'बागी लौटें तो एक घंटे में दे दूंगा इस्तीफा', TMC में बगावत के बीच बोले अभिषेक बनर्जी
West Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस में मचे घमासान के बीच सांसद अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं को खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि अगर बागी नेता ममता बनर्जी का नेतृत्व स्वीकार कर वापस लौटते हैं तो वह एक घंटे में इस्तीफा दे देंगे.
West Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस में मचे घमासान के बीच सांसद अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं को खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि अगर बागी नेता ममता बनर्जी का नेतृत्व स्वीकार कर वापस लौटते हैं तो वह एक घंटे में इस्तीफा दे देंगे.
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Abhishek Banerjee
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है. पार्टी के भीतर मची भीषण बगावत के बीच टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने मोर्चा संभाल लिया है. उन्होंने बागी रुख अख्तियार करने वाले नेताओं को सीधी और खुली चुनौती दी है. अभिषेक बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर सभी बागी नेता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए पार्टी में वापस लौट आते हैं, तो वह महज एक घंटे के भीतर अपने सभी पदों से इस्तीफा दे देंगे. उनके इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में गरमाहट और ज्यादा बढ़ गई है.
बागियों पर बीजेपी के साथ मिलीभगत का आरोप
अभिषेक बनर्जी ने पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि जो लोग आज पार्टी से बाहर जाकर उन्हें दोषी ठहरा रहे हैं या उनके खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं, वे असल में एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं. अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि इन बागी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी के साथ अंदरूनी समझौता कर रखा है. उनका कहना है कि इन नेताओं की रणनीति पहले पार्टी छोड़ने की होती है, फिर वे बागी गुट या बीजेपी में शामिल हो जाते हैं और अपनी कमियों को छिपाने के लिए अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाने लगते हैं. उन्होंने दोहराया कि अगर बगावत का असली कारण वही हैं, तो उनके हटते ही सबको वापस आ जाना चाहिए.
सांसदों और विधायकों की बड़ी बगावत
टीएमसी में यह संकट बेहद गहरा चुका है क्योंकि बड़ी संख्या में सांसद और विधायक पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खड़े हो गए हैं. राज्यसभा के तीन प्रमुख सांसदों सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने पार्टी से दूरी बना ली है. लोकसभा में भी स्थिति चिंताजनक है, जहां काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में लगभग 20 सांसदों ने एक अलग गुट का निर्माण कर लिया है और वे केंद्र में एनडीए का समर्थन करने का दावा कर रहे हैं. इस गुट में शताब्दी रॉय, यूसुफ पठान, रचना बनर्जी, देव अधिकारी और जून मालिया जैसे कई बड़े और चर्चित चेहरे शामिल हैं. इन सभी नेताओं का आरोप है कि पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली के कारण तालमेल पूरी तरह बिगड़ चुका है.
विधानसभा में दफ्तर पर कब्जा और असली टीएमसी का दावा
बगावत की यह आग सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि कोलकाता में पश्चिम बंगाल विधानसभा के भीतर भी इसका बड़ा असर दिख रहा है. पार्टी के 80 विधायकों में से 64 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में विद्रोह कर दिया है. इस बागी गुट ने विधानसभा में टीएमसी के लिए तय दफ्तर पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है. इसके साथ ही ऋतब्रत बनर्जी को इस नए विधायक दल का नेता और विधानसभा में विपक्ष का नेता चुन लिया गया है. इस गुट ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताया है और पार्टी के नाम के साथ-साथ चुनाव चिन्ह पर भी अपना दावा पेश कर दिया है.
मदन मित्रा का तीखा हमला और वरिष्ठों का इस्तीफा
पार्टी के बेहद वरिष्ठ और चर्चित नेता मदन मित्रा ने भी बागी सुर अपनाते हुए अभिषेक बनर्जी पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने टीएमसी के सभी संगठनात्मक पदों से अपना इस्तीफा दे दिया है, हालांकि उन्होंने विधायक का पद नहीं छोड़ा है. मदन मित्रा ने अभिषेक बनर्जी की काम करने के तरीके को तानाशाही करार दिया है. उनका कहना है कि पूरी पार्टी को एक व्यक्ति के नियंत्रण में चलाने की कोशिश की जा रही है, जिससे संगठन लगातार कमजोर होता जा रहा है. इसी असंतोष के चलते सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव जैसे वरिष्ठ नेताओं ने राज्यसभा और पार्टी के पदों से दूरी बना ली है और उनके जल्द ही बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं.
आमतला दफ्तर पर चला प्रशासन का बुलडोजर
इस राजनीतिक लड़ाई के बीच शनिवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने आमतला में स्थित अभिषेक बनर्जी के निजी पार्टी दफ्तर को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी. प्रशासन का तर्क है कि यह इमारत बिना किसी स्वीकृत नक्शे और निर्माण नियमों का उल्लंघन करके बनाई गई थी. इस कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी ताकि कानून व्यवस्था न बिगड़े. जेसीबी मशीनों की मदद से दफ्तर के अवैध हिस्से को ढहा दिया गया.
कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी टीएमसी
अभिषेक बनर्जी ने अपने दफ्तर पर हुई इस कार्रवाई को पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है. उन्होंने दावा किया कि यह जमीन पूरी तरह वैध तरीके से खरीदी गई थी और इमारत का निर्माण सभी जरूरी अनुमतियों के बाद ही किया गया था. उन्होंने स्थानीय प्रशासन पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है. अभिषेक बनर्जी ने घोषणा की है कि इस अवैध कार्रवाई के खिलाफ वे कलकत्ता हाई कोर्ट में तत्काल सुनवाई की अपील करेंगे और जरूरत पड़ने पर देश की सर्वोच्च अदालत तक जाएंगे. उन्होंने कुछ वीडियो साक्ष्य भी मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय को सौंपे हैं, जिसमें कथित तौर पर विरोधी दलों के लोग तोड़फोड़ करते दिख रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि भविष्य में सत्ता बदलने पर ऐसी ही कार्रवाई विरोधियों के खिलाफ भी की जाएगी.
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