TMC के फ्रीज बैंक खातों से हटेगा ताला? डोला सेन की याचिका पर सोमवार को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई| Navbharat Live
Updated On: Aug 02, 2026 | 06:33 PM IST
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सार
TMC Bank Account Freeze Case: टीएमसी के 3 बैंक खातों को ईडी द्वारा फ्रीज करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। HC के फैसले को डोला सेन और पार्टी ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट (सोर्स- IANS)
विस्तार
Supreme Court Hear Dola Sen Plea: सुप्रीम कोर्ट सोमवार को तृणमूल कांग्रेस और उसकी राज्यसभा सदस्य डोला सेन की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग की कथित जांच के सिलसिले में पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के फैसले को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की गई कॉज-लिस्ट के अनुसार, स्पेशल लीव पिटिशन को जस्टिस एमएम सुंदेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच के सामने लिस्ट किया गया है।
यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के 20 जुलाई के उस आदेश को चुनौती देती है जिसमें ईडी के उस फ्रीजिंग आदेश के खिलाफ अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया गया था, जो प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 17(1-ए) के तहत जारी किया गया था।
तीन HDFC बैंक खातों से जुड़ा है विवाद
यह विवाद तृणमूल कांग्रेस के तीन एचडीएफसी बैंक खातों से जुड़ा है, जिन पर ईडी ने डेबिट पर रोक लगा दी थी। यह कार्रवाई 23 जून को बिधाननगर के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्रेडिकेट एफआईआर के आधार पर एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट शुरू करने के बाद की गई थी। अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए, कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस कृष्णा राव की सिंगल-जज बेंच ने कहा था कि कोर्ट को अंतरिम चरण में दखल देने लायक कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं मिला।
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बेंच ने कहा था कि इस कोर्ट को याचिकाकर्ताओं के पक्ष में कोई प्रथम दृष्टया मामला या सुविधा-असुविधा का संतुलन नहीं मिला। इसे देखते हुए, याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगे गए अंतरिम आदेश को देने से इनकार किया जाता है।
हाई कोर्ट ने की थी अहम टिप्पणी
हाई कोर्ट ने पाया कि ईडी ने पार्टी के बैंक खातों का विश्लेषण किया था और केयरवेल ग्रुप सहित विभिन्न संस्थाओं को फंड का भारी ट्रांसफर पाया था और कहा कि उन लेन-देन की वैधता की जांच अंतरिम चरण में नहीं की जा सकती। हाई कोर्ट ने कहा कि अंतरिम आदेश देने के चरण में, कोर्ट के लिए यह तय करना संभव नहीं है कि ट्रांसफर कानूनी है या नहीं।
याचिकाकर्ताओं को एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के सामने अपनी सभी शिकायतें रखने का मौका मिलेगा। जस्टिस राव ने यह भी नोट किया कि ईडी ने केवल छह बैंक खाते फ्रीज किए थे, जबकि पार्टी 36 अन्य खातों का संचालन जारी रखे हुए थी, जिनमें 164 करोड़ रुपए से अधिक जमा थे।
कोर्ट ने खारिज कर दी थी ED की आपत्ति
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई की योग्यता पर ईडी की शुरुआती आपत्ति को खारिज कर दिया और कहा कि रिट याचिका पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से सही तरीके से दायर की गई थी। इसने यह भी कहा कि वैकल्पिक कानूनी उपाय मौजूद होने के बावजूद हाई कोर्ट ईसीआईआर कार्यवाही शुरू करने में मनमानी के आरोपों की जांच करने से नहीं रोका जा सकता। ईडी ने 164 करोड़ रुपए के कथित संदिग्ध लेन-देन का पता चलने के बाद ये प्रतिबंध लगाए थे।
पश्चिम बंगाल पुलिस के कहने पर डेबिट पर लगी थी रोक
ईडी की कार्रवाई से पहले ही पश्चिम बंगाल पुलिस के कहने पर बैंक ने इन खातों से पैसे निकालने (डेबिट) पर रोक लगा दी थी। खातों को फ्रीज करने का फैसला एक शिकायत के बाद लिया गया था। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इन खातों के जरिए गैर-कानूनी गतिविधियों से मिले पैसे का लेन-देन किया गया था। इन गतिविधियों में प्रभाव का गलत इस्तेमाल, बेईमानी से किए गए वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध तरीके से गैर-कानूनी ढंग से पैसे इकट्ठा करना शामिल था।
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शिकायत के आधार पर, साइबर क्राइम पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। इसके बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत ईसीआईआर दर्ज की। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई बिना सोचे-समझे और मनमाने ढंग से की गई और इसमें अपराध से मिली किसी खास रकम की पहचान या उसे अलग नहीं किया गया। पार्टी का यह भी आरोप है कि यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद पार्टी के खिलाफ शुरू किए गए दबाव बनाने वाले कदमों की एक कड़ी है।
एजेंसी इनपुट के साथ…
