‘सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए”, चुनाव आयोग ने SIR पर मतभेद की खबरों को किया खारिज
नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश के कई राज्यों में राजनीतिक बहस तेज है। इसी बीच चुनाव आयोग के भीतर SIR की प्रक्रिया को लेकर कथित मतभेद की खबर सामने आने के बाद सियासी घमासान बढ़ गया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर असहमति थी। यह भी दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने लगातार कई बैठकों में प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर आपत्ति जताई।
हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग ने इन खबरों को खारिज कर दिया है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, SIR समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं और आयोग के भीतर किसी तरह का मतभेद नहीं है।
ECI सूत्रों ने बुधवार को कहा कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की मंजूरी से सभी फैसले लिए गए हैं।
ECI सूत्रों के मुताबिक, किसी मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की व्यक्तिगत राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आयोग के फैसलों में मतभेद है। सूत्रों ने कहा कि SIR सहित भारत निर्वाचन आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति रही है।
इससे पहले द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में SIR के अलावा फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, मतदाता संबंधी फैसलों के खिलाफ अपील तथा चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में सवाल उठाया कि उनकी जानकारी या सहमति के बिना फैसले और आदेश कैसे जारी किए गए। इन आपत्तियों की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी दी गई थी।
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जवाबदेही की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग को अपनी मर्जी से चला रहे हैं। पार्टी ने कहा कि सामने आई शिकायतों से यह स्पष्ट होता है कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में केवल ज्ञानेश कुमार की ही चल रही है।
कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर काम करने का आरोप भी लगाया और ‘वोट चोरी’ तथा चुनाव आयोग में राजनीतिक दखलंदाजी से जुड़े अपने पुराने आरोप दोहराए।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी रिपोर्ट को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त अपने सही संवैधानिक कर्तव्यों का पालन नहीं कर पा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने कहा, “इसका सीधा मतलब है कि सभी चुनाव आयुक्त अपने सही कर्तव्यों का पालन नहीं कर पा रहे हैं। अगर किसी स्वतंत्र संस्था के सदस्यों को सही काम करने की आजादी नहीं है या उनकी बात नहीं सुनी जाती है, तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। सत्ता में बैठे लोगों की कठपुतली बनकर लोकतंत्र के साथ धोखा करना एक गंभीर संवैधानिक अपराध है। यह लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश से कम नहीं है।”
इसके अलावा शिवसेना (UBT) के संजय राउत, DMK के टीकेएस एलंगोवन, आम आदमी पार्टी के सौरभ भारद्वाज और CPI(M) के जॉन ब्रिटास समेत कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए।
वहीं, चुनाव आयोग ने अपने सूत्रों के जरिए स्पष्ट किया है कि आयोग के भीतर किसी तरह का संस्थागत मतभेद नहीं है और SIR सहित सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
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