कलेक्ट्रेट में दी नशा मुक्त राजस्थान अभियान की जानकारी: SP ने जिले के 409 स्कूलों में चलाया कैंपेन; दुष्परिणाम के बारे में बताया - rajsamand (kankroli) News

राजसमंद पुलिस एवं प्रशासन ने नशा मुक्त राजस्थान अभियान से 76 हजार से अधिक स्टूडेंट्स, पेरेंट्स व अध्यापकों को जोड़ा।

अगर युवा पीढ़ी नशे से दूर रहेगी तो परिवार, समाज और राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध होगा। बच्चों को शिक्षा, खेल, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को अपनाना चाहिए। वे खुद भी नशे से दूर रहें और दोस्तों-परिवार को भी दूर रहने की प्रेरणा दें।

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यह बात गुरुवार को राजसमंद जिला कलेक्ट्रेट में पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल ने नशा मुक्ति अभियान के बारे में जानकारी देते हुए कही। इस दौरान कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा भी मौजूद थे। उन्होंने कहा- आमजन भी नशा मुक्त राजस्थान और नशा मुक्त भारत के संकल्प को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग करे।

अभियान से लोगों को जोड़ा

अधिकारियों ने बताया- राजस्थान सरकार के नशा मुक्त राजस्थान अभियान एवं भारत सरकार के एन-कोर्ड (Drug Free India Initiative) के तहत जिलेभर में प्रभावी अभियान चलाया। बडी संख्या में स्टूडेंट्स व आमजन को अभियान से जोड़ा।

जिला प्रशासन व जिला पुलिस विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिले में व्यापक जन-जागरूकता एवं क्षमता निर्माण अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया। अभियान का उद्देश्य युवाओं एवं विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करना रहा।

सभी आठों ब्लॉकों में शत-प्रतिशत कवरेज

उन्होंने बताया- अभियान का संचालन जिले के सभी आठों ब्लॉकों में शत-प्रतिशत कवरेज के साथ किया गया। जिले के 409 सरकारी एवं निजी विद्यालयों में विशेष जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की गईं। प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 350 मास्टर रिसोर्स पर्सन तैयार किए गए, जिनमें 227 सरकारी पीईईओ एवं यूसीईईओ तथा 123 निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्य शामिल रहे। सभी मास्टर ट्रेनर्स को ब्लॉक स्तर पर विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया।

अभियान के दौरान 65,857 स्टूडेंट्स, 4,708 शिक्षकों तथा अभिभावकों सहित कुल 76,716 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। विद्यालयों में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के साथ संवाद, नशामुक्ति की शपथ, पोस्टर, निबंध, स्लोगन लेखन और क्विज प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। साथ ही प्रेरणादायक लघु फिल्में शिकंजा, एवं चलो तोड़ दें ये बंधन प्रदर्शित कर नशे के सामाजिक, पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई।