पीओके में हिंसा: UN ने पाकिस्तान को लगाई लताड़; किससे की जवाबदेही तय करने की मांग?

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बिगड़ते सुरक्षा हालात पर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चिंता जताई है। UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के डिप्टी प्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ अगर कार्रवाई में उन्हें नुकसान पहुंचा है, तो इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महासचिव UN मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क के काम का समर्थन करते हैं और उम्मीद है कि उनकी अपीलों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा।



क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जांच होगी?


फरहान हक ने शुक्रवार को एक सवाल के जवाब में कहा,'महासचिव अपने हाई कमिश्नर के काम का समर्थन करते हैं और हमें पूरी उम्मीद है कि मिस्टर तुर्क की बातों पर ध्यान दिया जाएगा।' वह PoK में मौजूदा सुरक्षा हालात और हाल की घटनाओं को लेकर महासचिव के रुख के बारे में पूछे गए PTI के सवाल का जवाब दे रहे थे।

विज्ञापन



पीओके में हुई हालिया हिंसा पर UN ने क्या कहा?


पिछले महीने UN के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने पीओके में हुई हालिया घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मौत, पाकिस्तान की ओर से 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने और उसके नेताओं की गिरफ्तारी की निष्पक्ष एवं गहन जांच की मांग की थी।

विज्ञापन



क्या इंटरनेट पर लगी पाबंदियां भी चिंता का कारण हैं?


UN की ओर से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार पर असर डालने वाली पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई गई थी। इनमें इंटरनेट एक्सेस पर प्रतिबंध और सार्वजनिक रूप से लोगों के एकत्र होने पर लगाई गई पाबंदियां शामिल हैं।



अधिकारियों से जवाबदेही क्यों मांगी जा रही है?


जब हक से पूछा गया कि क्या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के लिए अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी, तो उन्होंने कहा, 'यह जरूरी है कि हर जगह अधिकारी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति दें और निश्चित रूप से यहां भी ऐसा ही होना चाहिए। अगर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों को नुकसान पहुंचा है, तो इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।'



PoK में अशांति को लेकर UN ने क्या अपील की थी?


पिछले महीने जिनेवा में जारी एक बयान में कहा गया था कि वोल्कर तुर्क ने महीने के आखिर में होने वाले क्षेत्रीय चुनावों से पहले PoK में बने अशांति के माहौल के बीच शांति बनाए रखने की अपील की थी।



जून से अब तक कितनी मौतें दर्ज की गईं?


बयान में खास तौर पर कहा गया था कि 27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मतदान से पहले जून से अब तक दर्जनों लोग मारे गए हैं। इनमें ज्यादातर प्रदर्शनकारी थे, हालांकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में तैनात सुरक्षाकर्मी भी मारे गए। UN मानवाधिकार उच्चायुक्त ने अशांति के दौरान हुई सभी मौतों की तत्काल, गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसमें प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के सदस्यों की मौतें भी शामिल हैं।



JAAC पर पाकिस्तान ने प्रतिबंध क्यों लगाया?


'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) विरोध प्रदर्शनों के पीछे सक्रिय एक आंदोलन है। इसमें व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील, एक्टिविस्ट और समाज के अन्य वर्गों के लोग शामिल हैं। पाकिस्तान ने सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के आरोप में आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया है।



ये भी पढ़ें: 'कागजी समझौता सुरक्षा नहीं देगा': PAK-सऊदी-तुर्किये रक्षा समझौते पर ईरान ने कसा तंज; रियाद को क्या चेतावनी दी?



UN ने PoK में इंटरनेट को लेकर क्या मांग की?


UN के बयान में कहा गया, 'हम अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि वे पूरे इलाके में इंटरनेट की पूरी सुविधा सुनिश्चित करें।' इसके साथ ही उच्चायुक्त ने स्थानीय लोगों की बुनियादी समस्याओं और उनकी शिकायतों के समाधान के लिए सार्थक और समावेशी राजनीतिक बातचीत शुरू करने का भी आह्वान किया।