UP Census 2027: विधानसभा चुनाव से पहले बदला शेड्यूल, 1 दिसंबर से घर-घर जनगणना; जानें पूरी टाइमलाइन
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जनगणना का बड़ा चरण पूरा करने की तैयारी तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने Census 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (Population Enumeration) का कार्यक्रम बदल दिया है। उत्तर प्रदेश में अब प्रगणक 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक घर-घर जाकर प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी जानकारी दर्ज करेंगे। इससे पहले यह काम फरवरी 2027 में होना था।
5 सितंबर 2026 को जारी भारत सरकार की राजपत्र अधिसूचना के मुताबिक उत्तर प्रदेश के साथ गोवा, पंजाब और उत्तराखंड के गैर-बर्फीले इलाकों में भी जनसंख्या गणना 1 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 4 जनवरी 2027 तक चलेगी। इसके बाद 5 से 9 जनवरी 2027 के बीच पुनरीक्षण यानी Revisional Round होगा। नागरिकों को घर-घर गणना शुरू होने से पहले 16 से 30 नवंबर 2026 तक अपनी जानकारी स्वयं ऑनलाइन दर्ज करने का विकल्प भी मिलेगा।
जनगणना के इस चरण की Reference Date 5 जनवरी 2027 की रात 12 बजे यानी 00:00 बजे तय की गई है। इसका अर्थ है कि जनसंख्या से संबंधित आंकड़ों को इसी संदर्भ समय के आधार पर अंतिम रूप दिया जाएगा।
इस बार Census 2027 कई मायनों में अलग होगा। जनसंख्या गणना के दौरान जाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी और केंद्र सरकार दूसरे चरण के लिए कुल 40 सवाल अधिसूचित कर चुकी है। इसमें उम्र, शिक्षा, भाषा, रोजगार और माइग्रेशन से लेकर धर्म, जाति और कई सामाजिक-आर्थिक जानकारियां शामिल हैं।
UP Census 2027 की नई टाइमलाइन
| प्रक्रिया | नई तारीख |
|---|---|
| राज्य स्तर पर प्रशिक्षण शुरू | 16 सितंबर 2026 |
| दूसरे चरण की Self Enumeration | 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 |
| घर-घर जनसंख्या गणना | 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 |
| Census Reference Date/Time | 5 जनवरी 2027, रात 12 बजे |
| Revisional Round | 5 जनवरी से 9 जनवरी 2027 |
| पहले चरण की Self Enumeration | 7 मई से 21 मई 2026 |
| मकान सूचीकरण और आवास गणना | 22 मई से 20 जून 2026 |
उत्तर प्रदेश में राज्य स्तर के प्रशिक्षण की शुरुआत 16 सितंबर से करने और इसे सितंबर के भीतर पूरा करने की तैयारी है। दूसरे चरण के लिए छह लाख से अधिक कर्मचारियों को जिम्मेदारी दिए जाने की बात भी सामने आई है।
पहले फरवरी में होनी थी यूपी में जनसंख्या गणना
UP Census 2027 के दूसरे चरण को पहले 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच आयोजित करने की तैयारी थी। उत्तर प्रदेश में साल की शुरुआत में जारी कार्यक्रमों और जिला स्तर की तैयारियों में भी यही तारीख दर्ज की गई थी।
मई 2026 में सामने आए यूपी के Census 2027 रोडमैप में पहले चरण के लिए 22 मई से 20 जून तक मकान सूचीकरण और दूसरे चरण के लिए 9 से 28 फरवरी 2027 के बीच व्यक्तिगत जनसंख्या गणना तय थी।
अब दिसंबर-जनवरी की नई समय-सारणी लागू होने से उत्तर प्रदेश का मुख्य Population Enumeration चरण पहले के कार्यक्रम की तुलना में करीब दो महीने पहले पूरा हो जाएगा।
| Census 2027 का चरण | पुराना कार्यक्रम | संशोधित कार्यक्रम |
|---|---|---|
| Self Enumeration, Phase-II | फरवरी 2027 के मुख्य सर्वे से पहले | 16-30 नवंबर 2026 |
| घर-घर जनसंख्या गणना | 9-28 फरवरी 2027 | 1 दिसंबर 2026-4 जनवरी 2027 |
| संदर्भ समय | पहले मार्च 2027 के लिए प्रस्तावित | 5 जनवरी 2027, 00:00 बजे |
| Revisional Round | फरवरी-मार्च के बाद | 5-9 जनवरी 2027 |
UP Assembly Election 2027 से क्या है इसका संबंध?
