Smriti Irani Advice For Women: मेहनत कीजिए, मगर अपनी बात और अपने हक के लिए खड़े होना भी सीखिए
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महिलाओं के लिए स्मृति ईरानी की सलाह
Smriti Irani Advice For Women: महिलाओं से अक्सर एक साथ कई तरह की उम्मीदें की जाती हैं। वे मेहनती हों, लेकिन बहुत महत्वाकांक्षी न दिखें। आत्मविश्वास के साथ बोलें, मगर उनकी आवाज किसी को तेज न लगे। नेतृत्व करें, लेकिन सख्त फैसले लेते समय भी सबको खुश रखें। यही वजह है कि कार्यस्थल पर महिलाओं को केवल अपना काम साबित नहीं करना पड़ता, बल्कि अपने व्यवहार को लेकर बनी धारणाओं से भी जूझना पड़ता है।
पुरुष का सख्त रवैया अक्सर नेतृत्व क्षमता माना जाता है। वहीं कोई महिला उतनी ही स्पष्टता से अपनी बात रखे तो उसे घमंडी, आक्रामक या मुश्किल स्वभाव का बताया जा सकता है। इंडिया ग्लोबल फोरम में स्मृति ईरानी ने इसी दोहरे पैमाने पर बेबाकी से बात की।
उन्होंने एक पंक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि जब आप घोड़े की तरह काम करते हैं तो कभी-कभी दुलत्ती भी मारते हैं। पहली नजर में यह बात तीखी लग सकती है, लेकिन इसके भीतर महिलाओं के लिए एक जरूरी सीख छिपी है। पूरी मेहनत से काम कीजिए, मगर अपनी मेहनत, सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना भी सीखिए। साथ ही, हर कदम सोच-समझकर उठाइए।
हर किसी को खुश रखना आपकी जिम्मेदारी नहीं
कई महिलाएं अपनी बात इसलिए पीछे खींच लेती हैं क्योंकि उन्हें कठोर या असहयोगी समझे जाने का डर रहता है। वे अतिरिक्त जिम्मेदारियां स्वीकार करती रहती हैं, अनुचित व्यवहार पर चुप रहती हैं और अपने हिस्से की उपलब्धि का श्रेय भी दूसरों को लेने देती हैं।
स्मृति ईरानी की बात याद दिलाती है कि सफल होने के लिए हर व्यक्ति को खुश रखना जरूरी नहीं। आपके फैसले तथ्यों, जिम्मेदारी और सही नीयत पर आधारित हैं तो केवल आलोचना के डर से पीछे हटने की आवश्यकता नहीं है।
मुखर होने का मतलब आक्रामक होना नहीं
यहां ‘दुलत्ती मारने’ का अर्थ हर बात पर झगड़ा या टकराव पैदा करना नहीं है। इसका अर्थ है कि अपनी सीमाएं तय करना और जरूरत पड़ने पर स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखना।
यदि कोई बार-बार आपके काम का श्रेय ले रहा है, आपके समय को हल्के में समझ रहा है या आपके साथ अनुचित व्यवहार कर रहा है तो शांत रहना हमेशा समझदारी नहीं होती। तथ्यों के साथ बात करें। अपने काम का रिकॉर्ड रखें। मीटिंग में अपने विचार स्पष्टता से रखें और जहां आवश्यक हो, सम्मान के साथ ‘नहीं’ कहना सीखें।
मेहनत के साथ रणनीति भी बनाएं
घंटों काम करना ही पेशेवर सफलता की गारंटी नहीं है। यह समझना भी जरूरी है कि आपकी मेहनत किस दिशा में जा रही है और उससे क्या परिणाम मिल रहा है। अपनी प्राथमिकताएं तय करें। जरूरी कौशल सीखें। सही लोगों से पेशेवर संबंध बनाएं और हर प्रतिक्रिया देने से पहले परिस्थिति को समझें।
स्मृति ईरानी की सलाह मेहनत और समझदारी के इसी संतुलन की बात करती है। अपनी ताकत को छिपाना विनम्रता नहीं है। महिलाओं को मजबूत, महत्वाकांक्षी और स्पष्ट होने के लिए माफी मांगने की जरूरत भी नहीं। पूरी लगन से अपनी जगह बनाइए, लेकिन किसी को अपनी विनम्रता को कमजोरी समझने की इजाजत मत दीजिए।
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मेधा चावलाauthor
मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।
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