कौन हैं एंडी बर्नहैम जो बने UK के नए प्रधानमंत्री, किंग चार्ल्स III से मुलाकात के बाद संभाली कमान
ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है. एंडी बर्नहैम ने यूनाइटेड किंगडम के नए प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है. लेबर पार्टी का नेता चुने जाने के बाद उन्हें किंग चार्ल्स III ने सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया, जिसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.
56 वर्षीय एंडी बर्नहैम इससे पहले ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर थे और अब वह ब्रिटेन की राष्ट्रीय राजनीति के सबसे बड़े पद पर पहुंच गए हैं.
स्थानीय राजनीति से ब्रिटेन के शीर्ष पद तक का सफर
एंडी बर्नहैम का राजनीतिक सफर काफी लंबा और अनुभव से भरा रहा है. वह लेबर पार्टी के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने स्थानीय प्रशासन में अपनी मजबूत पहचान बनाई.
ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के रूप में उन्होंने क्षेत्रीय विकास, सार्वजनिक सेवाओं और स्थानीय सरकार को अधिक अधिकार देने जैसे मुद्दों पर काम किया. यही वजह रही कि उन्हें पार्टी के अंदर और जनता के बीच एक मजबूत जनाधार वाला नेता माना गया.
लेबर पार्टी के निर्विरोध नेता बने
एंडी बर्नहैम को लेबर पार्टी का नया नेता निर्विरोध चुना गया. वह पार्टी नेतृत्व की दौड़ में अकेले उम्मीदवार थे और उन्हें पार्टी सांसदों का भारी समर्थन मिला. इसके बाद उनका प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा था.
लेबर पार्टी में उनकी छवि ऐसे नेता की है जो केंद्र सरकार की बजाय स्थानीय क्षेत्रों को ज्यादा अधिकार देने की वकालत करते हैं. उन्होंने ब्रिटेन में राजनीतिक स्थिरता और नई कार्यशैली लाने का वादा किया है.
कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं बर्नहैम
प्रधानमंत्री बनने से पहले एंडी बर्नहैम ब्रिटेन की केंद्र सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं.
उन्होंने लेबर सरकारों के दौरान...
- स्वास्थ्य मंत्री
- संस्कृति मंत्री
- अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली है.
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उनकी समझ को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) से जुड़े मुद्दों पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है.
‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ के नाम से भी पहचान
एंडी बर्नहैम को कई बार "किंग ऑफ द नॉर्थ" के नाम से भी संबोधित किया जाता है. इसकी वजह उत्तरी इंग्लैंड के क्षेत्रों के लिए उनकी लगातार आवाज उठाना है.
उन्होंने लंबे समय से यह मुद्दा उठाया कि ब्रिटेन की राजनीति और आर्थिक फैसलों में केवल लंदन पर ज्यादा ध्यान नहीं होना चाहिए, बल्कि देश के दूसरे क्षेत्रों को भी बराबर महत्व मिलना चाहिए.
किंग चार्ल्स III से मुलाकात के बाद संभाली कमान
ब्रिटेन की संवैधानिक परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री नियुक्ति की प्रक्रिया में राजा की औपचारिक भूमिका होती है. एंडी बर्नहैम ने किंग चार्ल्स III से मुलाकात के बाद सरकार बनाने का निमंत्रण स्वीकार किया. इसके बाद उन्होंने डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचकर प्रधानमंत्री के रूप में काम शुरू किया.
इससे पहले कीर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया. उन्होंने विदाई भाषण में कहा कि उनका काम पूरा हो चुका है और वह जिम्मेदारी एंडी बर्नहैम को सौंप रहे हैं.
नई सरकार के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां
प्रधानमंत्री पद संभालते ही एंडी बर्नहैम के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी. ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था, महंगाई, स्वास्थ्य सेवाएं, आवास संकट और जनता का घटता राजनीतिक भरोसा उनके लिए सबसे अहम मुद्दे होंगे.
उन्होंने संकेत दिया है कि उनकी सरकार स्थिरता और सुधारों पर ध्यान देगी. वह सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने और सत्ता को स्थानीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में काम करने की बात कर चुके हैं.
ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री एक दशक में
एंडी बर्नहैम ऐसे समय में प्रधानमंत्री बने हैं, जब ब्रिटेन ने पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक बदलावों का दौर देखा है. वह एक दशक में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बन गए हैं.
अब उनकी सबसे बड़ी परीक्षा यह होगी कि वह जनता के बीच भरोसा कैसे कायम करते हैं और लेबर पार्टी के वादों को जमीन पर कितना उतार पाते हैं.
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