जनगणना का कार्यक्रम ऐसे समय बदला गया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक मौजूदा उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 23 मई 2022 से 22 मई 2027 तक है। राज्य में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं।
इसी कारण 2027 की शुरुआत में बड़े पैमाने पर चुनावी और प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। जनगणना और चुनाव दोनों ही ऐसे अभियान हैं जिनमें बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और फील्ड स्टाफ की जरूरत पड़ती है।
जनसंख्या गणना को दिसंबर और जनवरी में पूरा करने से इसे विधानसभा चुनाव से जुड़ी संभावित प्रशासनिक व्यस्तताओं से अलग रखने में मदद मिलेगी। चार चुनावी राज्यों में Population Enumeration को पहले कराने की वजह आगामी चुनावी कार्यक्रम को बताया गया है।
हालांकि यहां एक बात स्पष्ट रखना जरूरी है—जनगणना का नया शेड्यूल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं है। चुनाव किस तारीख को और कितने चरणों में होंगे, इसका आधिकारिक कार्यक्रम भारत निर्वाचन आयोग ही घोषित करेगा। फिलहाल चुनाव आयोग की वेबसाइट उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक दिखाती है।
यूपी ही नहीं, चार चुनावी राज्यों में बदला कार्यक्रम
5 सितंबर की अधिसूचना केवल उत्तर प्रदेश के लिए नहीं है। केंद्र ने चार चुनावी राज्यों/क्षेत्रों के लिए समान Population Enumeration कार्यक्रम तय किया है।
| राज्य/क्षेत्र | Population Enumeration |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 |
| पंजाब | 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 |
| गोवा | 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 |
| उत्तराखंड के गैर-बर्फीले इलाके | 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 |
| Self Enumeration | 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 |
| Revisional Round | 5 जनवरी से 9 जनवरी 2027 |
भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के हस्ताक्षर से जारी S.O. 4729(E) अधिसूचना में ये तारीखें निर्धारित की गई हैं। यह आदेश Census Act, 1948 और Census Rules, 1990 के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है।
16 नवंबर से खुद भर सकेंगे परिवार की जानकारी
Census 2027 में डिजिटल प्रक्रिया का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ाया गया है। उत्तर प्रदेश के नागरिकों को दूसरे चरण की घर-घर गणना शुरू होने से पहले 15 दिनों की Self Enumeration Window मिलेगी।
यह सुविधा 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 के बीच उपलब्ध होगी। इस दौरान परिवार अपनी जानकारी स्वयं डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 1 दिसंबर से प्रगणकों का घर-घर अभियान शुरू होगा।
यूपी में पहले चरण के दौरान भी Self Enumeration का विकल्प दिया गया था। उस समय यह सुविधा 7 मई से 21 मई 2026 तक उपलब्ध रही थी, जबकि House Listing and Housing Census का मुख्य अभियान 22 मई से 20 जून तक चला। उत्तर प्रदेश सरकार की जिला प्रशासन वेबसाइटों पर भी पहले चरण की यही तारीखें दर्ज हैं।
इस तरह Census 2027 में आम नागरिक सिर्फ प्रगणक के आने का इंतजार करने तक सीमित नहीं रहेंगे। निर्धारित अवधि में डिजिटल माध्यम से स्वयं विवरण दर्ज करने का विकल्प भी उपलब्ध होगा।
जनगणना के दो चरण, दोनों का काम अलग
Census 2027 को दो प्रमुख चरणों में बांटा गया है। दोनों का उद्देश्य अलग है और दूसरे चरण को समझने के लिए पहले चरण की भूमिका जानना जरूरी है।
पहला चरण—House Listing and Housing Census: इसमें भवनों, मकानों, उपलब्ध सुविधाओं और परिवार के पास मौजूद परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी जुटाई जाती है।
दूसरा चरण—Population Enumeration: इसमें परिवार में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय जानकारी दर्ज की जाती है। जाति की गणना भी इसी चरण में होगी। गृह मंत्रालय ने संसद में दिए जवाब में भी स्पष्ट किया है कि Census 2027 के पहले चरण में आवास की स्थिति, परिसंपत्तियां और सुविधाएं दर्ज होती हैं, जबकि दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक जानकारी ली जाएगी।
पहले चरण में यूपी में क्या-क्या हुआ?
