UCC पर तीन सहयोगियों ने बढ़ाई BJP की टेंशन, जानें अमित शाह के दावों पर क्या कहा

यूसीसी पर BJP के सहयोगी दलों का अलग-अलग रुख
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को मुंबई में एक बड़ा ऐलान किया था. उन्होंने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले देश के 21 एनडीए शासित राज्यों में UCC लागू कर दी जाएगी. उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है. खासकर एनडीए के भीतर ही सियासी फुसफुसाहट और सावधानी के सुर गूंजने लगे हैं. बीजेपी के तीन सबसे अहम सहयोगियों का इस पर अलग-अलग रुख है. जेडीयू, टीडीपी और लोजपा (रामविलास) ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सोच-समझकर और अलग-अलग तरीके से अपनी राय रखी है.
क्या है BJP के 3 सहयोगी दलों का रुख?
इस पूरे मामले पर तेलुगू देशम पार्टी यानी टीडीपी का कहना है कि अभी तक इस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई है. जब जरूरत लगेगी तब इस पर सोचेंगे. इसे लागू करने से पहले अलग-अलग पक्षों से जरूर बात करेंगे. वहीं, जेडीयू इस पर पहले ही कह चुका है कि वह इस मामले पर अमित शाह से चर्चा करेंगे. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बताया कि वे गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर इस मुद्दे पर बात करेंगे.
दरअसल, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अतीत में यूसीसी के विचार का समर्थन किया था, लेकिन इस बात पर जोर दिया था कि सभी समुदायों को साथ लेकर आम सहमति बनाई जानी चाहिए. अप्रैल में उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.
वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान का भी इस पर अलग रुख है. उन्होंने इस पर सतर्कता दिखाते हुए कहा है कि उनकी पार्टी एकरूपता और विविधता दोनों के पक्ष में है. संविधान ने अलग-अलग समुदायों की परंपराओं और रीति-रिवाजों को मान्यता दी है. अनुसूचित जनजातियों को संविधान की विभिन्न अनुसूचियों और अनुच्छेदों के तहत छूट दी गई है, जो इसका प्रमाण है.
UCC का प्रस्ताव पहले सार्वजनिक हो- चिराग
चिराग ने यह भी कहा कि UCC का प्रस्ताव पहले सार्वजनिक होना चाहिए, सभी संबंधित पक्षों के हितों पर विचार होना चाहिए और व्यापक चर्चा होनी चाहिए. उसके बाद ही उनकी पार्टी अपना रुख साफ करेगी. कुल मिलाकर मतलब साफ है कि शाह के यूसीसी वाले बयान पर भाजपा के सहयोगी दल फिलहाल कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं. वे या तो चर्चा करना चाहते हैं या फिर सोच-विचार के बाद फैसला लेंगे.
JDU और TDP का हमेशा से स्वतंत्र रुख
जेडीयू और टीडीपी का हमेशा से स्वतंत्र रुख अपनाने का इतिहास रहा है. 2014 से दोनों पार्टियां बीजेपी के कुछ बड़े वैचारिक मुद्दों पर अपना अलग नजरिया रखती रही हैं. इस दौरान वे कभी एनडीए में शामिल हुईं, तो कभी बाहर चली गईं. सहयोगी होने के बावजूद जेडीयू के सांसदों ने 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बिल का समर्थन नहीं किया था. वे संसद से बाहर चले गए थे. अभी पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में दोनों पार्टियां बीजेपी के काफी करीब नजर आ रही हैं. बावजूद इसके यूसीसी पर अलग रुख अख्तियार कर रही हैं.
UCC पर क्या था अमित शाह का बयान?
अमित शाह ने 13 सितंबर को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले देश के 21 एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दी जाएगी. उन्होंने ये कहा कि हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता लागू किया है और मुझे भरोसा है कि हम 2029 से पहले बीजेपी-एनडीए शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू कर देंगे.
अभी किन-किन राज्यों में UCC कानून?
बता दें कि बीजेपी सरकार चार राज्यों में यूसीसी कानून ला चुकी है, इनमें से उत्तराखंड यूसीसी लागू हो चुका है. यहां जनवरी 2025 से यूसीसी लागू है जबकि गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू करने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित हो चुका है. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इन राज्यों में भी लागू हो जाएगा. वहीं, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ ने यूसीसी का कानून तैयार करने के लिए समितियां गठित की हैं. वहीं, राजस्थान में कैबिनेट ने ड्राफ्ट बिल पास कर दिया है.

मुकेश झा
मुकेश झा पिछले 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वो मौजूदा समय में टीवी9 भारतवर्ष के डिजिटल प्लेटफॉर्म में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. 2017 में अमर उजाला के साथ उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें आकाशवाणी रेडियो के साथ भी काम करने का अनुभव है. ऑल इंडिया रोडियो दिल्ली में करीब एक दर्जन से अधिक प्रोग्राम कर चुके हैं. मुकेश को देश-दुनिया, राजनीति, खेल और साहित्य में खास रुचि है. साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर भी लिखने में दिलचस्पी है. मीडिया में नए प्रयोग को सीखने और समझने की ललक है. इन्हें एंकरिंग का भी शौक है. बिहार में मधुबनी से ताल्लुक रखने वाले मुकेश झा ओडिशा के संबलपुर यूनिवर्सिटी से बीसीए ग्रेजुएट हैं. इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा मुकेश प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद से तबला से भी ग्रेजुएट हैं.
Read More