SIR फॉर्म से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन तक, चुनाव आयोग ने निकाला नया रास्ता; लोगों को मिलेगी राहत - sir form to online voter registration election commission build trust take new path for public relief
एसआईआर विवाद के बाद चुनाव आयोग अपनी विश्वसनीयता बहाल करने के लिए अभियान चला रहा है। इसमें ECINET नामक एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल है। ...और पढ़ें
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SIR को लेकर लोगों का भरोसा जीत रहा चुनाव आयोग (AI जेनरेटेड फोटो)
HighLights
चुनाव आयोग एसआईआर विवाद के बाद अपनी छवि सुधार रहा है।
शैक्षणिक संस्थानों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम फिर से शुरू किए गए।
ECINET नामक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर राजीनितक पार्टियों ने कई आरोप लगाए। SIR पर हुए बवाल के कुछ महीनों चुनाव आयोग बेहतर छवि-निर्माण के लिए अभियान चला रहा है।
चुनाव आयोग नई डिजिटल पहल का अनावरण कर रहा है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों को पुनर्जीवित करने का वादा किया गया। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने अपना पहला राष्ट्रव्यापी मीडिया सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें 350 से अधिक पत्रकारों ने भाग लिया।
चुनाव आयोग ने SIR को लेकर शुरू किया अभियान
चुनाव आयोग हाल के समय में सबसे बड़ी विश्वसनीयता हासिल करने की चुनौती से जूझ रहा है। एसआईआर को लेकर राजनीतिक दलों ने कई हमले किए, जिसमें चुनाव आयोग पर आरोप लगाया गया कि मतदाताओं को वोटर लिस्ट से मनमाने ढंग से हटाया जा रहा है।
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन आरोपों को बार-बार खारिज किया और इस बात पर जोर दिया है कि संशोधन सख्ती से कानूनी ढांचे के भीतर किया जा रहा है और प्रत्येक मतदाता के पास इन फैसलों को चुनौती देने या बहाली की मांग करने के लिए कई वैधानिक अवसर हैं।
चुनाव आयोग के इस अभियान को देखकर ऐसा कहा जा सकता है कि आयोग अपना बचाव करने के बजाय जनता का विश्वास बहाल करने की दिशा में काम कर रहा है।
आयोग के इस प्रयास के केंद्र में युवा मतदाताओं के बीच मतदाता जागरूकता को मजबूत करना, मीडिया के साथ सीधे जुड़ाव के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाना और चुनावों को अधिक सुलभ और जवाबदेह बनाने के साधन के रूप में प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन करना जैसी पहल हैं।
कैसे चुनाव आयोग जीतेगा लोगों का भरोसा?
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि पहली बार मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया, संवैधानिक मूल्यों और लोकतंत्र में सूचित भागीदारी से परिचित कराने के लिए क्लबों को फिर से सक्रिय किया जाएगा।
कई साल पहले शुरू किया गया यह कार्यक्रम क्विज, नकली चुनाव, बहस, मतदाता पंजीकरण अभियान और नागरिक शिक्षा गतिविधियों के माध्यम से साथियों के नेतृत्व में जागरूकता पैदा करने के लिए डिजाइन किया गया था।
अधिकारियों ने स्वीकार किया कि युवाओं की भागीदारी चिंता का विषय बनी हुई है और कहा कि नए सिरे से फोकस का उद्देश्य छात्रों के पहली बार मतदाता बनने से बहुत पहले चुनावी जागरूकता पैदा करना है।
वन-स्टॉप डिजिटल समाधान
चुनाव आयोग ने ECINET के बारे में बताया, जो एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो एक ही मोबाइल और वेब इंटरफेस पर मतदाता और चुनाव सेवाओं की एक श्रृंखला को एक साथ लाता है।
अधिकारियों ने इसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए वन-स्टॉप डिजिटल समाधान बताया। इस प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिक चुनाव आयोग से सीधे संपर्क में आ सकते हैं। इसमें मतदाता पंजीकरण से लेकर उससे जुड़ी शिकायत करने का भी अधिकार है।
- मतदाता पंजीकरण किया जा सकता है।
- प्रविष्टियों में सुधार और विलोपन के लिए आवेदन दे सकते हैं।
- आवेदन को ट्रैक कर सकते हैं।
- डिजिटल मतदाता पहचान पत्र (ई-ईपीआईसी) डाउनलोड किया जा सकता है।
- इस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
- मतदाता सूची में अपना नाम सत्यापित कर सकते हैं।
- बूथ स्तर के अधिकारियों और चुनाव अधिकारियों से सीधे जुड़ा जा सकता है।
- इस प्लेटफॉर्म पर बीएलओ के साथ नियुक्तियों को निर्धारित करने और सक्षम मॉड्यूल के माध्यम से विकलांग व्यक्तियों के लिए सेवाओं तक पहुंचने की अनुमति देता है।
ECINET को मिल रही सफलता
चुनाव आयोग की तरफ से जारी डेटा के मुताबिक, ECINET ने अपने पायलट चरण के दौरान 101 मिलियन से अधिक पंजीकरण फॉर्म पर काम शुरू कर दिया है। हर दिन औसतन लगभग 2.7 लाख फॉर्म पर काम किया जा रहा है।
प्लेटफॉर्म ने लगभग दस लाख बूथ स्तर के अधिकारियों को पंजीकृत किया है, जबकि एसआईआर अभ्यास के दौरान उत्पन्न 1.5 बिलियन से अधिक दस्तावेजों को डिजिटल किया गया है।
इस प्लेटफॉर्म को 1.1 मिलियन मतदान केंद्रों, 543 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों और 4,123 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में एक अरब से अधिक मतदाताओं की सेवा के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें अंग्रेजी के अलावा 22 अनुसूचित भाषाओं में सेवाओं की योजना बनाई गई है।
चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया के डिजिटलीकरण से पारदर्शिता में सुधार होगा, देरी कम होगी और चुनाव संबंधी जानकारी तेजी से प्रसारित हो सकेगी।
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने तर्क दिया कि कई नागरिक-सामना वाली सेवाओं को एक मंच के तहत लाने से प्रशासनिक दक्षता में सुधार होने के साथ-साथ चुनाव अधिकारियों के साथ बातचीत आसान हो जाएगी।
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