उत्तर प्रदेश में House Listing and Housing Census का चरण पहले ही पूरा किया जा चुका है। राज्य में यह अभियान 22 मई से 20 जून 2026 तक चला था। इससे पहले 7 से 21 मई के बीच Self Enumeration का विकल्प दिया गया।
पहले चरण के लिए करीब 3,90,717 House Listing Blocks बनाए गए। इनमें करीब 1.04 लाख गांव और 14,983 वार्ड शामिल थे। इस दौरान करीब छह करोड़ मकानों का सूचीकरण किए जाने की बात सामने आई है।
| पहले चरण से जुड़ा आंकड़ा | संख्या/तारीख |
|---|---|
| House Listing Blocks | 3,90,717 |
| गांव | करीब 1.04 लाख |
| वार्ड | 14,983 |
| सूचीबद्ध मकान | करीब 6 करोड़ |
| पहले चरण की Self Enumeration | 7-21 मई 2026 |
| House Listing | 22 मई-20 जून 2026 |
| पहले चरण में कर्मी | करीब 5 लाख |
क्या यूपी की आबादी 30 करोड़ हो गई है?
पहले चरण में करीब छह करोड़ मकानों के सूचीकरण के आधार पर उत्तर प्रदेश की आबादी को लेकर करीब 30 करोड़ का अनुमान सामने आया है। यह अनुमान प्रति परिवार औसतन पांच सदस्यों की साधारण गणना के आधार पर लगाया जा रहा है।
लेकिन इसे अभी उत्तर प्रदेश की आधिकारिक जनसंख्या नहीं माना जा सकता।
मकानों की संख्या को परिवार के औसत आकार से गुणा कर निकाली गई संख्या केवल अनुमान है। प्रदेश की वास्तविक जनसंख्या का Census 2027 आंकड़ा दूसरे चरण की व्यक्तिगत गणना और उसके बाद डेटा प्रोसेसिंग पूरी होने पर ही स्पष्ट होगा।
इसलिए 30 करोड़ की संख्या को अनुमानित आबादी के रूप में ही पढ़ना चाहिए, न कि अंतिम सरकारी Census Population के रूप में।
छह लाख से ज्यादा कर्मचारियों की लग सकती है ड्यूटी
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में घर-घर जनसंख्या गणना के लिए बड़े स्तर पर मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। मूल रिपोर्ट में बताया गया है कि दूसरे चरण में प्रदेश में छह लाख से अधिक कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण शुरू हो चुका है और यूपी में राज्य स्तरीय प्रशिक्षण 16 सितंबर से शुरू करने का कार्यक्रम बताया गया है।
इससे पहले House Listing चरण के लिए भी करीब पांच लाख कर्मचारियों को लगाने की तैयारी की गई थी। राज्य को लगभग 3.90 लाख गणना ब्लॉकों में बांटे जाने की जानकारी मई में सामने आई थी।
एक ही समय पर चुनाव और जनगणना जैसे दो बड़े अभियानों का संचालन प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता था। यही वजह है कि Population Enumeration को चुनावी गतिविधियों से पहले पूरा करने का फैसला प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस बार जाति भी पूछी जाएगी
Census 2027 का दूसरा चरण सबसे ज्यादा चर्चा जातिगत गणना को लेकर बटोर रहा है।
केंद्र सरकार ने जनसंख्या गणना के लिए कुल 40 सवालों को अधिसूचित किया है और इनमें व्यक्ति की जाति से संबंधित सवाल भी शामिल है। DD News की रिपोर्ट के मुताबिक स्वतंत्रता के बाद पहली बार सभी समुदायों की व्यापक जाति गणना सामान्य जनगणना के Population Enumeration चरण में की जाएगी।
ThePrint की रिपोर्ट के मुताबिक जाति से संबंधित सवाल open-ended होगा। यानी प्रगणक को व्यक्ति द्वारा बताई गई जाति दर्ज करनी होगी; कोई सीमित ड्रॉपडाउन सूची या केवल कुछ विकल्प चुनने की व्यवस्था नहीं होगी।
इसे ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है क्योंकि भारत की नियमित दशकीय जनगणना में सभी जातियों की व्यापक गणना लंबे समय से नहीं हुई थी।
Census 2027 में कौन-कौन से सवाल पूछे जाएंगे?
