UP में कहां-कहां फैला लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नेटवर्क? 5 गिरफ्तार, 26 की तलाश में STF

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
Lawrence Bishnoi Gang Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े असलहा तस्करी नेटवर्क की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. गोरखपुर STF ने सोमवार रात कैंट थाना क्षेत्र के विंध्यवासिनी पार्क के पास से पांच कथित असलहा तस्करों को गिरफ्तार किया. पूछताछ के दौरान आरोपियों के कथित तौर पर गैंग से संपर्क और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी सामने आई. STF ने इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया है. इनमें से पांच की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 26 अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.
STF के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान गैंग से जुड़े 26 अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली है. इन आरोपियों के तार गोरखपुर के अलावा महाराजगंज, देवरिया और संत कबीर नगर से जुड़े बताए जा रहे हैं. इसके अलावा बिहार के बेतिया और अन्य स्थानों के लोगों के नाम भी जांच में सामने आए हैं.
STF अब यह पता लगाने में जुटी है कि गोरखपुर में इस नेटवर्क का फैलाव कहां तक है और इसमें और कौन-कौन लोग जुड़े हैं. फरार आरोपियों की तलाश में गोरखपुर और आसपास के जिलों में लगातार दबिश दी जा रही है. बिहार के बेतिया निवासी शशांक पांडे की तलाश में STF की एक टीम उसके गांव तक पहुंची है.
पांच आरोपियों को जेल भेजा गया
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजीत यादव, श्रेयांश यादव उर्फ बबलू, अभिषेक गौंड उर्फ भेली, अभिषेक प्रजापति और राहुल गुप्ता के रूप में हुई है. सभी को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.
आरोपियों के खिलाफ STF गोरखपुर यूनिट प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह की तहरीर पर कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है. अब कैंट पुलिस भी मामले की जांच कर रही है.
एक असलहा बेचने पर 10 हजार रुपये का मुनाफा
पूछताछ में STF को असलहा तस्करी के कथित तरीके और कमाई से जुड़ी जानकारी भी मिली है. गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि गैंग के सदस्यों को एक असलहा बेचने पर करीब 10 हजार रुपये मिलते थे, जबकि बिचौलिये को 2 हजार रुपये दिए जाते थे. STF अब इस लेनदेन की पुष्टि के लिए आरोपियों के मोबाइल फोन और बैंक खातों की जांच कर रही है.
सोशल मीडिया और पुराने मामलों से भी जोड़कर जांच
STF फरार आरोपियों के सोशल मीडिया अकाउंट भी खंगाल रही है. इसके जरिए उनके संपर्क, गतिविधियों और गोरखपुर में रहने के दौरान जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है. जांच टीम पुराने आर्म्स एक्ट के मामलों में बरामद हथियारों के स्रोत का भी मिलान कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उनका संबंध इसी नेटवर्क से तो नहीं है.
STF का फोकस अब फरार 26 आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने पर है. टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि असलहा तस्करी के इस नेटवर्क का संपर्क किन-किन लोगों और स्थानों तक फैला हुआ है.

प्रदीप कुमार तिवारी
प्रदीप कुमार तिवारी ने 2014 से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्होंने p7 न्यूज चैनल से करियर की शुरुवात की. प्रदीप कुमार तिवारी TV9 भारतवर्ष चैनल में आने से पहले Zee news में भी काम कर चुके हैं. प्रदीप को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है. कई वर्षों से डिजिटल में रहने की वजह से डिजिटल कंटेंट पर पकड़ अच्छी है. प्रदीप तिवारी पत्रकारिता के साथ-साथ एनीमेशन फील्ड में भी अच्छी पकड़ रखते हैं. उन्हें ग्राफिक डिजाइनिंग के साथ साथ 2D और 3D एनीमेशन की जानकारी अच्छी है. प्रदीप ने लगभग 2 वर्ष तक प्रभात खबर के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम किया है.
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