SRCC के मंच से पीएम मोदी की पाकिस्तान को दो टूक, बोले- आज नापाक हरकत पर घर में घुसकर मारती है सेना
नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कॉलेज के 100 साल के गौरवशाली सफर की सराहना की और देश के बदलते मिजाज पर खुलकर अपनी बात रखी। ऐतिहासिक अवसर पर छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि जब कोई संस्थान 100 वर्ष पूरे करता है, तो वह केवल एक संस्था नहीं बल्कि उपलब्धियों और नई प्रेरणाओं का महासागर बन जाता है। दरियागंज के एक छोटे से स्थान से शुरू हुआ यह संस्थान आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है, जिसने कई पीढ़ियों को तराशकर देश के निर्माण में अहम योगदान दिया है।
2013 के भाषण का जिक्र और ‘आधे ग्लास’ की सीख
साढ़े 13 साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर इसी मंच पर पहुंचे पीएम मोदी ने 6 फरवरी 2013 के अपने पुराने संबोधन को याद किया, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर यहां आए थे। उन्होंने कहा कि उस समय लोगों को लग रहा था कि वे मंच से तत्कालीन केंद्र सरकार पर तीखे राजनीतिक हमले करेंगे, लेकिन उन्होंने केवल देश के भविष्य का सकारात्मक विजन सामने रखा था। युवाओं को उस दौर की निराशा भरी हेडलाइंस याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि तब उन्होंने पानी से भरे आधे ग्लास का उदाहरण दिया था, जिसे वे आधा पानी और आधा हवा से भरा देखते थे।
‘उस दौर में पाकिस्तान बेकाबू था, आज घर में घुसकर जवाब मिलता है’
सुरक्षा और राष्ट्रीय स्वाभिमान के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 2013 के दौर में आतंकी बेलगाम थे और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान बेकाबू होकर नापाक हरकतें करता था, जिसके चलते चारों ओर निराशा का माहौल था। हालांकि, आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और आतंकवाद फैलाने वालों के हौसले पूरी तरह पस्त हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आज पाकिस्तान कोई भी कायराना हरकत करने की कोशिश करता है, तो भारत की जांबाज सेनाएं घर में घुसकर मुंहतोड़ जवाब देती हैं। जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक शांति का दायरा बढ़ा है और नक्सलवाद की रीढ़ पूरी तरह तोड़ी जा चुकी है।
शिक्षक दिवस और शताब्दी का अनूठा संयोग
साल 1926 में प्रसिद्ध उद्योगपति और समाजसेवी सर श्री राम द्वारा स्थापित यह कॉलेज देश में कॉमर्स, इकोनॉमिक्स और मैनेजमेंट की शिक्षा का अग्रणी केंद्र रहा है। इस ऐतिहासिक शताब्दी समारोह का आयोजन शिक्षक दिवस के अवसर पर होना इसे और भी खास बनाता है, क्योंकि यह दिन उन गुरुओं और शिक्षाविदों के योगदान को नमन करने का है जो राष्ट्र के भविष्य की नींव तैयार करते हैं। इस यादगार वर्ष के उपलक्ष्य में इससे पहले एक विशेष स्मारक डाक टिकट भी जारी किया जा चुका है।
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