Population Enumeration में कुल 40 सवाल तय किए गए हैं। इनका उद्देश्य केवल लोगों की संख्या जानना नहीं, बल्कि देश की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय संरचना का विस्तृत डेटा तैयार करना है।
मुख्य श्रेणियां इस प्रकार रहेंगी:
| जानकारी की श्रेणी | किस तरह का विवरण |
|---|---|
| व्यक्तिगत पहचान | नाम, उम्र, लिंग आदि |
| सामाजिक जानकारी | जाति, SC/ST स्थिति, धर्म |
| भाषा | मातृभाषा और अन्य भाषाओं का ज्ञान |
| शिक्षा | शैक्षणिक स्थिति और साक्षरता |
| रोजगार | कार्य, व्यवसाय और आर्थिक गतिविधि |
| उद्योग/सेवा | व्यक्ति किस क्षेत्र के काम से जुड़ा है |
| माइग्रेशन | जन्म स्थान, पिछला निवास और स्थानांतरण |
| परिवार | वैवाहिक और पारिवारिक जानकारी |
| बच्चों से जुड़ी जानकारी | परिवार और जन्म से संबंधित विवरण |
| डिजिटल जानकारी | डिजिटल साक्षरता से संबंधित विवरण |
| सरकारी पहचान | Aadhaar, Voter ID आदि से संबंधित प्रश्न |
| बैंकिंग | बैंक खातों से संबंधित जानकारी |
| कोविड-19 | टीकाकरण के स्थान से जुड़ा प्रश्न |
केंद्र द्वारा अधिसूचित प्रश्नावली में जाति के अलावा धर्म, शिक्षा, रोजगार, माइग्रेशन और अन्य सामाजिक-आर्थिक विषय शामिल हैं। आधार, वोटर आईडी, बैंक खाते और कोविड टीकाकरण के स्थान जैसी जानकारियों से संबंधित प्रश्न भी रिपोर्ट किए गए हैं।
मोबाइल नंबर, आधार और Voter ID से जुड़े सवाल भी
मूल खबर में बताया गया है कि दूसरे चरण में मोबाइल नंबर, आधार नंबर, Voter ID और उपलब्ध होने पर पासपोर्ट तथा ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाएगी। बैंक खातों की संख्या और कोविड-19 टीकाकरण का स्थान भी प्रश्नावली का हिस्सा है।
इसका मतलब यह नहीं कि जनगणना केवल पहचान पत्रों का सत्यापन अभियान होगी। Population Enumeration का मूल उद्देश्य देश की जनसंख्या और उसकी सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं का सांख्यिकीय रिकॉर्ड तैयार करना है।
जनगणना और मतदाता सूची संशोधन भी अलग-अलग संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं। मतदाता सूची तैयार और संशोधित करने की जिम्मेदारी निर्वाचन तंत्र की है, जबकि Census 2027 का संचालन भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के तहत किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश चुनाव और जनगणना की तारीखों को लेकर क्या समझें?
नई समय-सारणी का सबसे महत्वपूर्ण असर यही है कि उत्तर प्रदेश में Census 2027 की वास्तविक व्यक्ति-गणना विधानसभा चुनाव के संभावित चरम प्रशासनिक चरण से पहले समाप्त हो जाएगी।
दिसंबर में काम शुरू होगा, 4 जनवरी तक घर-घर अभियान पूरा होगा और 9 जनवरी तक Revisional Round भी खत्म हो जाएगा। इसके बाद Census से जुड़े डेटा की आगे की प्रोसेसिंग जारी रह सकती है, लेकिन फील्ड स्तर पर बड़े पैमाने की घर-घर गणना समाप्त हो जाएगी।
दूसरी ओर, यूपी विधानसभा की संवैधानिक अवधि 22 मई 2027 को समाप्त हो रही है। राज्य में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं और 80 लोकसभा सीटें हैं।
इस समय चुनाव आयोग ने 2027 विधानसभा चुनाव की मतदान या मतगणना की तारीखें घोषित नहीं की हैं। इसलिए फरवरी, मार्च या किसी दूसरी तारीख को चुनाव होना अभी आधिकारिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
चुनावी राज्यों में जल्दी जनगणना पर राजनीतिक सवाल भी
चार चुनावी राज्यों में Population Enumeration की तारीख बदलने पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे खराब योजना बताया और सरकार की टाइमिंग की आलोचना की। कांग्रेस ने दावा किया कि विपक्ष की ओर से Census प्रक्रिया को लेकर पहले दिए गए सुझावों पर ध्यान नहीं दिया गया।
यह कांग्रेस का राजनीतिक पक्ष है। दूसरी ओर, सरकारी अधिसूचना ने औपचारिक रूप से नए कार्यक्रम, Self Enumeration, Revisional Round और Reference Date को निर्धारित कर दिया है। चुनावी राज्यों में प्रक्रिया पहले पूरी कराने को प्रशासनिक और चुनावी कार्यक्रमों के संभावित टकराव से जोड़कर देखा जा रहा है।
Census 2027 के लिए अब आगे क्या होगा?
