Toxic Vs Mirzapur: बॉक्स ऑफिस पर फिर दिखेगा खूंखारों का भौकाल! ब्लॉकबस्टर होगी तबाही की ये कहानियां?

Toxic Vs Mirzapur: बॉक्स ऑफिस पर फिर दिखेगा खूंखारों का भौकाल! ब्लॉकबस्टर होगी तबाही की ये कहानियां?

बॉक्स ऑफिस पर वायलेंस का भौकाल, पार्ट-2

बॉक्स ऑफिस पर एक बार फिर खून-खराबा का मंज़र आम होने जा रहा है. गीतू मोहनदास के निर्देशन में यश की टॉक्सिक अपने खतरनाक मिशन के साथ 26 अगस्त को सिनेमा घरों में दस्तक देने जा रही है. टीजर और ट्रेलर के तबाही वाले नजारे से फिल्म का अंजाम पहले ही जाहिर है. टॉक्सिक यश के सबसे खौफनाक किरदार वाली फिल्म मानी जा रही है. KGF से भी ज्यादा चौंका सकती है. आपको बताएं कि हाल के समय में फिल्मों में हिंसा दर्शाने का जो क्रेज बढ़ा है, टॉक्सिक में उसका विस्तार नजर आने वाला है.

फिल्मी पर्दे पर कौन हीरो कितना खूंखार दिख सकता है- मानों इसकी रेस लगी है. रणबीर कपूर की एनिमल से इसका नया दौर शुरू हुआ था. वैसे टॉक्सिक में वायलेंस ही नहीं बल्कि रोमांटिक सीन की भी भरमार होने वाली है. वायरल गाने तबाही… में इसकी झलक आ चुकी है. कियारा आडवाणी और यश के कई इंटिमेट सीन ने कहर बरपा दिया. कियारा निशाने पर आईं. खूब ट्रोल हुईं. जबकि तबाही… गाने में कियारा जितनी हॉट लगीं, यश भी उतने ही एग्रेसिव दिखे.

एक्स फैक्टर वाला वायलेंस मनोरंजन का नया मसाला

यानी टॉक्सिक में एग्रेसिव वायलेंस और हॉट रोमांटिक सीन के कॉकटेल से दर्शकों को बॉक्स ऑफिस पर खींचने की पूरी तैयारी है. ऑर्डिनरी वायलेंस और ऑर्डिनरी रोमांस अब बीते दिनों की बात हो गई. हर एक्शन में एक्स फैक्टर ही वायलेंस का नया क्राफ्ट है. इसे पिछले दिनों एनिमल से लेकर धुरंधर तक में देखा चुका है. यश की टॉक्सिक के प्रचार-प्रसार में इन फिल्मों के मुकाबले वायलेंस लेवल कहीं ज्यादा डेंजर होने का दावा किया जा रहा है. जिसकी सचाई फिल्म के रिलीज होने के बाद ही सामने आ सकेगी.

सिल्वर स्क्रीन पर खून खराबा, चीख-पुकार फिर एक बार

दिलचस्प बात ये है कि टॉक्सिक रिलीज के करीब एक हफ्ते के बाद यानी 4 सितंबर को ही कालीन भैया पंकज त्रिपाठी की मिर्जापुर द मूवी भी बॉक्स ऑफिस पर दस्तक देने वाली है. जहां खूनी जंग अपने चरम पर हो सकती है. यहां भी खूंखारों का अपना-अपना भौकाल है. टॉक्सिक की झांकी हम देख चुके हैं तो मिर्जापुर वेब सीरीज में गद्दी की खूनी लड़ाई से भी भली भांति वाकिफ हैं. यानी अगले कुछ दिनों में थिएटर्स मानों दहशत की दुकान बनने वाले हैं. सिल्वर स्क्रीन खून और चीख पुकार से पट जाने वाला है.

क्या हो सकती है यश की टॉक्सिक की कहानी?

टॉक्सिक और मिर्जापुर दोनों फिल्में तबाही की कहानियों से लैस हैं. यश की फिल्म का पूरा नाम ‘टॉक्सिक-ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ है. इसकी कहानी की पृष्ठभूमि सन् 1940 से 1970 के बीच की है. बैकड्रॉप गोवा का है. इसे पीरियड डार्क गैंगस्टर एक्शन ड्रामा नाम भी दिया गया है. अभी तक की जानकारी के मुताबिक इस फिल्म में यश एक खूंखार गैंगस्टर बने हैं, जो क्राइम की एक समानांतर दुनिया खड़ी करता है. फिल्म में उसका बचपन भी दिखाया जाएगा और बताया जाएगा कि वह कितनी गरीबी और दुश्वारियों के बीच पला बढ़ा है, जो आगे चलकर जुर्म की दुनिया का डॉन बन जाता है.

