क्रिकेट छोड़ अब राजनीति में एंट्री करने वाले हैं मोहम्मद शमी? UP के इस दिग्गज नेता से मुलाकात के बाद हलचल तेज
Updated: Monday, September 21, 2026, 9:36 [IST]
Mohammed Shami Political Entry: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की 20 सितंबर को राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष जयंत चौधरी से मुलाकात हुई। जयंत चौधरी ने खुद सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीर साझा की। इ
सके बाद उत्तर प्रदेश के अमरोहा में मोहम्मद शमी और उनके परिवार की सियासी पारी को लेकर अटकलें तेज हो गईं। हालांकि शमी या रालोद ने अभी तक चुनाव लड़ने अथवा पार्टी में शामिल होने का कोई ऐलान नहीं किया है। ऐसे में सवाल है कि इस मुलाकात का सियासी मतलब क्या है और शमी के परिवार को लेकर चर्चाएं क्यों शुरू हो गई हैं।
1.5 साल से टीम से बाहर हैं मोहम्मद शमी, क्या इसलिए पकड़ा सियासी रास्ता?
मोहम्मद शमी की इस मुलाकात को उनके क्रिकेट करियर के मौजूदा हालात से जोड़कर देखा जा रहा है। शमी ने भारत के लिए अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच 9 मार्च 2025 को न्यूजीलैंड के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में खेला था। उस मैच में 9 विकेट चटकाकर वे ICC की 'टीम ऑफ द टूर्नामेंट' में शामिल हुए थे। इसके बाद से ही वे टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं।
मई 2026 में मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने कहा था कि टी-20 के लिए शमी के नाम पर विचार नहीं हुआ। वहीं घरेलू क्रिकेट में बंगाल की ओर से रणजी, विजय हजारे और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में कुल 67 विकेट चटकाने के बावजूद सितंबर में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में उन्हें जगह नहीं मिली। राष्ट्रीय टीम में लगातार अनदेखी के बीच जयंत से इस मुलाकात को एक नए मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। क्रिकेट से दूरी के इस दौर में जयंत चौधरी से मुलाकात ने उनके भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या मोहम्मद शमी पहले भी राजनीति में आने के संकेत दे चुके हैं?
मोहम्मद शमी ने राजनीति में आने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया था। अप्रैल 2026 में जब उनसे सियासत में कदम रखने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा था कि फिलहाल उनका ध्यान क्रिकेट पर है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि जब उनका मन बनेगा, तब वह इस बारे में बताएंगे।
मोहम्मद शमी के करियर से जुड़ा एक पुराना अनुभव भी चर्चा में रहा है। वर्ष 2023 में उन्होंने बताया था कि उत्तर प्रदेश की रणजी टीम में चयन के लिए दो बार अंतिम दौर तक पहुंचने के बावजूद उनसे कथित तौर पर कुर्सी हिलाने की मांग की गई थी। इसके बाद उनके भाई हसीब ने फॉर्म फाड़ दिया था और शमी ने बंगाल की ओर से खेलने का फैसला किया।
मोहम्मद शमी नहीं तो बड़े भाई हसीब की सियासी पारी?
जयंत चौधरी से मुलाकात के बाद अब चर्चा सिर्फ मोहम्मद शमी तक सीमित नहीं है। अमरोहा में उनके बड़े भाई हसीब अहमद को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि अगर शमी क्रिकेट की व्यस्तताओं के चलते चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो परिवार के किसी दूसरे सदस्य को सियासी मैदान में उतारा जा सकता है।
हसीब के अमरोहा से चुनाव लड़ने की चर्चाएं पहले भी सामने आती रही हैं। हालांकि, न तो हसीब ने और न ही रालोद ने उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी दी है। हसीब अहमद ने इस मुलाकात पर अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा,
"मैं अभी कानपुर में हूं। मुझे शमी और जयंत चौधरी की रविवार को हुई मुलाकात की जानकारी नहीं है। फिलहाल मैं गाड़ी चला रहा हूं। कुछ देर बाद खाली होकर शमी से इस बारे में बात करूंगा। चुनाव लड़ना है या नहीं, इस पर अभी मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।"
अमरोहा सीट पर क्यों टिकी हैं सबकी निगाहें?
अमरोहा विधानसभा सीट को मुस्लिम बहुल क्षेत्र माना जाता है। यहां करीब सवा तीन लाख मतदाताओं में लगभग दो लाख मुस्लिम मतदाता बताए जाते हैं। इनमें तुर्क बिरादरी की संख्या करीब 70 हजार है। मोहम्मद शमी का परिवार इसी समुदाय से आता है।
अमरोहा सीट पर पिछले पांच चुनावों से सपा के महबूब अली विधायक रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में अगर 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और रालोद गठबंधन के तहत यह सीट रालोद के हिस्से में आती है, तो स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
रालोद अमरोहा के साथ नौगावां सादात सीट पर भी दावेदारी जता रही है। अमरोहा से बीजेपी के टिकट की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं के लिए भी सीट का गठबंधन में जाना सियासी समीकरण बदल सकता है। फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। शमी की जयंत चौधरी से मुलाकात ने चर्चाओं को जरूर हवा दी है, लेकिन चुनाव लड़ने या पार्टी में शामिल होने का कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।