उत्तर प्रदेश में पहला बड़ा चरण पूरा हो चुका है। अब प्रशासन का फोकस Population Enumeration पर होगा।
सितंबर में प्रशिक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। नवंबर के दूसरे हिस्से में नागरिकों के लिए Self Enumeration Window खुलेगी। इसके बाद 1 दिसंबर से प्रगणक घर-घर पहुंचेंगे और प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी दर्ज करेंगे।
पूरा कार्यक्रम इस तरह आगे बढ़ेगा:
16 सितंबर 2026 से: राज्य स्तर पर प्रशिक्षण प्रक्रिया।
16 नवंबर 2026: दूसरे चरण की Self Enumeration शुरू।
30 नवंबर 2026: Self Enumeration Window समाप्त।
1 दिसंबर 2026: घर-घर Population Enumeration शुरू।
4 जनवरी 2027: मुख्य घर-घर गणना समाप्त।
5 जनवरी 2027, रात 12 बजे: Census Reference Time।
5 से 9 जनवरी 2027: Revisional Round।
इसके बाद जुटाए गए आंकड़ों की प्रोसेसिंग, जांच और सांख्यिकीय संकलन का काम आगे बढ़ेगा।
यूपी के लिए क्यों अहम है Census 2027?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा विधानसभा वाला राज्य है और आबादी के लिहाज से भी इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। नई जनगणना से राज्य में पिछले Census के बाद हुए जनसांख्यिकीय बदलाव की विस्तृत तस्वीर सामने आएगी।
इसमें सिर्फ यह नहीं पता चलेगा कि उत्तर प्रदेश में कितने लोग रहते हैं। आंकड़े यह समझने में भी मदद करेंगे कि लोग कहां रह रहे हैं, उनकी उम्र और शिक्षा की स्थिति क्या है, रोजगार का स्वरूप कैसा है, माइग्रेशन किस दिशा में हुआ है और अलग-अलग सामाजिक समूहों की संरचना कैसी है।
जाति संबंधी सवाल जुड़ने से Census 2027 का राजनीतिक और नीतिगत महत्व और बढ़ गया है।
हालांकि जनगणना का डेटा तैयार होने और उसके आधार पर भविष्य की नीतिगत या संवैधानिक प्रक्रियाएं आगे बढ़ने में समय लगता है। इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि दिसंबर-जनवरी की गणना पूरी होते ही उसी डेटा से UP Assembly Election 2027 की सीटों या मतदाता सूची में तत्काल बदलाव हो जाएगा।
चुनाव से पहले पूरा होगा सबसे बड़ा फील्ड सर्वे
उत्तर प्रदेश में Census 2027 की बदली टाइमलाइन अब साफ है। पहले फरवरी 2027 में प्रस्तावित Population Enumeration को आगे खिसकाकर 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच पूरा किया जाएगा। घर-घर गणना से पहले 16 से 30 नवंबर तक Self Enumeration उपलब्ध रहेगी और 5 से 9 जनवरी तक पुनरीक्षण किया जाएगा।
पहला चरण मई-जून में पूरा हो चुका है। अब दूसरे चरण में प्रदेश के हर व्यक्ति की गणना होगी और पहली बार व्यापक जाति संबंधी जानकारी भी सामान्य Census Population Enumeration का हिस्सा बनेगी। कुल 40 सवालों के जरिए सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और जनसांख्यिकीय जानकारी जुटाई जाएगी।
उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण के लिए छह लाख से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने की तैयारी है। प्रदेश के करीब 3.90 लाख House Listing Blocks में पहले चरण का काम पूरा हो चुका है और करीब छह करोड़ मकानों के सूचीकरण की जानकारी सामने आई है। इसी आधार पर यूपी की आबादी करीब 30 करोड़ पहुंचने का एक शुरुआती अनुमान लगाया जा रहा है, लेकिन अंतिम आधिकारिक जनसंख्या दूसरे चरण की गणना और डेटा प्रोसेसिंग के बाद ही सामने आएगी।
2027 के विधानसभा चुनाव की आधिकारिक तारीखें अभी निर्वाचन आयोग ने घोषित नहीं की हैं। इतना तय है कि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है और उससे पहले Census 2027 का सबसे बड़ा घर-घर सर्वे जनवरी की शुरुआत में पूरा करने का कार्यक्रम अब औपचारिक रूप से तय हो चुका है।
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