टॉक्सिक में गोवा टूरिज्म की आड़ में फैले ड्रग्स तस्करी जैसे काले कारोबार के अंडरवर्ल्ड को भी दिखाया जाएगा. फिल्म में यश का डबल रोल बताया जा रहा है, दोनों अलग-अलग मिजाज के रोल में यश को देखना रोमांचक होगा. लेकिन फिल्म का इससे भी ज्यादा रोचक पहलू ये है कि इसमें एक नहीं बल्कि पांच-पांच हीरोइनें दिखेंगी, मसलन कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मणी वसंत. यानी टॉक्सिक में हिंसा और हुस्न के अनोखे नजारे होंगे, जो युवा दर्शकों के लिए भरपूर मसाला साबित हो सकते हैं.

मिर्जापुर में भी हिंसा और हुस्न का कॉकटेल

उधर गुरमीत सिंह के निर्देशन में आ रही मिर्जापुर-द मूवी भी हिंसा और हुस्न के कॉकटेल के लिए पहले से ही विख्यात है. मिर्जापुर-द मूवी रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर पेशकश है. इस फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु, श्वेता त्रिपाठी के अलावा रवि किशन, जितेंद्र कुमार, सोनल चौहान, मोहित मलिक जैसे कुछ नये चेहरे भी हैं. फिल्म में गद्दी की खूनी लड़ाई में क्या-क्या नये प्रसंग होंगे- ये तो रिलीज के बाद ही पता चलेगा लेकिन खूंखारों का भौकाल यहां एक बार फिर देखने को मिलेगा.

हिंसक हथियारों का प्रदर्शन दहलाने वाला

टॉक्सिक और मिर्जापुर दोनों फिल्मों का मिजाज बताता है यहां तबाही ही तबाही मचने वाली है, दहशत ही दहशत दिखने वाली है. जी हां, दहशत जो कि हाल की फिल्मों की एक नई यूएसपी है. रणबीर कपूर की एनिमल के ब्लॉकबस्टर होने के बाद ये मान लिया गया कि जिस फिल्म में जितना खून खराबा दिखाया जाएगा, वह बॉक्स ऑफिस पर उतनी ही कामयाब हो सकेगी. एनिमल के बाद किल, जाट, सिकंदर, धुरंधर और ओ रोमियो आदि में हिंसा को बहुत ही वीभत्स तरीके से दर्शाया गया. हिंसक हथियारों का प्रदर्शन चौंकाने वाला दिखा. पिस्टल या बंदूक ही नहीं बल्कि हथौड़े और गंड़ासे तक के प्रयोग किए गए.

हालांकि इन हिंसा प्रधान फिल्मों में सभी ने बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी का स्वाद नहीं चखा. एनिमल और धुरंधर जैसी कुछ ही एपिक मार्का फिल्में ब्लॉकबस्टर हो सकीं. अब टॉक्सिक और मिर्जापुर फिर से एपिक कलेवर में एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी वायलेंस के साथ आ रही हैं, देखना होगा कि ये फिल्में कामयाबी का कैसा कीर्तिमान रच पाती है.

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संजीव श्रीवास्तव

संजीव श्रीवास्तव

संजीव श्रीवास्तव का पैतृक गांव-घर बिहार के सीतामढ़ी में है लेकिन पिछले करीब ढाई दशक से दिल्ली से लेकर मुंबई तक मीडिया की मुख्यधारा में सक्रिय हैं. ब्रेकिंग न्यूज़ से लेकर क्रिएटिव राइटिंग तक का हुनर रखते हैं, देश-विदेश की राजनीति, फिल्म, लिटरेचर, क्राइम जैसे विषयों पर बेबाकी से लिखते हैं. आसानी से समझ आने वाली और सोचने-विचारने वाली भाषा लिखना पसंद है. सिनेमा प्रिय विषय है- लिहाजा फिल्मों पर अब तक तीन किताबें, दो उपन्यास और कुछ पटकथा-संवाद भी लिख चुके हैं. कुछेक प्रिंट मीडिया में सब एडिटरी के बाद साल 2000 से टीवी न्यूज़ की दुनिया में प्रवेश. सबसे पहले जैन टीवी फिर सहारा समय में करीब 14 साल गुजारा, जहां प्राइम टाइम स्पेशल शोज/प्रोग्राम बनाने से लेकर मुंबई की एंटरटेंमेंट फील्ड में रिपोर्टिंग तक की. उसके बाद सूर्या समाचार, एबीपी न्यूज़ और न्यूज़ इंडिया के आउटपुट होते हुए अब डिजिटल मीडिया में TV9 से सम्बद्ध.

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