सिटी से है, जहां से उन्होंने इतिहास में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इतिहास की अच्छी जानकारी होने के कारण, वे आज की खबरों को बेहतर तरीके से समझ और समझा पाती हैं। यही वजह है कि उनके लेखों में जानकारी पूरी तरह सटीक और अधिक भरोसेमंद होती है।

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प्राची का मानना है कि करियर चुनना केवल एक नौकरी पाना नहीं, बल्कि सही दिशा में अपना भविष्य सुरक्षित करना है। उनका उद्देश्य है कि हर छात्र और अभ्यर्थी तक बिना किसी भ्रम के, सटीक और सही समय पर जानकारी पहुंचे। वे पारदर्शिता और विश्वसनीयता को डिजिटल पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत मानती हैं।

रुचियां
इतिहास की समझ और पत्रकारिता के जुनून के साथ, प्राची को खाली समय में उपन्यास पढ़ना और विश्व सिनेमा देखना पसंद है, जो उनके लेखन में एक नया दृष्टिकोण जोड़ता है।

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