SGB निवेशकों की मौज: ₹15,334 के भाव पर रिडेम्पशन, क्या अब मुनाफा वसूलने का सही समय है?

SGB निवेशकों की मौज: ₹15,334 के भाव पर रिडेम्पशन, क्या अब मुनाफा वसूलने का सही समय है?

Published: Monday, September 7, 2026, 11:14 [IST]

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2021–22 सीरीज VI के समय से पहले रिडेम्पशन (Premature Redemption) की कीमत ₹15,334 प्रति यूनिट तय कर दी है। इसका पे-आउट आज यानी सोमवार, 7 सितंबर 2026 को किया जा रहा है। यह कीमत IBJA के 999 शुद्धता वाले सोने के पिछले तीन कामकाजी दिनों के सिंपल एवरेज के आधार पर तय की गई है। इस भाव को देखते हुए अब कई निवेशक इस असमंजस में हैं कि वे समय से पहले बॉन्ड बेचकर बाहर निकलें या इसे आगे भी होल्ड रखें।

ध्यान दें कि आज पैसे सिर्फ उन्हीं निवेशकों को मिलेंगे, जिन्होंने तय विंडो के भीतर प्री-मैच्योर रिडेम्पशन का रिक्वेस्ट दर्ज कराया था। RBI के नियमों के मुताबिक, ब्याज की तारीख से कम से कम 10 दिन पहले अपने बैंक या डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (DP) के पास यह आवेदन देना होता है। इसके साथ ही, सालाना 2.50 फीसदी की दर से मिलने वाला छमाही ब्याज भी आज ही खाते में क्रेडिट कर दिया जाएगा। जिन निवेशकों ने रिडेम्पशन के लिए अप्लाई नहीं किया है, उनका बॉन्ड अपने आप जारी रहेगा।

SGB 2021-22 Series VI Redemption Price: Is ₹15,334 the Right Time to Exit or Hold for More Gains?

SGB 2021–22 सीरीज VI: रिडेम्पशन प्राइस और 5 साल में कितना मिला रिटर्न

कैटेगरीइश्यू प्राइस (₹/यूनिट)RBI रिडेम्पशन (₹/यूनिट)मुनाफा
ऑफलाइन सब्सक्रिप्शन4,73215,334≈224%
ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन4,68215,334≈228%

RBI ने जब सीरीज VI लॉन्च की थी, तब इसका इश्यू प्राइस ₹4,732 प्रति ग्राम था। ऑनलाइन आवेदन करने वाले निवेशकों को ₹50 की छूट मिली थी, जिससे उन्हें यह ₹4,682 में पड़ा था। आज इसका RBI रिडेम्पशन भाव ₹15,334 प्रति यूनिट है। खास बात यह है कि इस बंपर मुनाफे में बीते पांच सालों के दौरान हर 6 महीने में मिला 2.50 फीसदी का सालाना ब्याज शामिल नहीं है, यानी कुल रिटर्न इससे भी ज्यादा रहा है।

टैक्स नियमों की बात करें तो गोल्ड बॉन्ड से मिलने वाला ब्याज आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से पूरी तरह टैक्सेबल होता है। वहीं, कैपिटल गेंस (पूंजीगत लाभ) पर टैक्स छूट सिर्फ उन्हीं ओरिजिनल बायर्स को मिलती है, जो इसे पूरे 8 साल की मैच्योरिटी तक होल्ड रखते हैं। अगर आप समय से पहले यानी प्री-मैच्योर एग्जिट करते हैं, तो मौजूदा नियमों के तहत यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) के दायरे में आएगा, जिस पर बिना इंडक्सेशन के आमतौर पर 12.5 फीसदी टैक्स लगता है। अपने मामले और वित्तीय वर्ष के हिसाब से टैक्स की सटीक जानकारी के लिए एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

अगर आप आज का एग्जिट विंडो चूक गए हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस सीरीज से बाहर निकलने के अगले मौके 7 मार्च 2027 और 7 सितंबर 2027 को मिलेंगे, जबकि इसकी फाइनल मैच्योरिटी 7 सितंबर 2029 को होगी। याद रखें कि रिडेम्पशन के लिए ड्यू डेट से कम से कम 10 दिन पहले रिक्वेस्ट सबमिट करनी होती है। पैसे आमतौर पर ड्यू डेट या उसके अगले वर्किंग डे पर क्रेडिट हो जाते हैं। अगर पेमेंट में देरी होती है, तो आप अपने बैंक/DP या सीधे RBI के CMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

Story first published: Monday, September 7, 2026, 11:14 [IST]

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